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Lalitpur: दो अधिवक्ताओं एवं पांच न्यायालय कर्मचारियों समेत आठ पर केस दर्ज, न्यायिक अभिलेखों में हेरफेर के आरोप
Mon, 20 Jul 2026 12:46 PM IST
दीपक महाजन
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
Published by: दीपक महाजन
Updated Mon, 20 Jul 2026 12:46 PM IST
सार
कोतवाली सदर पुलिस ने दो अधिवक्ताओं, पांच न्यायालय कर्मचारियों और एक आरोपी समेत आठ लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। मामला कथित रूप से फर्जी रिमांड ऑर्डर और अभिरक्षा वारंट तैयार कर उसे न्यायालय में प्रस्तुत करने से जुड़ा है।
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हाईकोर्ट का आदेश।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
जिला न्यायालय के न्यायिक अभिलेखों से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर कोतवाली सदर पुलिस ने दो अधिवक्ताओं, पांच न्यायालय कर्मचारियों और एक आरोपी समेत आठ लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। मामला कथित रूप से फर्जी रिमांड ऑर्डर और अभिरक्षा वारंट तैयार कर उसे न्यायालय में प्रस्तुत करने से जुड़ा है।
जिला न्यायालय के प्रशासनिक लिपिक जितेंद्र शर्मा की तहरीर पर दर्ज रिपोर्ट के अनुसार, कोतवाली तालबेहट के एक मुकदमे के आरोपी जितेंद्र सिंह निरंजन की ओर से अधिवक्ता अनुपम वर्मा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में हेबियस कॉर्पस याचिका संख्या-553/2026 दाखिल की थी। याचिका के साथ रिमांड मजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर के बिना तैयार कथित रिमांड शीट और अभिरक्षा वारंट की प्रतियां संलग्न की गई थीं। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए जिला जज, ललितपुर को निर्देश दिए थे। जांच में न्यायालय के अभिलेखों में कथित हेरफेर, फर्जी दस्तावेज तैयार करने तथा मूल अभिलेख के बिना प्रमाणित प्रतिलिपि जारी किए जाने के तथ्य सामने आने पर हाईकोर्ट ने संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए।
तहरीर में कहा गया है कि तीन मई 2026 को अवकाशकालीन रिमांड मजिस्ट्रेट ने आरोपी को आठ मई 2026 तक न्यायिक अभिरक्षा में भेजने का आदेश दिया था। आरोप है कि कोर्ट मुहर्रिर पंकज ने मजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर के बिना एक प्रोफार्मा अभिरक्षा वारंट तैयार किया, जिसमें रिमांड अवधि 16 मई 2026 अंकित कर दी गई। आरोप के अनुसार अधिवक्ता अनुपम वर्मा ने उक्त दस्तावेज का मोबाइल से फोटो लिया। इसके बाद उनके जूनियर अधिवक्ता अखिलेश राय ने प्रतिलिपि अनुभाग में आवेदन कर मूल अभिलेख मंगाए बिना और निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना कथित रूप से उसी स्कैन कॉपी के आधार पर प्रमाणित नकल प्राप्त कर ली। आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में न्यायालय के कुछ कर्मचारियों ने भी सहयोग किया और बाद में उसी दस्तावेज को इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रस्तुत किया गया।
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इन पर दर्ज हुआ केस
तहरीर के आधार पर कोतवाली पुलिस ने आरोपी उन्नाव जिले के पोस्ट अशोहा ग्राम भऊमऊ निवासी अधिवक्ता अनुपम वर्मा, जूनियर अधिवक्ता अखिलेश राय, जिला जालौन के थाना सिरसाकलार ग्राम नगरी निवासी जितेंद्र सिंह निरंजन, ललितपुर निवासी प्रधान प्रतिलिपिक मनोज जोशी, सहायक प्रतिलिपिक भूपेंद्र साहू, लिपिक अक्षय, कोर्ट मुहर्रिर पंकज, कोर्ट मुहर्रिर उमेश के विरुद्ध बीएनएस और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामले की जांच में जुटी पुलिस
कोतवाली प्रभारी निरीक्षक अनुराग अवस्थी ने बताया कि तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच की जा रही है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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जिला न्यायालय के प्रशासनिक लिपिक जितेंद्र शर्मा की तहरीर पर दर्ज रिपोर्ट के अनुसार, कोतवाली तालबेहट के एक मुकदमे के आरोपी जितेंद्र सिंह निरंजन की ओर से अधिवक्ता अनुपम वर्मा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में हेबियस कॉर्पस याचिका संख्या-553/2026 दाखिल की थी। याचिका के साथ रिमांड मजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर के बिना तैयार कथित रिमांड शीट और अभिरक्षा वारंट की प्रतियां संलग्न की गई थीं। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए जिला जज, ललितपुर को निर्देश दिए थे। जांच में न्यायालय के अभिलेखों में कथित हेरफेर, फर्जी दस्तावेज तैयार करने तथा मूल अभिलेख के बिना प्रमाणित प्रतिलिपि जारी किए जाने के तथ्य सामने आने पर हाईकोर्ट ने संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए।
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तहरीर में कहा गया है कि तीन मई 2026 को अवकाशकालीन रिमांड मजिस्ट्रेट ने आरोपी को आठ मई 2026 तक न्यायिक अभिरक्षा में भेजने का आदेश दिया था। आरोप है कि कोर्ट मुहर्रिर पंकज ने मजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर के बिना एक प्रोफार्मा अभिरक्षा वारंट तैयार किया, जिसमें रिमांड अवधि 16 मई 2026 अंकित कर दी गई। आरोप के अनुसार अधिवक्ता अनुपम वर्मा ने उक्त दस्तावेज का मोबाइल से फोटो लिया। इसके बाद उनके जूनियर अधिवक्ता अखिलेश राय ने प्रतिलिपि अनुभाग में आवेदन कर मूल अभिलेख मंगाए बिना और निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना कथित रूप से उसी स्कैन कॉपी के आधार पर प्रमाणित नकल प्राप्त कर ली। आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में न्यायालय के कुछ कर्मचारियों ने भी सहयोग किया और बाद में उसी दस्तावेज को इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रस्तुत किया गया।
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इन पर दर्ज हुआ केस
तहरीर के आधार पर कोतवाली पुलिस ने आरोपी उन्नाव जिले के पोस्ट अशोहा ग्राम भऊमऊ निवासी अधिवक्ता अनुपम वर्मा, जूनियर अधिवक्ता अखिलेश राय, जिला जालौन के थाना सिरसाकलार ग्राम नगरी निवासी जितेंद्र सिंह निरंजन, ललितपुर निवासी प्रधान प्रतिलिपिक मनोज जोशी, सहायक प्रतिलिपिक भूपेंद्र साहू, लिपिक अक्षय, कोर्ट मुहर्रिर पंकज, कोर्ट मुहर्रिर उमेश के विरुद्ध बीएनएस और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामले की जांच में जुटी पुलिस
कोतवाली प्रभारी निरीक्षक अनुराग अवस्थी ने बताया कि तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच की जा रही है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।