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Lakhimpur Kheri News: जगदेवपुर केंद्र पर गन्ना किसानों का हंगामा
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 28 Jan 2026 11:03 PM IST
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भीरा। गुलरिया चीनी मिल के गन्ना क्रय केंद्र जगदेवपुर पर मंगलवार सुबह गन्ना तौल को लेकर किसानों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप है कि केंद्र पर अर्ली गन्ना पर्चियों पर रिजेक्ट गन्ने की तौल की जाती है।
केंद्र पर तैनात बाबू और अन्य जिम्मेदार कर्मचारी किसानों से एक से डेढ़ क्विंटल तक गन्ना लेकर तौल कर लेते थे। इसके बाद रिजेक्ट गन्ने को अर्ली पर्चियों पर तौल दिया जाता था। इस कथित अनियमितता को लेकर किसानों में नाराजगी देखी गई। विवाद बढ़ने के कारण सुबह से ही केंद्र पर गन्ना तौल पूरी तरह से ठप रही। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ किसानों का सर्वे सही तरीके से नहीं किया गया, जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सूचना पर गन्ना सहकारी समिति के सचिव जगतपाल, गुलरिया चीनी मिल के केन मैनेजर आशुतोष द्विवेदी तथा गन्ना सहकारी समिति भीरा के अध्यक्ष राकेश सिंह पहुंचे और किसानों से बातचीत कर मामले को शांत कराने का प्रयास किया।
चीनी मिल के केन मैनेजर आशुतोष द्विवेदी ने बताया किसानों द्वारा लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं। केंद्र पर तैनात कोई भी कर्मचारी किसानों से गन्ना नहीं लेता है। किसानों द्वारा दबाव बनाया जा रहा था कि रिजेक्ट गन्ने को अर्ली पर्चियों पर तौला जाए, जिसे नियमों के अनुसार स्वीकार नहीं किया गया।
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केंद्र पर तैनात बाबू और अन्य जिम्मेदार कर्मचारी किसानों से एक से डेढ़ क्विंटल तक गन्ना लेकर तौल कर लेते थे। इसके बाद रिजेक्ट गन्ने को अर्ली पर्चियों पर तौल दिया जाता था। इस कथित अनियमितता को लेकर किसानों में नाराजगी देखी गई। विवाद बढ़ने के कारण सुबह से ही केंद्र पर गन्ना तौल पूरी तरह से ठप रही। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ किसानों का सर्वे सही तरीके से नहीं किया गया, जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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सूचना पर गन्ना सहकारी समिति के सचिव जगतपाल, गुलरिया चीनी मिल के केन मैनेजर आशुतोष द्विवेदी तथा गन्ना सहकारी समिति भीरा के अध्यक्ष राकेश सिंह पहुंचे और किसानों से बातचीत कर मामले को शांत कराने का प्रयास किया।
चीनी मिल के केन मैनेजर आशुतोष द्विवेदी ने बताया किसानों द्वारा लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं। केंद्र पर तैनात कोई भी कर्मचारी किसानों से गन्ना नहीं लेता है। किसानों द्वारा दबाव बनाया जा रहा था कि रिजेक्ट गन्ने को अर्ली पर्चियों पर तौला जाए, जिसे नियमों के अनुसार स्वीकार नहीं किया गया।
