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Jhansi News: कोल्हापुर, बीड और लातूर में कराया काम, घर जाने के लिए बोलते तो करते थे मारपीट
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बरुआसागर के वनगुवां गांव के लोगों को महाराष्ट्र ले जाने के बाद ठेकेदार ने एक नहीं बल्कि तीन जिलों में काम करवाया। झांसी लौटे श्रमिकों ने आरोप लगाया कि घर जाने के लिए बोलने पर ठेकेदार के लोग मारपीट करते थे। उनकी मजदूरी का पैसा तक नहीं दिया। अब वह खाली हाथ लौट आए हैं।
श्याम कुंवर ने बताया कि वह पति गोटीराम के साथ महाराष्ट्र गई थी। वहां ठेकेदार ने खेत में गन्ना काटने का काम दिया। ठेकेदार ने कहा था कि प्रतिदिन 500 रुपये के हिसाब से मजदूरी दी जाएगी। सुबह छह बजे से रात 11-12 बजे तक काम करवाया जाता था। साथ में गांव के ही कई लोग और भी वहां काम करते थे। जब मजदूरी का पैसा मांगो तो ठेकेदार के लोग श्रमिकों के साथ मारपीट करने लगते थे। तीन दिन उन्हें ठीक से खाना भी नहीं दिया गया तो एक दिन रात में वह, उनके पति, गांव के भूरा, भावना, बल्लू, रामदेवी और राजवीर खेत से भागकर मुख्य मार्ग तक आ गए। फिर किसी तरह गांव लौटे। उन्होंने बताया कि 40 हजार से ज्यादा मजदूरी का पैसा बकाया है, जिसे ठेकेदार ने नहीं दिया है।
वहीं, गांव की रामरती ने बताया कि वह अपने भाई जितेंद्र, धनराज, भाभी सरस्वती आदि परिजनों के साथ महाराष्ट्र में काम करने के लिए गई थी। वहां ठेकेदार दिन-रात काम करवाता था और खाना भी नहीं देता था। रात एक बजे तक काम करवाया जाता था। जितेंद्र ने बताया कि पैसे मांगने पर ठेकेदार के लोगों ने एक श्रमिक को उठाकर जमीन पर पटक भी दिया था, जिससे वह लहूलुहान हो गया था। पहले ठेकेदार कोल्हापुर, फिर बीड और अंत में लातूर जिला ले गया। जहां उनसे काम कराया गया। प्रत्येक व्यक्ति की 40 से 45 हजार रुपये मजदूरी बाकी है।
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झांसी। बरुआसागर के वनगुवां गांव के लोगों को महाराष्ट्र ले जाने के बाद ठेकेदार ने एक नहीं बल्कि तीन जिलों में काम करवाया। झांसी लौटे श्रमिकों ने आरोप लगाया कि घर जाने के लिए बोलने पर ठेकेदार के लोग मारपीट करते थे। उनकी मजदूरी का पैसा तक नहीं दिया। अब वह खाली हाथ लौट आए हैं।
श्याम कुंवर ने बताया कि वह पति गोटीराम के साथ महाराष्ट्र गई थी। वहां ठेकेदार ने खेत में गन्ना काटने का काम दिया। ठेकेदार ने कहा था कि प्रतिदिन 500 रुपये के हिसाब से मजदूरी दी जाएगी। सुबह छह बजे से रात 11-12 बजे तक काम करवाया जाता था। साथ में गांव के ही कई लोग और भी वहां काम करते थे। जब मजदूरी का पैसा मांगो तो ठेकेदार के लोग श्रमिकों के साथ मारपीट करने लगते थे। तीन दिन उन्हें ठीक से खाना भी नहीं दिया गया तो एक दिन रात में वह, उनके पति, गांव के भूरा, भावना, बल्लू, रामदेवी और राजवीर खेत से भागकर मुख्य मार्ग तक आ गए। फिर किसी तरह गांव लौटे। उन्होंने बताया कि 40 हजार से ज्यादा मजदूरी का पैसा बकाया है, जिसे ठेकेदार ने नहीं दिया है।
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वहीं, गांव की रामरती ने बताया कि वह अपने भाई जितेंद्र, धनराज, भाभी सरस्वती आदि परिजनों के साथ महाराष्ट्र में काम करने के लिए गई थी। वहां ठेकेदार दिन-रात काम करवाता था और खाना भी नहीं देता था। रात एक बजे तक काम करवाया जाता था। जितेंद्र ने बताया कि पैसे मांगने पर ठेकेदार के लोगों ने एक श्रमिक को उठाकर जमीन पर पटक भी दिया था, जिससे वह लहूलुहान हो गया था। पहले ठेकेदार कोल्हापुर, फिर बीड और अंत में लातूर जिला ले गया। जहां उनसे काम कराया गया। प्रत्येक व्यक्ति की 40 से 45 हजार रुपये मजदूरी बाकी है।
