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UP: लखीमपुर खीरी में बारिश से उफनाई शारदा, नदी में समाया मकान, स्कूल पर भी मंडराया खतरा; देखें वीडियो

Sun, 19 Jul 2026 02:47 PM IST
Mukesh Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Published by: Mukesh Kumar Updated Sun, 19 Jul 2026 02:47 PM IST
सार

लखीमपुर खीरी जिले में बारिश का सिलसिला जारी है। बारिश के कारण अब नदियों का जलस्तर भी बढ़ने लगा है। शारदा नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ कटान शुरू हो गया है। निघासन क्षेत्र के ग्रंट नंबर 12 गांव में कटान होने से एक मकान नदी में समा गया। गांव के स्कूल पर भी खतरा मंडराने लगा है। 

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House swallowed by the river due to erosion by the Sharda water level rises in Lakhimpur Kheri
शारदा नदी में समाया मकान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लखीमपुर खीरी जिले में शारदा नदी का जलस्तर बढ़ने से कटान शुरू हो गया है। तहसील निघासन के ग्रंट नंबर 12 गांव में शनिवार को सरजू का पक्का मकान नदी में समा गया। इसके साथ ही बंद पड़े सरकारी स्कूल भवन के सामने की 30 मीटर डामर सड़क भी कट गई। स्कूल पर भी खतरा मंडराने लगा है। नदी के विकराल रूप को देखकर ग्रामीणों में दहशत है। 

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पिछले वर्ष भी नदी ने इस गांव में तबाही मचाई थी। दर्जनों घर, कृषि भूमि और एक विशाल मंदिर नदी में समा गए थे। इस साल मानसून की बारिश शुरू हुई है। इससे बाढ़ और कटान प्रभावित गांवों के लोगों की चिंता फिर बढ़ गई है। गांव का उच्च प्राथमिक विद्यालय भी कटान की जद में है। विद्यालय और शारदा नदी के बीच अब करीब 70 फीट की दूरी बची है। संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन ने बच्चों को स्थानांतरित किया है। उन्हें एक किलोमीटर दूर कतकहिया स्थित सरकारी विद्यालय में भेजा गया है।
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डूब क्षेत्र में विकास और ग्रामीणों के सवाल
ग्रंट नंबर-12 गांव वर्षों से डूब क्षेत्र घोषित है। इसके बावजूद यहां ग्राम पंचायत का गठन हुआ। पंचायत चुनाव हुए और सरकारी योजनाओं का लाभ भी मिला। विद्यालय भी संचालित होता रहा। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि प्रशासन को कटान की जानकारी थी तो स्थायी पुनर्वास क्यों नहीं किया गया। पिछले वर्ष बाढ़ और कटान में 122 मकान नदी में समा गए थे। करीब 150 परिवार बेघर हो गए थे।

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विस्थापितों का दर्द, पुनर्वास की मांग
वर्तमान में लगभग 200 परिवार गांव से दो किलोमीटर दूर तटबंध पर रह रहे हैं। वे तिरपाल, झोंपड़ियों और खुले आसमान के नीचे जीवनयापन कर रहे हैं। उनकी खेती, रोजगार और आजीविका के साधन समाप्त हो चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि तीन वर्षों से वे इसी तरह रहने को मजबूर हैं। लेकिन अब तक स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था नहीं हो सकी है। रामबेटी ने बताया, "हमारा परिवार तीन वर्षों से तटबंध पर रह रहा है। हर बरसात में फिर उजड़ने का डर बना रहता है। अब लोगों का भरोसा टूट चुका है।"

प्रशासन की निगरानी 
एसडीएम निघासन राजीव निगम ने बताया कि प्रशासन की टीम लगातार क्षेत्र की निगरानी कर रही है। ग्रंट नंबर-12 डूब क्षेत्र घोषित गांव है। पिछले वर्ष जिन लोगों के मकानों का कटान हुआ था, उन्हें नियमानुसार मुआवजा दिया गया था। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्हें सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए लगातार प्रेरित किया जा रहा है। 

बिजुआ में गोला तहसीलदार अरुण कुमार ने भी शारदा नदी के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने बझेड़ा, रेवतीपुरवा, रामनगर, आषाढ़ी और पूजागांव में हालात का जायजा लिया। लेखपालों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

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