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Kushinagar News: कस्तूरबा विद्यालय में बंदरों का आतंक, 18 छात्राएं घायल
Thu, 06 Aug 2026 01:42 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 06 Aug 2026 01:42 AM IST
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सुकरौली। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका में करीब डेढ़ वर्ष से बंदरों का आतंक है। परिसर में झुंड में पहुंच रहे बंदर छात्राओं और शिक्षकों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। अब तक 18 से अधिक अधिक छात्राएं, शिक्षिकाएं और कर्मचारी चोटिल हो चुके हैं। कई बार शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने से परिसर में दहशत का माहौल है।
विद्यालय परिसर में घुसने वाले बंदर डेली पार्टीशन को क्षतिग्रस्त कर देते हैं, सीसीटीवी कैमरों के तार काट देते हैं तथा दीवारों को गंदा कर देते हैं। कई बार छात्राओं के हाथ से भोजन और अन्य सामान भी छीन लेते हैं। इससे छात्राओं की सुरक्षा के साथ विद्यालय की व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। विद्यालय प्रशासन ने नगर पंचायत सहित संबंधित प्रशासनिक विभागों को कई बार पत्र भेजकर बंदरों को पकड़वाने की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।
छात्राएं भय के माहौल में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। विद्यालय प्रशासन का कहना है कि यदि समय रहते बंदरों के आतंक से निजात नहीं दिलाई गई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। वार्डन शालिनी सिंह ने बताया कि बंदरों की समस्या को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजा गया है और लगातार सूचना भी दी गई है। इसके बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि आए दिन छात्राएं और शिक्षक बंदरों के हमले में चोटिल हो रहे हैं। छात्राओं की सुरक्षा के लिए बंदरों के आतंक से तत्काल निजात दिलाना अत्यंत आवश्यक है।
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विद्यालय परिसर में घुसने वाले बंदर डेली पार्टीशन को क्षतिग्रस्त कर देते हैं, सीसीटीवी कैमरों के तार काट देते हैं तथा दीवारों को गंदा कर देते हैं। कई बार छात्राओं के हाथ से भोजन और अन्य सामान भी छीन लेते हैं। इससे छात्राओं की सुरक्षा के साथ विद्यालय की व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। विद्यालय प्रशासन ने नगर पंचायत सहित संबंधित प्रशासनिक विभागों को कई बार पत्र भेजकर बंदरों को पकड़वाने की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।
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छात्राएं भय के माहौल में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। विद्यालय प्रशासन का कहना है कि यदि समय रहते बंदरों के आतंक से निजात नहीं दिलाई गई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। वार्डन शालिनी सिंह ने बताया कि बंदरों की समस्या को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजा गया है और लगातार सूचना भी दी गई है। इसके बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि आए दिन छात्राएं और शिक्षक बंदरों के हमले में चोटिल हो रहे हैं। छात्राओं की सुरक्षा के लिए बंदरों के आतंक से तत्काल निजात दिलाना अत्यंत आवश्यक है।
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