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Kushinagar News: अधर्म के नाश के लिए भगवान लेते हैं अवतार
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 01 Jun 2026 12:25 AM IST
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दुदही। जब धरती पर अधर्म का बोलबाला होता है, तब भगवान किसी न किसी रूप में अवतार लेकर धर्म की पुर्नस्थापना करते हैं। भगवान चारों दिशाओं के कण-कण में विद्यमान हैं। त्रेतायुग में जब असुरों की शक्ति बढ़ने लगी, तब माता कौशल्या की गर्भ से भगवान श्रीराम का जन्म हुआ। ये बातें कथावचक अतुल कृष्ण भारद्वाज ने कही।
वे कस्बा के सुराजी बाजार स्थित श्रीराम जानकी मंदिर परिसर में आयोजित कथा के तीसरे दिन रविवार को श्रीराम जन्म की कथा सुना रहे थे। उन्होंने कहा कि भगवान सर्वत्र विद्यमान हैं। प्रेमपूर्वक पुकारने तथा सच्चे मन से उनका स्मरण करने पर वे कहीं भी प्रकट हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि निर्गुण एवं सगुण, दोनों रूपों में भगवान सदैव भक्तों के प्रेम के वशीभूत रहते हैं। धर्म व्यक्ति के भीतर एकता और सद्भाव का भाव उत्पन्न करता है, जबकि संप्रदाय व्यक्ति को बाहरी रूप से एक सूत्र में बांधता है।
इस दौरान मुख्य यजमान गिरिजेश जायसवाल, बालमुकुंद पांडेय, नन्हे जायसवाल, रामकुमार जायसवाल, विंध्याचल मित्तल, हरकेश रौनियार, विश्वबंधु जायसवाल, पारस नाथ जायसवाल आदि मौजूद रहे।
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वे कस्बा के सुराजी बाजार स्थित श्रीराम जानकी मंदिर परिसर में आयोजित कथा के तीसरे दिन रविवार को श्रीराम जन्म की कथा सुना रहे थे। उन्होंने कहा कि भगवान सर्वत्र विद्यमान हैं। प्रेमपूर्वक पुकारने तथा सच्चे मन से उनका स्मरण करने पर वे कहीं भी प्रकट हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि निर्गुण एवं सगुण, दोनों रूपों में भगवान सदैव भक्तों के प्रेम के वशीभूत रहते हैं। धर्म व्यक्ति के भीतर एकता और सद्भाव का भाव उत्पन्न करता है, जबकि संप्रदाय व्यक्ति को बाहरी रूप से एक सूत्र में बांधता है।
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इस दौरान मुख्य यजमान गिरिजेश जायसवाल, बालमुकुंद पांडेय, नन्हे जायसवाल, रामकुमार जायसवाल, विंध्याचल मित्तल, हरकेश रौनियार, विश्वबंधु जायसवाल, पारस नाथ जायसवाल आदि मौजूद रहे।