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Jhansi: पढ़ने के लिए कुर्सी-मेज न सोने के लिए बेड, आयुर्वेद कॉलेज के छात्रावास में जमीन पर लेट रहीं छात्राएं
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Tue, 17 Feb 2026 10:28 AM IST
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सार
बीएएमएस की छात्राओं ने बताया कि वह हॉस्टल की सरकारी फीस जमा कर चुकी हैं मगर कोई भी सुविधा नहीं है।
बुंदेलखण्ड आयुर्वेदिक कॉलेज, झांसी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजकीय आयुर्वेद कॉलेज एवं चिकित्सालय के महिला छात्रावास में न तो बेड है और न मेज-कुर्सी। बीएएमएस की छात्राएं जमीन पर बैठकर पढ़ने और सोने के लिए मजबूर हैं।
कॉलेज का पुराना छात्रावास जर्जर हो गया था। छात्राओं के लिए 60 बेड का नया छात्रावास बनाया गया, जो दो वर्ष से संचालित है। बीएएमएस की छात्राओं ने बताया कि वह हॉस्टल की सरकारी फीस जमा कर चुकी हैं मगर कोई भी सुविधा नहीं है। छात्रावास के अंदर सिर्फ कमरा बना है। अंदर न सोने के लिए बेड है और न पढ़ने के लिए मेज-कुर्सी। वहीं, कुछ छात्राओं ने फोल्डिंग बेड खरीद लिया है। बाकी गद्दे पर ही बैठकर पढ़ने के लिए मजबूर हैं। इसकी वजह से उन्हें काफी दिक्कत हो रही है। छात्राओं ने बताया कि कई बार प्राचार्य से बेड और मेज-कुर्सी की व्यवस्था कराने के लिए कहा गया मगर सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है।
प्राचार्य डॉ. रामकृष्ण राठौर ने बताया कि छात्र तो पुराने फर्नीचर का प्रयोग कर रहे हैं। छात्राओं के कमरे में बेड, मेज-कुर्सी की व्यवस्था नहीं है। कुछ छात्राओं ने बाजार से फोल्डिंग बेड खरीद लिया है। इस समस्या का निदान करने के लिए उच्चाधिकारियों को दो बार पत्र लिखा जा चुका है। जब तक बजट नहीं मिलेगा तब तक बेड, मेज-कुर्सी की व्यवस्था करना मुश्किल होगा।
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कॉलेज का पुराना छात्रावास जर्जर हो गया था। छात्राओं के लिए 60 बेड का नया छात्रावास बनाया गया, जो दो वर्ष से संचालित है। बीएएमएस की छात्राओं ने बताया कि वह हॉस्टल की सरकारी फीस जमा कर चुकी हैं मगर कोई भी सुविधा नहीं है। छात्रावास के अंदर सिर्फ कमरा बना है। अंदर न सोने के लिए बेड है और न पढ़ने के लिए मेज-कुर्सी। वहीं, कुछ छात्राओं ने फोल्डिंग बेड खरीद लिया है। बाकी गद्दे पर ही बैठकर पढ़ने के लिए मजबूर हैं। इसकी वजह से उन्हें काफी दिक्कत हो रही है। छात्राओं ने बताया कि कई बार प्राचार्य से बेड और मेज-कुर्सी की व्यवस्था कराने के लिए कहा गया मगर सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है।
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प्राचार्य डॉ. रामकृष्ण राठौर ने बताया कि छात्र तो पुराने फर्नीचर का प्रयोग कर रहे हैं। छात्राओं के कमरे में बेड, मेज-कुर्सी की व्यवस्था नहीं है। कुछ छात्राओं ने बाजार से फोल्डिंग बेड खरीद लिया है। इस समस्या का निदान करने के लिए उच्चाधिकारियों को दो बार पत्र लिखा जा चुका है। जब तक बजट नहीं मिलेगा तब तक बेड, मेज-कुर्सी की व्यवस्था करना मुश्किल होगा।