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Jhansi News: स्थायी लोक अदालत ने मय ब्याज के 25 लाख रुपये अदा करने का दिया आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Updated Sun, 21 Jun 2026 02:29 AM IST
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झांसी। करीब सात साल पहले शहर के इतवारी गंज में झाड़ू के गोदाम में लगी आग से हुए नुकसान का क्लेम न देने पर बीमा कंपनी को स्थायी लोक अदालत ने मय ब्याज के 25 लाख रुपये अदा करने का आदेश दिया। कंपनी को वाद व्यय और मानसिक कष्ट की राशि भी देनी होगी।
वाद के मुताबिक मेसर्स खुशी ब्रोन सेंटर की संचालिका फरीन का झाड़ू का कारोबार है। इतवारी गंज में उनका गोदाम था। इसमें करीब 40 लाख रुपये की झाड़ू रखी हुई थी। माल का यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड में बीमा था। सात जून 2019 को इस गोदाम में आग लग गई थी। इसके चलते माल जलकर राख हो गया था। माल का बीमा होने के बाद भी बीमा कंपनी ने इसका क्लेम नहीं दिया था। इस पर फरीन ने स्थायी लोक अदालत में वाद दायर किया था। मांग की थी कि 30 लाख रुपये क्षतिपूर्ति की राशि दी जाए। साथ ही वाद व्यय और मानसिक कष्ट की राशि अदा की जाए। इस मामले की सुनवाई स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष विजयकृष्ण सिंह और सदस्य डॉ. कपिलनाथ श्रंगि ऋषि ने वाद को आंशिक रूप से स्वीकार किया। यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को आदेश दिया कि खुशी ब्रोन सेंटर की संचालिका फरीन को मय आठ फीसदी ब्याज के 25 लाख रुपये अदा करे। साथ ही वाद के रूप में 10 हजार रुपये और मानसिक कष्ट के रूप में 12 हजार रुपये का भुगतान करे।
वाद के मुताबिक मेसर्स खुशी ब्रोन सेंटर की संचालिका फरीन का झाड़ू का कारोबार है। इतवारी गंज में उनका गोदाम था। इसमें करीब 40 लाख रुपये की झाड़ू रखी हुई थी। माल का यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड में बीमा था। सात जून 2019 को इस गोदाम में आग लग गई थी। इसके चलते माल जलकर राख हो गया था। माल का बीमा होने के बाद भी बीमा कंपनी ने इसका क्लेम नहीं दिया था। इस पर फरीन ने स्थायी लोक अदालत में वाद दायर किया था। मांग की थी कि 30 लाख रुपये क्षतिपूर्ति की राशि दी जाए। साथ ही वाद व्यय और मानसिक कष्ट की राशि अदा की जाए। इस मामले की सुनवाई स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष विजयकृष्ण सिंह और सदस्य डॉ. कपिलनाथ श्रंगि ऋषि ने वाद को आंशिक रूप से स्वीकार किया। यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को आदेश दिया कि खुशी ब्रोन सेंटर की संचालिका फरीन को मय आठ फीसदी ब्याज के 25 लाख रुपये अदा करे। साथ ही वाद के रूप में 10 हजार रुपये और मानसिक कष्ट के रूप में 12 हजार रुपये का भुगतान करे।
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