{"_id":"69e93cab1e1cf79ae104b3c6","slug":"400-villages-in-high-risk-zone-tb-patients-being-traced-kushinagar-news-c-205-1-deo1003-158507-2026-04-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kushinagar News: 400 गांव हाई रिस्क जोन में, खोजे जा रहे टीबी मरीज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kushinagar News: 400 गांव हाई रिस्क जोन में, खोजे जा रहे टीबी मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 23 Apr 2026 02:54 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
पडरौना। टीबी भारत मुक्त अभियान के तहत जिले के 400 गांव हाई रिस्क जोन में हैं। इन गांवों में कैंप लगाकर मरीजों की एक्सरे और बलगम जांच की जा रही है। 100 दिन तक अभियान चलाकर इन गांवों में हर व्यक्ति की जांच की जाएगी।
करीब 300 एचआईवी पाजीटिव मरीजों में भी टीबी के लक्ष्ण मिले हैं, जबकि 60 साल से अधिक या गंभीर रोग की चपेट में आए लोगों को दवा की एडवांस खुराक दी जा रही है, ताकि इम्युनिटी मजबूत रहे और टीबी के संक्रमण से बचाया जा सके।
स्वास्थ्य विभाग टीबी रोगी ढूंढ़ने के लिए अभियान चला रहा है। इसमें आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी और ब्लाक स्तर से स्वास्थ्यकर्मियों से सहयोग लिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आकड़े बताते हैं कि जिले के 400 गांव ऐसे हैं, जहां टीबी के सर्वाधिक मरीज हैं। शासन के निर्देश पर इन गांवों को हाई रिस्क जोन में शामिल कर टीबी रोगियों को ढूंढ़ा जा रहा है। 100 दिन तक चलने वाला अभियान 24 मार्च से शुरू हुआ है, इन गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीम एक्सरे मशीन और दवा लेकर पहुंच रही है। एक्सरे के बाद लक्षण दिखने पर टीम मरीजों को चिह्नित कर दवा दे रही है।
अब तक की जांच में 300 एचआईवी पाजीटिव मरीजों में टीबी के लक्षण मिले हैं। उन्हें दवा की खुराक दी जा रही है। इसके अलावा एचआईवी के बाकी मरीजों की जांच की जा रही है, वहीं गंभीर रोग से पीड़ित यो जिसके परिवार में टीबी के रोगी हैं, उसके परिवार के सभी सदस्यों की जांच की जा रही है। जांच में रिपोर्ट ठीक होने के बाद भी टीबी प्रीवेटिव थिरेपी (टीपीटी) के तहत दवा का एडवांस खुराक दिया जा रहा है।
Trending Videos
करीब 300 एचआईवी पाजीटिव मरीजों में भी टीबी के लक्ष्ण मिले हैं, जबकि 60 साल से अधिक या गंभीर रोग की चपेट में आए लोगों को दवा की एडवांस खुराक दी जा रही है, ताकि इम्युनिटी मजबूत रहे और टीबी के संक्रमण से बचाया जा सके।
विज्ञापन
विज्ञापन
स्वास्थ्य विभाग टीबी रोगी ढूंढ़ने के लिए अभियान चला रहा है। इसमें आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी और ब्लाक स्तर से स्वास्थ्यकर्मियों से सहयोग लिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आकड़े बताते हैं कि जिले के 400 गांव ऐसे हैं, जहां टीबी के सर्वाधिक मरीज हैं। शासन के निर्देश पर इन गांवों को हाई रिस्क जोन में शामिल कर टीबी रोगियों को ढूंढ़ा जा रहा है। 100 दिन तक चलने वाला अभियान 24 मार्च से शुरू हुआ है, इन गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीम एक्सरे मशीन और दवा लेकर पहुंच रही है। एक्सरे के बाद लक्षण दिखने पर टीम मरीजों को चिह्नित कर दवा दे रही है।
अब तक की जांच में 300 एचआईवी पाजीटिव मरीजों में टीबी के लक्षण मिले हैं। उन्हें दवा की खुराक दी जा रही है। इसके अलावा एचआईवी के बाकी मरीजों की जांच की जा रही है, वहीं गंभीर रोग से पीड़ित यो जिसके परिवार में टीबी के रोगी हैं, उसके परिवार के सभी सदस्यों की जांच की जा रही है। जांच में रिपोर्ट ठीक होने के बाद भी टीबी प्रीवेटिव थिरेपी (टीपीटी) के तहत दवा का एडवांस खुराक दिया जा रहा है।

कमेंट
कमेंट X