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Maharajganj News: मानसून के इंतजार की बीच लू बढ़ा ही परेशानी
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तपिश के कारण शाम को हाइवे पर सीमित वाहन, चेहरा ढ़ककर जाती किशोरी।
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मौसम विभाग ने दी अगले तीन दिनों तक लू में इजाफा होने की चेतावनी
10 किमी प्रति घंटा हवा ने कराया तपिश एहसास
महराजगंज। तराई के किसानों की बेसब्री मानसून के बदले रुख ने बढ़ा दी है। जनपद में मानसून का समय 15 जून के बाद माना जाता है। इंतजार तो मानसून का हो रहा था लेकिन जलवायु परिवर्तन व अलनीनो गतिविधियों के कारण लू चलने लगी है। शुक्रवार अधिकतम तापमान 38 डिग्री रिकॉर्ड किया गया।
हालांकि गर्मी और उमस के कारण लोगों को ज्यादा परेशानी हुई। 10 किमी प्रति घंटा चली हवा ने लू का प्रभाव कुछ कम जरूर रखा लेकिन अगले तीन दिनों तक हवा की गति बढ़ने के कारण लू की गतिविधियों में इजाफा होने की चेतावनी मौसम विभाग की तरफ से जारी हुई है।
जानकारी के अनुसार, मानसूनी सीजन में पूर्वी यूपी की मौसमी गतिविधि से किसान सकते में आ गए हैं। जनपद धान की अगेती खेती के लिए जाना जाता है क्योंकि यहां नहरों का जाल है। किसान जून के पहले सप्ताह से ही धान रोपाई की प्रक्रिया शुरू करते थे जिसे 15 जून के बाद आए मानसून से रफ्तार मिलती थी। इस बार भी जनपद के किसानों ने नर्सरी इसी समय के मुताबिक डाली।
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जून के पहले पखवाड़े में रोपाई कार्य भी शुरू हो चुके हैं लेकिन 19 जून तक भी मानसून का कहीं पता नहीं है। धूप की बढ़ती तपिश हवा के साथ मिलकर लू की स्थिति उत्पन्न करने लगी है। पिछले तीन दिनों की बात करें तो बेतहाशा तेज धूप की गर्मी नमी सोख रही है। प्रगतिशील किसान अनिरुद्ध चौधरी व किसान यूनियन जिलाध्यक्ष रामअशीष ने बताया कि इस बार मानसून की बेरुखी के कारण 50 फीसदी किसान मानसून का इंतजार कर रहे थे लेकिन मानसून समय पर न आने से निराश हैं।
शुक्रवार सुबह से ही धूप की तल्खी के साथ हवाओं ने बाहर ही नहीं घरों तक भी तपिश पहुंचाई। तपिश भरी गर्मी के कारण दिन डूबने के बाद भी हाईवे पर वाहनों की आवाजाही कम दिखी और महिलाएं व किशोरियां दुपट्टे से चेहरा ढंक तपिश से बचने का इंतजाम करती दिखीं।
1.45 लाख हेक्टेयर है धान का रकबा, 50 फीसदी रोपाई
जिला कृषि अधिकारी शैलेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि जनपद में नहर व ट्यूबेल के बेहतर इंतजाम होने के कारण धान की फसल आसपास के जनपदों के सापेक्ष पहले शुरू होती है। इस बार जनपद में धान का रकबा 1.45 लाख हेक्टेयर है। लगभग 50 फीसदी के आसपास रोपाई पूरी हो चुकी है। मानसून की गतिविधि विलंबित होने के कारण किसानों को रोपाई कार्य में पानी अधिक भरना पड़ रहा है क्योंकि धूप व तपिश भरी हवा मिट्टी की नमी तेजी से सुखा रही है।
वर्जन
