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Jhansi News: अटल एकता पार्क में झूल रहे बदहाली के झूले
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अटल एकता पार्क
झांसी। शहर के अटल एकता पार्क में बच्चों के मनोरंजन के नाम पर बदहाली के झूले झूल रहे हैं। यहां मुफ्त में खेलने और मनोरंजन के लिए लगाए गए झूले टूटकर बेकार पड़े हैं। कई झूलों में सिर्फ पोल बचे हैं, जबकि ओपन जिम के उपकरण भी क्षतिग्रस्त हैं।
वहीं, जिन मनोरंजन साधनों के इस्तेमाल के लिए शुल्क वसूला जा रहा है, वे भी अपेक्षाकृत पूरी तरह दुरुस्त नहीं हैं। पार्क की पड़ताल में सामने आई यह तस्वीर व्यवस्था की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करती है। शुल्क वाले साधनों की कुछ हद तक देखरेख हो रही है, लेकिन बच्चों के मुफ्त मनोरंजन की सुविधाओं को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है।
पार्क में मौजूद कर्मचारी ने बताया कि प्रतिदिन लगभग 800 परिवार सैर करने के लिए आते हैं। इसके साथ ही सैंकड़ों विद्यार्थियों और मुसाफिर भी यहां घूमने आते हैं। पार्क में कार्यक्रम आयोजन स्थल के पास स्थित पार्क में गंदगी का अंबार लगा हुआ है।
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पार्क में परिवार बच्चों के साथ अच्छा समय बिताने और उन्हें खेलने का अवसर देने पहुंचते हैं, लेकिन टूटे झूले और खराब उपकरण बच्चों की उम्मीदों पर पानी फेर रहे हैं। जिन सुविधाओं का लाभ बच्चों को बिना शुल्क मिलना चाहिए, वे ही इस्तेमाल के लायक नहीं बची हैं।
कदम-कदम पर वसूली, सुविधाएं अधूरी
अटल एकता पार्क के गेट से ही वसूली शुरू हो जाती है। यदि वाहन से गए हैं, तो पार्किंग शुल्क देना होगा। इसके बाद 10 रुपये के प्रवेश टिकट पर एंट्री मिलेगी। अब साथ में बच्चें हैं, तो वे खेलने की जिद भी करेंगे, लेकिन जो झूले निशुल्क लगाए थे, वे टूटे पड़े हैं। ऐसे में हर झूले और सुविधा का शुल्क चुकाना परिजन के लिए मजबूरी हो जाता है।
खाली पोल खोल पोल
झूलों के नाम पर खड़े पोल बदहाली की कहानी बयां कर रहे हैं। दो जगह पार्क में सिर्फ पोल खड़े हैं, उनमें झूले नहीं लगे हैं। एडवेंचर के लिए भी कुछ जगह पर निशुल्क व्यवस्था है, लेकिन वे टूटे पड़े हैं। शीशो जंग खाने के साथ टूटे हुए हैं। वहीं, ओपन जिम के दस रुपये लिए जाते हैं, लेकिन यहां भी कुछ उपकरण टूटे पड़े हैं। रुपये लेकर जिन झूलों पर झुलाया जाता है, वे जंग खा गए हैं।
बच्चों की सुरक्षा से भी खिलवाड़ का खतरा
टूटे झूले और क्षतिग्रस्त उपकरण केवल बदहाली का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि इनका इस्तेमाल करने की कोशिश करने वाले बच्चों के लिए जोखिम भी पैदा कर सकते हैं। ऐसे में इन साधनों को दुरुस्त कराना और जरूरत पड़ने पर मरम्मत होने तक इस्तेमाल रोकना जरूरी है।
पर्यटकों की पीड़ा : बेहतर से बदहाल हुई व्यवस्था
टूटे हुए शीशो पर अपने बच्चों को झुलाने वाले अकबर रईन ने बताया कि वह इस पार्क में कई बार आ चुके हैं। यह जब शुरू हुआ था, तब व्यवस्थाएं बेहतर थीं। बच्चे झूलों पर झूलकर खूब खुश होते थे, लेकिन अब ये सब टूट गए हैं। वहीं, एक अन्य महिला ने बताया कि बच्चे जिद करते हैं, इसलिए उन्हें पार्क में ले आते हैं, लेकिन यहां झूले आदि सब टूटे पड़े हैं। सीपरी बाजार निवासी विक्रांत ने कहा कि वह अपने बच्चों को पार्क में लेकर आए, लेकिन यहां लगे झूले टूटे हैं। अब मजबूरी में रुपये देकर मिकी माउस, लंदन बस, जंपिंग झूले में झुलाना पड़ा है।
