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माता जानकी का जीवन प्रेम, त्याग और साहस का प्रतीक : हरिशंकर
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जलालपुर, पुरेव गांव स्थित सिद्धपीठ बड़कू हनुमान जी मंदिर प्रांगण में चल रहा नौ दिवसीय अंतरराष्ट
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जलालपुर। पुरेव गांव स्थित सिद्धपीठ बड़कू हनुमान मंदिर प्रांगण में चल रहे नौ दिवसीय अंतरराष्ट्रीय नारी महाकुंभ के तीसरे दिन नारी शिक्षा और सशक्तीकरण पर जोर दिया गया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कानपुर प्रांत प्रमुख हरिशंकर ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने माता जानकी के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि वे चारों वेदों, नीति, धर्म, युद्ध कला और राज्यपाठ की ज्ञाता थीं। साथ ही, बड़कू हनुमान जी प्रांगण में नव निर्मित जानकी कुंड में माता जानकी की आदमकद मूर्ति स्थापित किए जाने की घोषणा की गई।
सनातन धर्म सम्राट जगद्गुरु बालक देवाचार्य ने विश्व में पहली बार मातु जानकी कथा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि माता जानकी का जीवन सत्य, प्रेम, त्याग और साहस का प्रतीक है। उन्होंने अशोक वाटिका में कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और बुद्धिमत्ता का परिचय दिया। उन्होंने नारियों को शिक्षित और शारीरिक रूप से मजबूत बनने की सीख दी ताकि वे किसी भी परिस्थिति का सामना कर सकें।कार्यक्रम में सिद्ध पीठ बड़कू हनुमान आश्रम के मठाधीश स्वामी प्रभु रामदास, राम पंथ के धर्म प्रवक्ता डॉ. कवीन्द्र नारायण, प्रसिद्ध समाजसेवी शैलेंद्र शुक्ला, डॉ. अर्चना भारतवंशी, डॉ. मृदुला जायसवाल सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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जानकी की कसम, बेटियों को पढ़ाएंगे: डॉ. राजीव
विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राम पंथ के पंथाचार्य प्रो.डॉ.राजीव श्री गुरूजी ने जौनपुर को सांस्कृतिक पुनर्जागरण का केंद्र बनाने का संकल्प लिया। उनके आह्वान पर उपस्थित हजारों महिलाओं ने जानकी की कसम, हम अपनी बेटियों को जरूर पढ़ाएंगे का संकल्प लिया। डॉ. राजीव ने कहा कि शिक्षा ही बेटियों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाएगी। उन्होंने प्राचीन भारत की विदुषी नारियों गार्गी, मैत्रेयी, अपाला और लोपामुद्रा का स्मरण करते हुए कहा कि एक शिक्षित नारी पूरे राष्ट्र को शिक्षित करने की क्षमता रखती है।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कानपुर प्रांत प्रमुख हरिशंकर ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने माता जानकी के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि वे चारों वेदों, नीति, धर्म, युद्ध कला और राज्यपाठ की ज्ञाता थीं। साथ ही, बड़कू हनुमान जी प्रांगण में नव निर्मित जानकी कुंड में माता जानकी की आदमकद मूर्ति स्थापित किए जाने की घोषणा की गई।
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सनातन धर्म सम्राट जगद्गुरु बालक देवाचार्य ने विश्व में पहली बार मातु जानकी कथा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि माता जानकी का जीवन सत्य, प्रेम, त्याग और साहस का प्रतीक है। उन्होंने अशोक वाटिका में कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और बुद्धिमत्ता का परिचय दिया। उन्होंने नारियों को शिक्षित और शारीरिक रूप से मजबूत बनने की सीख दी ताकि वे किसी भी परिस्थिति का सामना कर सकें।कार्यक्रम में सिद्ध पीठ बड़कू हनुमान आश्रम के मठाधीश स्वामी प्रभु रामदास, राम पंथ के धर्म प्रवक्ता डॉ. कवीन्द्र नारायण, प्रसिद्ध समाजसेवी शैलेंद्र शुक्ला, डॉ. अर्चना भारतवंशी, डॉ. मृदुला जायसवाल सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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जानकी की कसम, बेटियों को पढ़ाएंगे: डॉ. राजीव
विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राम पंथ के पंथाचार्य प्रो.डॉ.राजीव श्री गुरूजी ने जौनपुर को सांस्कृतिक पुनर्जागरण का केंद्र बनाने का संकल्प लिया। उनके आह्वान पर उपस्थित हजारों महिलाओं ने जानकी की कसम, हम अपनी बेटियों को जरूर पढ़ाएंगे का संकल्प लिया। डॉ. राजीव ने कहा कि शिक्षा ही बेटियों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाएगी। उन्होंने प्राचीन भारत की विदुषी नारियों गार्गी, मैत्रेयी, अपाला और लोपामुद्रा का स्मरण करते हुए कहा कि एक शिक्षित नारी पूरे राष्ट्र को शिक्षित करने की क्षमता रखती है।