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Jhansi News: चिकित्सा अधीक्षक के इकलौते बेटे की ट्रेन की चपेट में आने से मौत

Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 16 Mar 2026 02:15 AM IST
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Medical Superintendent's Only Son Dies After Being Hit by a Train
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अमर उजाला ब्यूरो
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झांसी। बबीना सीएचसी के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुमित मिसुरिया के इकलौते पुत्र संचय (19) की संदिग्ध परिस्थितियों में ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। रविवार सुबह सीपरी बाजार थाना क्षेत्र में भानी देवी गोयल स्कूल के सामने झांसी-कानपुर रेलवे ट्रैक पर उसका क्षत-विक्षत शव मिला। संचय हरियाणा के सोनीपत स्थित जिंदल कॉलेज से एलएलबी (प्रथम वर्ष) की पढ़ाई कर रहा था। परिजनों का कहना है कि उसने झांसी आने की जानकारी नहीं दी थी। शव के पास मिले आधार कार्ड से उसकी पहचान हुई। परिजनों ने हत्या की आशंका जताते हुए जांच की मांग की है। पुलिस कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) खंगालकर मामले की पड़ताल कर रही है।
डॉ. सुमित मिसुरिया परिवार के साथ सिद्धेश्वर मंदिर के पास पीतांबरा कॉलोनी में रहते हैं। उनका बेटा संचय सोनीपत के जिंदल कॉलेज के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रहा था। परिजनों के अनुसार शनिवार शाम उसने मामा के घर दिल्ली जाने की बात कही थी, लेकिन कुछ देर बाद फोन कर बताया कि वह अब दिल्ली नहीं जाएगा। इसके बाद परिवार को लगा कि वह हॉस्टल में ही है।
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रविवार सुबह करीब आठ बजे घर से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर भानी देवी गोयल स्कूल के सामने रेलवे ट्रैक पर उसका शव पड़ा मिला। उसके सिर, हाथ और पैरों में गंभीर चोटें थीं। आधार कार्ड के आधार पर पुलिस उसके घर पहुंची। उस समय परिजनों को लगा कि संचय सोनीपत में है। घबराकर उन्होंने संचय के मोबाइल पर फोन लगाया तो कॉल पुलिसकर्मी ने उठाई और हादसे की सूचना दी।
यह सुनते ही पिता डॉ. सुमित, मां और अन्य परिजन बदहवास हालत में मेडिकल कॉलेज पहुंच गए। वहां परिवार में कोहराम मच गया। सूचना मिलने पर सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय समेत कई डॉक्टर और परिचित भी मेडिकल कॉलेज पहुंच गए। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया।

संचय के झांसी पहुंचने की उलझी गुत्थी
सीडीआर खंगाल रही पुलिस, हॉस्टल से बनवाया था गेट पास
संचय की मौत ट्रेन की चपेट में आने से हुई, लेकिन वह झांसी कैसे पहुंचा, यह अब भी रहस्य बना हुआ है। पुलिस का कहना है कि उसके शरीर पर जिस तरह के चोट के निशान हैं, वे ट्रेन से गिरने के सामान्य निशान जैसे नहीं लगते।
पुलिस के मुताबिक जिस हॉस्टल में संचय रहता था, वहां बिना अभिभावक की अनुमति के छात्र को बाहर जाने की इजाजत नहीं होती। रविवार को उसने मामा के घर जाने की बात कहकर मां से बात कराई थी, जिसके बाद हॉस्टल से गेट पास बन गया था। हालांकि कुछ देर बाद उसने खुद ही मामा के घर जाने से मना कर दिया।
शाम चार बजे से रात 12 बजे के बीच ऐसा क्या हुआ कि संचय को झांसी के लिए निकलना पड़ा, यह सवाल अब भी बना हुआ है। उसका शव झांसी-कानपुर रेलवे ट्रैक पर मिला, जबकि यह मार्ग झांसी-दिल्ली के विपरीत दिशा में पड़ता है। पुलिस ने उसका मोबाइल फोन बरामद कर लिया है और कॉल रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। पुलिस को उम्मीद है कि इससे मामले की गुत्थी सुलझ सकेगी।
ट्रेन की चपेट में आने से संचय की मौत हुई है। वह किन परिस्थितियों में ट्रेन की चपेट में आया, इसकी जांच की जा रही है। मोबाइल के कॉल रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं। इसके बाद ही मौत की परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।
- लक्ष्मीकांत गौतम, सीओ सिटी

होली खेलकर चार दिन पहले लौटा था संचय, अब यादें कर रहीं बेचैन
संचय परिवार का इकलौता बेटा था। पिछले सप्ताह होली मनाने वह झांसी आया था। तब घर के आंगन में उसकी हंसी गूंज रही थी, लेकिन रविवार शाम पोस्टमार्टम के बाद जब उसका शव घर पहुंचा तो पूरे घर में मातम छा गया।
बेटे के शव को देखते ही मां अर्चना उससे लिपटकर रोते-रोते बेहोश हो गईं। बहन शौर्या का भी रो-रोकर बुरा हाल था। शौर्या इन दिनों परीक्षा दे रही है और पढ़ाई में संचय ही उसकी मदद करता था। अब उसकी यादें ही परिवार को बेचैन कर रही हैं।
संचय के दादा डॉ. प्रमोद मिसुरिया भी चिकित्सक हैं और बड़ागांव में क्लीनिक चलाते हैं। परिवार में इस घटना से गहरा सदमा है।

कुछ ही देर पहले उसी रास्ते से गुजरे थे दादा
संचय के दादा डॉ. प्रमोद मिसुरिया की क्लीनिक बड़ागांव में है और वह रोज इसी रास्ते से होकर क्लीनिक जाते हैं। रविवार सुबह भी वह उसी मार्ग से गुजर रहे थे, जहां उनके पोते का शव पड़ा था। वहां भीड़ देखकर उन्होंने ड्राइवर से पूछा, लेकिन आगे बढ़ गए। क्लीनिक पहुंचने के बाद उन्हें इस दर्दनाक घटना की जानकारी मिली।

पिता-दादा से अलग चुनी थी राह
परिजनों के अनुसार संचय पढ़ाई में होनहार था। पिता और दादा दोनों डॉक्टर हैं, लेकिन उसने पैतृक पेशे से अलग अपनी राह चुनते हुए वकालत की पढ़ाई शुरू की थी। परिवार और परिचितों का कहना है कि वह मिलनसार स्वभाव का था और आसानी से सभी के साथ घुलमिल जाता था।
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