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पंचतंत्र पार्क : परिवारों को प्रवेश नहीं, प्रेमी जोड़ों से घंटों के हिसाब से वसूली
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पार्क बाली खबर में, रेलगाड़ी की स्थिति खराब
पंजाब सिंह
झांसी। बच्चों के खेलने और परिवारों के साथ सुकून के पल बिताने के लिए बनाए गए पार्क अब बदहाली के शिकार हैं। हालात उन पार्कों में भी खराब हैं, जहां प्रवेश और अन्य सुविधाओं के नाम पर शुल्क वसूला जाता है। ‘पार्क पर बदहाली का पहरा’ अभियान की पहली कड़ी में आज पेश है शहर के प्रमुख पर्यटन स्थल पंचतंत्र पार्क की पड़ताल, जहां परिवारों को प्रवेश नहीं मिलने और प्रेमी जोड़ों से अतिरिक्त वसूली के आरोप सामने आए हैं।
पंचतंत्र पार्क कभी बच्चों की खिलखिलाहट और परिवारों की चहल-पहल से गुलजार रहता था। पार्क में लगी रेलगाड़ी की सवारी, मंकी माउस पर उछल-कूद, तरणताल में तैराकी और फव्वारे की खूबसूरती लोगों को आकर्षित करती थी। अब यहां की तस्वीर बदल चुकी है। बच्चों के झूले बदहाल हैं, तरणताल की स्थिति खराब है और रेलगाड़ी समेत मनोरंजन के दूसरे साधन दुर्दशा के शिकार हैं। जगह-जगह कचरे के ढेर सफाई व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं।
संवाददाता की पड़ताल में परिवार के साथ पहुंचे लोगों ने प्रवेश नहीं दिए जाने की शिकायत की। वहीं, पार्क में बैठे कुछ जोड़ों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि प्रवेश के लिए निर्धारित दस रुपये प्रति व्यक्ति टिकट लेने के बाद भी साथ बैठने के लिए उनसे घंटों के हिसाब से अतिरिक्त रुपये वसूले जाते हैं। ऐसे में पार्क आम लोगों के मनोरंजन का केंद्र बनने के बजाय अव्यवस्थाओं को लेकर सवालों के घेरे में है।
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जिम्मेदार अधिकारियों के दफ्तर पास, फिर भी बदहाल
हैरानी की बात यह है कि पंचतंत्र पार्क मंडलायुक्त कार्यालय के बिल्कुल नजदीक है। जेडीए कार्यालय, जिलाधिकारी आवास और सर्किट हाउस भी इसके आसपास हैं। इसके बावजूद पार्क की बदहाली दूर नहीं हो सकी है। पार्क के रखरखाव के लिए झांसी विकास प्राधिकरण (जेडीए) टेंडर जारी करता है और इससे मिलने वाले राजस्व का एक हिस्सा प्राधिकरण के कोष में जमा होता है। ऐसे में सवाल है कि शुल्क वसूली के बावजूद पार्क की सुविधाएं बदहाल क्यों हैं और निगरानी की व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
पार्क में प्रवेश के लिए टिकट लिया जा रहा है, लेकिन इसके बदले मिलने वाली सुविधाएं संतोषजनक नहीं हैं। बच्चों के खेलने के लिए लगाए गए झूले टूटे पड़े हैं। कभी पार्क की सुंदरता बढ़ाने वाला फव्वारा और मनोरंजन के दूसरे साधन भी बदहाली की तस्वीर पेश कर रहे हैं। तरणताल अपनी पुरानी पहचान खो चुका है। जगह-जगह कचरा फैला है। पड़ताल के दौरान अग्निशमन का सिलेंडर भी पुराना मिला। निरीक्षण के समय पार्क में मुख्य रूप से प्रेमी जोड़े ही बैठे नजर आए।
परिवार के साथ पहुंचे, नहीं मिला प्रवेश
सुमित कुमार ने बताया कि वह गांव से परिवार के साथ घूमने आए थे। गूगल पर पंचतंत्र पार्क को अच्छा पर्यटन स्थल देखकर उन्होंने यहां आने की योजना बनाई, लेकिन परिवार के साथ पहुंचने पर उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया। उनका सवाल है कि जब पार्क आम लोगों के मनोरंजन के लिए है तो परिवारों को प्रवेश से क्यों रोका जा रहा है?