जलवायु परिवर्तन व अलनीनो प्रभाव के चलते इस बार अभी मानसून पूर्वी यूपी में नहीं दाखिल हो सका है। अगले तीन दिन तक तेज धूप तापमान बढ़ाएगा हवा की रफ्तार से लू की स्थिति बन सकती है।
- अतुल कुमार सिंह, प्रभारी आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र।
10 किमी प्रति घंटा हवा ने कराया तपिश एहसास
महराजगंज। तराई के किसानों की बेसब्री मानसून के बदले रुख ने बढ़ा दी है। जनपद में मानसून का समय 15 जून के बाद माना जाता है। इंतजार तो मानसून का हो रहा था लेकिन जलवायु परिवर्तन व अलनीनो गतिविधियों के कारण लू चलने लगी है। शुक्रवार अधिकतम तापमान 38 डिग्री रिकॉर्ड किया गया।
हालांकि गर्मी और उमस के कारण लोगों को ज्यादा परेशानी हुई। 10 किमी प्रति घंटा चली हवा ने लू का प्रभाव कुछ कम जरूर रखा लेकिन अगले तीन दिनों तक हवा की गति बढ़ने के कारण लू की गतिविधियों में इजाफा होने की चेतावनी मौसम विभाग की तरफ से जारी हुई है।
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जानकारी के अनुसार, मानसूनी सीजन में पूर्वी यूपी की मौसमी गतिविधि से किसान सकते में आ गए हैं। जनपद धान की अगेती खेती के लिए जाना जाता है क्योंकि यहां नहरों का जाल है। किसान जून के पहले सप्ताह से ही धान रोपाई की प्रक्रिया शुरू करते थे जिसे 15 जून के बाद आए मानसून से रफ्तार मिलती थी। इस बार भी जनपद के किसानों ने नर्सरी इसी समय के मुताबिक डाली।
जून के पहले पखवाड़े में रोपाई कार्य भी शुरू हो चुके हैं लेकिन 19 जून तक भी मानसून का कहीं पता नहीं है। धूप की बढ़ती तपिश हवा के साथ मिलकर लू की स्थिति उत्पन्न करने लगी है। पिछले तीन दिनों की बात करें तो बेतहाशा तेज धूप की गर्मी नमी सोख रही है। प्रगतिशील किसान अनिरुद्ध चौधरी व किसान यूनियन जिलाध्यक्ष रामअशीष ने बताया कि इस बार मानसून की बेरुखी के कारण 50 फीसदी किसान मानसून का इंतजार कर रहे थे लेकिन मानसून समय पर न आने से निराश हैं।
शुक्रवार सुबह से ही धूप की तल्खी के साथ हवाओं ने बाहर ही नहीं घरों तक भी तपिश पहुंचाई। तपिश भरी गर्मी के कारण दिन डूबने के बाद भी हाईवे पर वाहनों की आवाजाही कम दिखी और महिलाएं व किशोरियां दुपट्टे से चेहरा ढंक तपिश से बचने का इंतजाम करती दिखीं।
1.45 लाख हेक्टेयर है धान का रकबा, 50 फीसदी रोपाई
जिला कृषि अधिकारी शैलेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि जनपद में नहर व ट्यूबेल के बेहतर इंतजाम होने के कारण धान की फसल आसपास के जनपदों के सापेक्ष पहले शुरू होती है। इस बार जनपद में धान का रकबा 1.45 लाख हेक्टेयर है। लगभग 50 फीसदी के आसपास रोपाई पूरी हो चुकी है। मानसून की गतिविधि विलंबित होने के कारण किसानों को रोपाई कार्य में पानी अधिक भरना पड़ रहा है क्योंकि धूप व तपिश भरी हवा मिट्टी की नमी तेजी से सुखा रही है।
वर्जन
जलवायु परिवर्तन व अलनीनो प्रभाव के चलते इस बार अभी मानसून पूर्वी यूपी में नहीं दाखिल हो सका है। अगले तीन दिन तक तेज धूप तापमान बढ़ाएगा हवा की रफ्तार से लू की स्थिति बन सकती है।
- अतुल कुमार सिंह, प्रभारी आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र।