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Kushinagar News: खड्डा चीनी मिल में शुरू होगा टिशू कल्चर
Wed, 05 Aug 2026 02:34 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Wed, 05 Aug 2026 02:34 AM IST
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खड्डा(कुशीनगर)। गन्ना किसानों के लिए खड्डा क्षेत्र जल्द ही एक बड़ी उपलब्धि हासिल करने जा रहा है। आईपीएल चीनी मिल में टिशू कल्चर (ऊतक संवर्द्धन) आधारित गन्ना पौध उत्पादन परियोजना स्थापित करने की तैयारी शुरू हो गई है। मुख्यालय की मंजूरी के बाद इसे धरातल पर उतारने की प्रक्रिया चल रही है। परियोजना शुरू होने के बाद किसानों को रोगमुक्त, शुद्ध और उच्च उत्पादकता वाली गन्ना प्रजातियों के पौधे उपलब्ध हो सकेंगे।
आईपीएल चीनी मिल खड्डा के प्रधान प्रबंधक एनपी सिंह ने बताया कि मिल परिसर में प्रयोगशाला और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके लिए विशेषज्ञ संस्था से संपर्क किया गया है। जल्द ही परियोजना की विस्तृत रूपरेखा तैयार कर कार्य शुरू कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि टिशू कल्चर तकनीक से तैयार पौधों में रोग और वायरस का खतरा बेहद कम होता है। क्षेत्र की मिट्टी और जलवायु के अनुसार उपयुक्त गन्ना प्रजातियों का चयन कर किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा। इससे उत्पादन बढ़ने के साथ चीनी रिकवरी में भी सुधार होगा।
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किसानों को मिलेंगे नए और स्वस्थ गन्ना के पौधे
टिशू कल्चर तकनीक में सबसे पहले गन्ने के स्वस्थ और श्रेष्ठ पौधे के एक छोटे हिस्से को प्रयोगशाला में सुरक्षित वातावरण में विकसित किया जाता है। वहां से हजारों रोगमुक्त पौधे तैयार किए जाते हैं। इसके बाद इन पौधों को नर्सरी में बढ़ाया जाता है और पूरी तरह तैयार होने पर किसानों को बीज के रूप में उपलब्ध कराया जाता है। इस प्रक्रिया से तैयार पौधों में रोग लगने की संभावना कम होती है और उनकी बढ़वार भी बेहतर होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक स्वस्थ मूल पौधे से कम समय में बड़ी संख्या में गुणवत्तापूर्ण पौधे तैयार किए जा सकते हैं। परियोजना शुरू होने के बाद खड्डा क्षेत्र के किसानों को नई एवं उन्नत गन्ना प्रजातियां स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होंगी। उन्हें बाहर से बीज मंगाने की जरूरत कम पड़ेगी और बेहतर उत्पादन के जरिए आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। क्षेत्र के गन्ना विकास और चीनी उद्योग के लिए इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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आईपीएल चीनी मिल खड्डा के प्रधान प्रबंधक एनपी सिंह ने बताया कि मिल परिसर में प्रयोगशाला और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके लिए विशेषज्ञ संस्था से संपर्क किया गया है। जल्द ही परियोजना की विस्तृत रूपरेखा तैयार कर कार्य शुरू कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि टिशू कल्चर तकनीक से तैयार पौधों में रोग और वायरस का खतरा बेहद कम होता है। क्षेत्र की मिट्टी और जलवायु के अनुसार उपयुक्त गन्ना प्रजातियों का चयन कर किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा। इससे उत्पादन बढ़ने के साथ चीनी रिकवरी में भी सुधार होगा।
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किसानों को मिलेंगे नए और स्वस्थ गन्ना के पौधे
टिशू कल्चर तकनीक में सबसे पहले गन्ने के स्वस्थ और श्रेष्ठ पौधे के एक छोटे हिस्से को प्रयोगशाला में सुरक्षित वातावरण में विकसित किया जाता है। वहां से हजारों रोगमुक्त पौधे तैयार किए जाते हैं। इसके बाद इन पौधों को नर्सरी में बढ़ाया जाता है और पूरी तरह तैयार होने पर किसानों को बीज के रूप में उपलब्ध कराया जाता है। इस प्रक्रिया से तैयार पौधों में रोग लगने की संभावना कम होती है और उनकी बढ़वार भी बेहतर होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक स्वस्थ मूल पौधे से कम समय में बड़ी संख्या में गुणवत्तापूर्ण पौधे तैयार किए जा सकते हैं। परियोजना शुरू होने के बाद खड्डा क्षेत्र के किसानों को नई एवं उन्नत गन्ना प्रजातियां स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होंगी। उन्हें बाहर से बीज मंगाने की जरूरत कम पड़ेगी और बेहतर उत्पादन के जरिए आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। क्षेत्र के गन्ना विकास और चीनी उद्योग के लिए इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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