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चितेरी कला बुंदेलखंड की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर : मनोज

संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी Updated Mon, 22 Jun 2026 02:34 AM IST
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Chiteri art is the invaluable cultural heritage of Bundelkhand: Manoj
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झांसी। उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान व राजकीय संग्रहालय की ओर से चितेरी कला प्रशिक्षण कार्यशाला का रविवार को शुभारंभ हुआ। इसमें पारंपरिक चितेरी कला के संरक्षण, संवर्धन तथा नई पीढ़ी तक इसके ज्ञान के प्रसार पर बल दिया।


कार्यक्रम का उद्घाटन राजकीय संग्रहालय के निदेशक मनोज कुमार ने किया। उन्होंने कहा कि चितेरी कला बुंदेलखंड की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर है। इस कला को आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप व्यावसायिक स्वरूप प्रदान कर कलाकारों, विशेषकर महिलाओं व युवाओं के लिए स्वरोजगार का सशक्त माध्यम बनाया जा सकता है। कार्यशाला की प्रशिक्षक नीलम सारंगी ने चितेरी कला के इतिहास, इसकी विशिष्ट शैली, पारंपरिक रंगों, लोक प्रतीकों और सांस्कृतिक महत्व के विषय में विस्तार से जानकारी दी।
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उन्होंने बताया कि चितेरी कला में प्रकृति, लोक जीवन और पारंपरिक मान्यताओं का सुंदर समावेश देखने को मिलता है। कार्यशाला के प्रथम दिवस पर उन्होंने सूर्य के चित्रांकन से प्रशिक्षण की शुरुआत कराई तथा प्रतिभागियों को चितेरी शैली में सूर्य के विभिन्न स्वरूपों का अभ्यास कराया।
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इस अवसर पर जगदीश लाल जी, कामिनी बघेल, संगीता नगरिया, नीरज, रूबा खान, सुदर्शन शिवहरे तथा डॉ. मनमोहन मनु विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने चितेरी कला के संरक्षण, संवर्धन एवं इसके व्यावसायिक विकास की सराहना करते हुए प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं। यह प्रशिक्षण कार्यशाला 21 से 30 जून तक प्रतिदिन सुबह 11:00 बजे से राजकीय संग्रहालय के प्रदर्शनी हॉल में चल रही है।
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