Kanpur: अमेरिका के 100% टैरिफ विधेयक का असर, 100 करोड़ के निर्यात ऑर्डर होल्ड, चमड़ा-टेक्सटाइल उद्योग में हलचल
Kanpur News: अमेरिकी सीनेट द्वारा भारत पर 100 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने वाला विधेयक पारित किए जाने के बाद कानपुर के निर्यात जगत में हड़कंप मच गया है। अमेरिकी खरीदारों ने लगभग 100 करोड़ रुपये के निर्यात ऑर्डर होल्ड कर दिए हैं, जिससे शहर के चमड़ा और टेक्सटाइल उद्योगों के लिए अमेरिका का बड़ा बाजार प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
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अमेरिकी सीनेट ने रूस के साथ तेल खरीद जारी रखने के चलते भारत पर 100 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने वाले विधेयक को पारित कर दिया है। हालांकि राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद ही यह अंतिम रूप से लागू होगा लेकिन इसका असर दिखने लगा है। अमेरिकी खरीदारों ने करीब 100 करोड़ रुपये के छोटे-बड़े निर्यात ऑर्डर होल्ड कर दिए हैं। शहर के निर्यातकों का कहना है कि नए टैरिफ से अमेरिका को कानपुर से निर्यात पूरी तरह खत्म हो सकता है।
अभी 22.50 प्रतिशत टैरिफ लग रहा है। इससे उत्पादों की लागत बढ़ गई है। अमेरिकी खरीदार पहले ही बड़े ऑर्डर नहीं दे रहे थे। अब छोटे-छोटे निर्यात ऑर्डर भी रोक दिए गए हैं। अमेरिका को कानपुर से बीते तीन-चार वर्षों में निर्यात तेजी से बढ़ा था। पिछले साल शहर से करीब 2300 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ था। इसमें 1200-1300 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी अकेले चमड़ा कारोबार की थी।
अमेरिकी बाजार में कई गुना महंगे हो जाएंगे उत्पाद
टेक्सटाइल और हैंडलूम उत्पादों की हिस्सेदारी करीब 500-600 करोड़ रुपये रही। पहले भी टैरिफ लगने के बाद वहां की कंपनियों और खरीदारों ने ऑर्डर निरस्त कर दिए थे। अब 100 प्रतिशत टैरिफ के विधेयक को मंजूरी से अमेरिका के साथ जल्द मुक्त व्यापार समझौता होने की प्रक्रिया पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। 100 प्रतिशत टैरिफ से कानपुर के उत्पाद अमेरिकी बाजार में कई गुना महंगे हो जाएंगे।
रकम फंसने के डर से निर्यातकों ने भी बातचीत कम कर दी
लेदर और गारमेंट जैसे उत्पाद बिकना बंद हो सकते हैं। अमेरिकी आयातक वियतनाम, बांग्लादेश और मैक्सिको जैसे देशों से खरीद शुरू कर सकते हैं। टैरिफ का भार आधा-आधा करने की भी बात हो रही है लेकिन विदेशी खरीदार इसके लिए राजी नहीं हैं। उनका कहना है कि सप्लायर ही इसका वहन करे। रकम फंसने के डर से निर्यातकों ने भी बातचीत कम कर दी है।
निर्यातकों के सामने अनिश्चितता की स्थिति है। अमेरिका को होने वाले निर्यात में बड़ी बाधा आ सकती है। शहर के कुल निर्यात में अकेले अमेरिका की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत है। हालांकि निर्यातक भी हार नहीं मानेंगे। दूसरे देशों में कारोबार बढ़ाएंगे। -यादवेंद्र सचान, क्षेत्रीय अध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद
100 प्रतिशत टैरिफ लगने से अमेरिका को निर्यात समाप्त हो सकता है। विधेयक का असर भी दिखने लगा है। 100 करोड़ के छोटे-बड़े निर्यात ऑर्डर विदेशी खरीदारों ने होल्ड कर दिए हैं। चमड़ा, कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट्स पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ेगा। -आलोक श्रीवास्तव, उत्तर प्रदेश प्रमुख, फियो
100 प्रतिशत टैरिफ किसी भी उद्योग को खत्म कर देगा। यह टैरिफ नहीं बल्कि एक प्रकार का बड़ा राजनीतिक फैसला होगा। इसका प्रभाव यहां तो दिखेगा अमेरिका पर भी पड़ेगा। अगले दो से तीन महीनों में महंगाई चरम पर होगी। -असद इराकी, पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद
इन देशों के साथ हो चुका समझौता
अमेरिका के टैरिफ प्रभाव को कम करने और निर्यात बढ़ाने की दिशा में सरकार कई देशों से मुक्त व्यापार समझौते कर रही है। भारत ने न्यूजीलैंड और ओमान के साथ समझौता किया है। भारत-यूके, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, भारत और संयुक्त अरब अमीरात तथा भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच समझौता किया जा चुका है।
उच्च प्राथमिकता वाले देशों से बातचीत
भारत-कनाडा, भारत-पेरू, भारत-इस्राइल, भारत-यूरोपीय यूनियन, भारत-यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन, आर्मेनिया, बेलारूस, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान सहित रूस के साथ बातचीत नवंबर 2025 में शुरू हुई है। इसके अलावा भारत-दक्षिण अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ के साथ भी बातचीत की जा रही है।