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Jaunpur News: 1.71 लाख हैंडपंपों के भरोसे जिला, फिर भी 200 मीटर दूर से ढोना पड़ रहा पानी
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जौनपुर। सूरज की तपिश बढ़ने के साथ ही जिले में पेयजल का संकट गहराने लगा है। ग्रामीण इलाकों में स्थिति विकट हो गई है; कहीं हैंडपंपों ने दम तोड़ दिया है, तो कहीं से निकलने वाला दूषित और बदबूदार पानी बीमारियों को दावत दे रहा है। शनिवार को पड़ताल में सामने आया कि लोग शुद्ध पानी के लिए सौ से दो सौ मीटर तक भटकने को मजबूर हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, जिले की ग्राम पंचायतों में कुल 1,71,099 हैंडपंप दर्ज हैं। कागजों पर यह संख्या भारी-भरकम है लेकिन धरातल पर इनमें से बड़ी संख्या में हैंडपंप या तो खराब हैं या रीबोर की बाट जोह रहे हैं।
कई जगह वाटर लेवल नीचे जाने से पंपों ने पानी छोड़ दिया है, और जहां पानी आ भी रहा है, वह मटमैला और पीने योग्य नहीं है। बदहाली का आलम यह है कि धर्मापुर ब्लॉक परिसर में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के ठीक सामने लगा इंडिया मार्का हैंडपंप पिछले तीन महीनों से सफेद हाथी बना हुआ है। भीषण गर्मी में छात्राओं और राहगीरों को भारी किल्लत झेलनी पड़ रही है। प्रशासनिक दावा- मरम्मत का काम जारी :
पेयजल संकट पर मछलीशहर के एडीओ पंचायत सुशील उपाध्याय ने बताया कि ब्लॉक में चिह्नित 20 खराब इंडिया मार्का हैंडपंपों में से 17 की मरम्मत करा दी गई है। शेष तीन हैंडपंपों के रीबोर की प्रक्रिया जल्द पूरी कर ली जाएगी।
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कई जगह वाटर लेवल नीचे जाने से पंपों ने पानी छोड़ दिया है, और जहां पानी आ भी रहा है, वह मटमैला और पीने योग्य नहीं है। बदहाली का आलम यह है कि धर्मापुर ब्लॉक परिसर में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के ठीक सामने लगा इंडिया मार्का हैंडपंप पिछले तीन महीनों से सफेद हाथी बना हुआ है। भीषण गर्मी में छात्राओं और राहगीरों को भारी किल्लत झेलनी पड़ रही है। प्रशासनिक दावा- मरम्मत का काम जारी :
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पेयजल संकट पर मछलीशहर के एडीओ पंचायत सुशील उपाध्याय ने बताया कि ब्लॉक में चिह्नित 20 खराब इंडिया मार्का हैंडपंपों में से 17 की मरम्मत करा दी गई है। शेष तीन हैंडपंपों के रीबोर की प्रक्रिया जल्द पूरी कर ली जाएगी।

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