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एक बंदूक के भरोसे जंगल की सुरक्षा
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कदौरा। वन विभाग के 3533 हेक्टेयर जंगल की सुरक्षा एक बंदूक और छह कारतूस के सहारे है। इसकी सुरक्षा का पूरा दारोमदार एक वनरक्षक दो फॉरेस्ट ऑफिसर के जिम्मे है। खास बात यह है की बंदूक भी सालों पुरानी है। कई साल से कारतूस भी नहीं मिले हैं। वन माफिया से मुठभेड़ होने पर यह बंदूक से गोली चलेगी इसकी कोई गारंटी नहीं है।
कदौरा के बवीना रेंज में वनरक्षक के कुल छह पद स्वीकृत हैं। इनमें मात्र एक वन रक्षक पुनीत कुमार नियुक्त है, जबकि दो फॉरेस्ट ऑफिसर नरेश कुशवाहा, लखनलाल भी हैं। वन विभाग के मुताबिक रेंज में वन रक्षक दिन-रात गश्त करते हैं। इसकी सुरक्षा के लिए उन्हें एक राइफल और छह कारतूस मिले हैं। वन क्षेत्राधिकारी विकास राय कहते हैं कि कर्मियों की कमी है लेकिन वह व्यवस्था बनाए हुए हैं। लगातार वह स्वयं निरीक्षण करते हैं।
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गश्त के दौरान रखते हैं बंदूक
बंदूक और कारतूस रेंजर के नाम आवंटित होते हैं। गश्त के दौरान वन दारोगा और वन रक्षक बंदूक अपने साथ रखते है। ताकि अवैध खनन, कटान व शिकार आदि होने पर वन माफिया से मुकाबला किया जा सके। फिलहाल यहां लंबे अरसे से कर्मियों की कमी के चलते बंदूक चलाने की जरूरत नहीं पड़ी।
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गश्त के दौरान रखते हैं बंदूक
बंदूक और कारतूस रेंजर के नाम आवंटित होते हैं। गश्त के दौरान वन दारोगा और वन रक्षक बंदूक अपने साथ रखते है। ताकि अवैध खनन, कटान व शिकार आदि होने पर वन माफिया से मुकाबला किया जा सके। फिलहाल यहां लंबे अरसे से कर्मियों की कमी के चलते बंदूक चलाने की जरूरत नहीं पड़ी।