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वहीं, जिन मनोरंजन साधनों के इस्तेमाल के लिए शुल्क वसूला जा रहा है, वे भी अपेक्षाकृत पूरी तरह दुरुस्त नहीं हैं। पार्क की पड़ताल में सामने आई यह तस्वीर व्यवस्था की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करती है। शुल्क वाले साधनों की कुछ हद तक देखरेख हो रही है, लेकिन बच्चों के मुफ्त मनोरंजन की सुविधाओं को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है।
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पार्क में मौजूद कर्मचारी ने बताया कि प्रतिदिन लगभग 800 परिवार सैर करने के लिए आते हैं। इसके साथ ही सैंकड़ों विद्यार्थियों और मुसाफिर भी यहां घूमने आते हैं। पार्क में कार्यक्रम आयोजन स्थल के पास स्थित पार्क में गंदगी का अंबार लगा हुआ है।
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पार्क में परिवार बच्चों के साथ अच्छा समय बिताने और उन्हें खेलने का अवसर देने पहुंचते हैं, लेकिन टूटे झूले और खराब उपकरण बच्चों की उम्मीदों पर पानी फेर रहे हैं। जिन सुविधाओं का लाभ बच्चों को बिना शुल्क मिलना चाहिए, वे ही इस्तेमाल के लायक नहीं बची हैं।
कदम-कदम पर वसूली, सुविधाएं अधूरी
अटल एकता पार्क के गेट से ही वसूली शुरू हो जाती है। यदि वाहन से गए हैं, तो पार्किंग शुल्क देना होगा। इसके बाद 10 रुपये के प्रवेश टिकट पर एंट्री मिलेगी। अब साथ में बच्चें हैं, तो वे खेलने की जिद भी करेंगे, लेकिन जो झूले निशुल्क लगाए थे, वे टूटे पड़े हैं। ऐसे में हर झूले और सुविधा का शुल्क चुकाना परिजन के लिए मजबूरी हो जाता है।
खाली पोल खोल पोल
झूलों के नाम पर खड़े पोल बदहाली की कहानी बयां कर रहे हैं। दो जगह पार्क में सिर्फ पोल खड़े हैं, उनमें झूले नहीं लगे हैं। एडवेंचर के लिए भी कुछ जगह पर निशुल्क व्यवस्था है, लेकिन वे टूटे पड़े हैं। शीशो जंग खाने के साथ टूटे हुए हैं। वहीं, ओपन जिम के दस रुपये लिए जाते हैं, लेकिन यहां भी कुछ उपकरण टूटे पड़े हैं। रुपये लेकर जिन झूलों पर झुलाया जाता है, वे जंग खा गए हैं।
बच्चों की सुरक्षा से भी खिलवाड़ का खतरा
टूटे झूले और क्षतिग्रस्त उपकरण केवल बदहाली का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि इनका इस्तेमाल करने की कोशिश करने वाले बच्चों के लिए जोखिम भी पैदा कर सकते हैं। ऐसे में इन साधनों को दुरुस्त कराना और जरूरत पड़ने पर मरम्मत होने तक इस्तेमाल रोकना जरूरी है।
पर्यटकों की पीड़ा : बेहतर से बदहाल हुई व्यवस्था
टूटे हुए शीशो पर अपने बच्चों को झुलाने वाले अकबर रईन ने बताया कि वह इस पार्क में कई बार आ चुके हैं। यह जब शुरू हुआ था, तब व्यवस्थाएं बेहतर थीं। बच्चे झूलों पर झूलकर खूब खुश होते थे, लेकिन अब ये सब टूट गए हैं। वहीं, एक अन्य महिला ने बताया कि बच्चे जिद करते हैं, इसलिए उन्हें पार्क में ले आते हैं, लेकिन यहां झूले आदि सब टूटे पड़े हैं। सीपरी बाजार निवासी विक्रांत ने कहा कि वह अपने बच्चों को पार्क में लेकर आए, लेकिन यहां लगे झूले टूटे हैं। अब मजबूरी में रुपये देकर मिकी माउस, लंदन बस, जंपिंग झूले में झुलाना पड़ा है।

अटल एकता पार्क