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Kannauj News: ऐतिहासिक इत्रनगरी को वैश्विक स्तर पर मिलेगी पहचान
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कन्नौज। इत्रनगरी की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए इत्रोत्सव आयोजित किया जा रहा है। बोर्डिंग मैदान में चल रहे कार्यक्रम के दूसरे दिन रविवार को भजन संध्या, रामायण नाटिका और गंगा अवतरण जैसी प्रस्तुतियों ने समा बांधा।
कलाकारों ने एकल नृत्य, गायन, कथक, अवधी और लोकनृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों, प्रदर्शनियों और जनजागरूकता गतिविधियों से इत्रनगरी की समृद्ध परंपरा का परिचय कराया गया। इत्रोत्सव का उद्देश्य कन्नौज की पारंपरिक इत्र कला, संस्कृति, लोकजीवन और हस्तशिल्प को नई पहचान देना है। एकल नृत्य, कथक नृत्य और लोकगीत जैसी रंगारंग प्रस्तुतियां हुईं। दर्शकों ने इन प्रस्तुतियों को खूब सराहा।
डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री और एसपी विनोद कुमार सहित अधिकारियों ने विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने आयोजकों और प्रतिभागियों के प्रयासों की सराहना की। अधिकारियों ने कहा कि ऐसे आयोजन इत्र उद्योग और पर्यटन को बढ़ावा देंगे। जिला अध्यक्ष वीर सिंह भदौरिया ने इसे गौरवशाली परंपरा को नई पहचान दिलाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया। यह उत्सव कन्नौज की विरासत और कारीगरों के श्रम का प्रतीक है।
पर्यटन और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
इत्रोत्सव कन्नौज की प्राचीन इत्र निर्माण कला को नई पहचान देने का प्रयास कर रहा है। यह आयोजन सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे स्थानीय कारीगरों, कलाकारों और उद्यमियों को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही, यह आयोजन पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करेगा।
उत्पादों का प्रदर्शन और जागरूकता
इत्रोत्सव में बड़ी संख्या में आगंतुकों और पर्यटकों ने विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। इनमें जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रदर्शनी, पारंपरिक इत्र स्टॉल और स्थानीय व्यंजनों के खाद्य स्टॉल शामिल थे। स्थानीय कारीगरों और इत्र निर्माताओं को अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने का अवसर मिला। वृद्ध, युवा और बच्चों ने भी सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया। डॉक्टर विशाल गुप्ता ने वृद्धजनों को संचारी रोग और आयुष्मान जैसी सुविधाओं की जानकारी दी।
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कलाकारों ने एकल नृत्य, गायन, कथक, अवधी और लोकनृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों, प्रदर्शनियों और जनजागरूकता गतिविधियों से इत्रनगरी की समृद्ध परंपरा का परिचय कराया गया। इत्रोत्सव का उद्देश्य कन्नौज की पारंपरिक इत्र कला, संस्कृति, लोकजीवन और हस्तशिल्प को नई पहचान देना है। एकल नृत्य, कथक नृत्य और लोकगीत जैसी रंगारंग प्रस्तुतियां हुईं। दर्शकों ने इन प्रस्तुतियों को खूब सराहा।
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डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री और एसपी विनोद कुमार सहित अधिकारियों ने विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने आयोजकों और प्रतिभागियों के प्रयासों की सराहना की। अधिकारियों ने कहा कि ऐसे आयोजन इत्र उद्योग और पर्यटन को बढ़ावा देंगे। जिला अध्यक्ष वीर सिंह भदौरिया ने इसे गौरवशाली परंपरा को नई पहचान दिलाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया। यह उत्सव कन्नौज की विरासत और कारीगरों के श्रम का प्रतीक है।
पर्यटन और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
इत्रोत्सव कन्नौज की प्राचीन इत्र निर्माण कला को नई पहचान देने का प्रयास कर रहा है। यह आयोजन सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे स्थानीय कारीगरों, कलाकारों और उद्यमियों को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही, यह आयोजन पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करेगा।
उत्पादों का प्रदर्शन और जागरूकता
इत्रोत्सव में बड़ी संख्या में आगंतुकों और पर्यटकों ने विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। इनमें जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रदर्शनी, पारंपरिक इत्र स्टॉल और स्थानीय व्यंजनों के खाद्य स्टॉल शामिल थे। स्थानीय कारीगरों और इत्र निर्माताओं को अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने का अवसर मिला। वृद्ध, युवा और बच्चों ने भी सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया। डॉक्टर विशाल गुप्ता ने वृद्धजनों को संचारी रोग और आयुष्मान जैसी सुविधाओं की जानकारी दी।