सौरभ यादव ने बताया कि पार्क में दिनभर प्रेमी जोड़े बैठे दिखाई देते हैं, जबकि परिवार के साथ आने वालों को प्रवेश नहीं दिया जाता। उनके मुताबिक, पार्क की मौजूदा व्यवस्था इसे मनोरंजन स्थल के बजाय अव्यवस्थाओं का अड्डा बना रही है। संवाद
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कोट
प्राधिकरण पार्क के संचालन के लिए टेंडर जारी करता है और इससे होने वाली कमाई का लाभांश जेडीए के कोष में जमा होता है। परिवारों को पार्क में प्रवेश से नहीं रोका जाना चाहिए। यदि ऐसा हो रहा है तो जांच कराकर टेंडर निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। पार्क की अव्यवस्थाओं को भी प्राथमिकता के आधार पर दूर कराया जाएगा। - हिमांशु गौतम, उपाध्यक्ष, झांसी विकास प्राधिकरण
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झांसी। बच्चों के खेलने और परिवारों के साथ सुकून के पल बिताने के लिए बनाए गए पार्क अब बदहाली के शिकार हैं। हालात उन पार्कों में भी खराब हैं, जहां प्रवेश और अन्य सुविधाओं के नाम पर शुल्क वसूला जाता है। ‘पार्क पर बदहाली का पहरा’ अभियान की पहली कड़ी में आज पेश है शहर के प्रमुख पर्यटन स्थल पंचतंत्र पार्क की पड़ताल, जहां परिवारों को प्रवेश नहीं मिलने और प्रेमी जोड़ों से अतिरिक्त वसूली के आरोप सामने आए हैं।
पंचतंत्र पार्क कभी बच्चों की खिलखिलाहट और परिवारों की चहल-पहल से गुलजार रहता था। पार्क में लगी रेलगाड़ी की सवारी, मंकी माउस पर उछल-कूद, तरणताल में तैराकी और फव्वारे की खूबसूरती लोगों को आकर्षित करती थी। अब यहां की तस्वीर बदल चुकी है। बच्चों के झूले बदहाल हैं, तरणताल की स्थिति खराब है और रेलगाड़ी समेत मनोरंजन के दूसरे साधन दुर्दशा के शिकार हैं। जगह-जगह कचरे के ढेर सफाई व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं।
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संवाददाता की पड़ताल में परिवार के साथ पहुंचे लोगों ने प्रवेश नहीं दिए जाने की शिकायत की। वहीं, पार्क में बैठे कुछ जोड़ों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि प्रवेश के लिए निर्धारित दस रुपये प्रति व्यक्ति टिकट लेने के बाद भी साथ बैठने के लिए उनसे घंटों के हिसाब से अतिरिक्त रुपये वसूले जाते हैं। ऐसे में पार्क आम लोगों के मनोरंजन का केंद्र बनने के बजाय अव्यवस्थाओं को लेकर सवालों के घेरे में है।
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जिम्मेदार अधिकारियों के दफ्तर पास, फिर भी बदहाल
हैरानी की बात यह है कि पंचतंत्र पार्क मंडलायुक्त कार्यालय के बिल्कुल नजदीक है। जेडीए कार्यालय, जिलाधिकारी आवास और सर्किट हाउस भी इसके आसपास हैं। इसके बावजूद पार्क की बदहाली दूर नहीं हो सकी है। पार्क के रखरखाव के लिए झांसी विकास प्राधिकरण (जेडीए) टेंडर जारी करता है और इससे मिलने वाले राजस्व का एक हिस्सा प्राधिकरण के कोष में जमा होता है। ऐसे में सवाल है कि शुल्क वसूली के बावजूद पार्क की सुविधाएं बदहाल क्यों हैं और निगरानी की व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
पार्क में प्रवेश के लिए टिकट लिया जा रहा है, लेकिन इसके बदले मिलने वाली सुविधाएं संतोषजनक नहीं हैं। बच्चों के खेलने के लिए लगाए गए झूले टूटे पड़े हैं। कभी पार्क की सुंदरता बढ़ाने वाला फव्वारा और मनोरंजन के दूसरे साधन भी बदहाली की तस्वीर पेश कर रहे हैं। तरणताल अपनी पुरानी पहचान खो चुका है। जगह-जगह कचरा फैला है। पड़ताल के दौरान अग्निशमन का सिलेंडर भी पुराना मिला। निरीक्षण के समय पार्क में मुख्य रूप से प्रेमी जोड़े ही बैठे नजर आए।
परिवार के साथ पहुंचे, नहीं मिला प्रवेश
सुमित कुमार ने बताया कि वह गांव से परिवार के साथ घूमने आए थे। गूगल पर पंचतंत्र पार्क को अच्छा पर्यटन स्थल देखकर उन्होंने यहां आने की योजना बनाई, लेकिन परिवार के साथ पहुंचने पर उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया। उनका सवाल है कि जब पार्क आम लोगों के मनोरंजन के लिए है तो परिवारों को प्रवेश से क्यों रोका जा रहा है?
सौरभ यादव ने बताया कि पार्क में दिनभर प्रेमी जोड़े बैठे दिखाई देते हैं, जबकि परिवार के साथ आने वालों को प्रवेश नहीं दिया जाता। उनके मुताबिक, पार्क की मौजूदा व्यवस्था इसे मनोरंजन स्थल के बजाय अव्यवस्थाओं का अड्डा बना रही है। संवाद
कोट
प्राधिकरण पार्क के संचालन के लिए टेंडर जारी करता है और इससे होने वाली कमाई का लाभांश जेडीए के कोष में जमा होता है। परिवारों को पार्क में प्रवेश से नहीं रोका जाना चाहिए। यदि ऐसा हो रहा है तो जांच कराकर टेंडर निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। पार्क की अव्यवस्थाओं को भी प्राथमिकता के आधार पर दूर कराया जाएगा। - हिमांशु गौतम, उपाध्यक्ष, झांसी विकास प्राधिकरण