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Maharajganj News: सहालग में मिलावटी मसाला खपाने को धंधेबाज तैयार
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कम रेट में खराब मिर्च लाकर धंधेबाज कराते पिसाई
सस्ती कीमत वाला सिंथेटिक कलर मिलाकर बना देते असली मिर्च पाउडर
महराजगंज। सहालग नजदीक आते ही धंधेबाज मसालों में मिलावट का खेल कर स्टॉक कर रहे हैं। सहालग में मसाले की मांग बढ़ जाती है और सस्ते दर पर आसानी से धंधेबाज बाजार में मिलाटी मसाला खपा देते हैं। दुकानदार भी रेट को लेकर झमेले में फंसना नहीं चाहते हैं और सस्ता वाला ही बेच देते हैं। सस्ते में मिलने मसालों में मिलावट की आशंका रहती है।
मसालों में सबसे ज्यादा उपयोग होने वाली हल्दी, मिर्च, धनिया, काली मिर्च, जीरा में अत्यधिक मिलावट की जा रही है। थोक में असली दालचीनी 650 रुपये किलो से अधिक के भाव बिकती है जबकि नकली दालचीनी 250 से 300 रुपये प्रति किलो के भाव आती है। चीन के बिलीलीफ पौधे की छाल एकदम दालचीनी जैसी होती है।
सूत्रों के अनुसार, लाल मिर्च पाउडर और हल्दी में कृत्रिम रंगों की मिलावट की जाती है। जिले में शहर के अलावा फरेंदा, निचलौल, घुघली, परतावल, पनियरा, खुटहा, शिकारपुर समेत अन्य क्षेत्र में मिलावट का खेल तेज होने की बात कही जा रही है। सीमावर्ती क्षेत्र के बाजारों में मिलावटी खाद्य पदार्थों की भरमार है।
जानकार बताते हैं कि खेत में पौधे पर लगी कुछ मिर्च का रंग लाल के बजाए सफेद हो जाता है। इसकी कीमत 30 प्रतिशत कम हो जाती है। आटा चक्की में इसकी पिसाई कराई जाती है और रंग लाने के लिए सस्ती कीमत वाला सिंथेटिक कलर मिलाया जाता है। धनिया में कुछ दाने टूटकर दो टुकड़े में बंट जाते हैं तो बाजार में इसकी कीमत आधी हो जाती है। इसकी पिसाई कराने पर पूरी कीमत मिलती है। धंधेबाज इसमें कढ़ी पत्ती भी मिला देते हैं। हल्दी में भी छोटे-छोटे सबसे कम कीमत वाले टुकड़ों की पिसाई की जाती है। इसमें चावल की खुद्दी और सिंथेटिक रंग मिलाया जाता है। इससे मसाले का वजन भी बढ़ जाता है।
शुद्ध हल्दी पानी में डूब जाएगी
केएमसी मेडिकल कालेज के डॉ. डीके कुशवाहा ने बताया कि एक गिलास पानी में एक चम्मच लाल मिर्च पाउडर या हल्दी मिलाएं। शुद्ध लाल मिर्च पाउडर कांच के तले में डूब जाएगा जबकि मिलावटी पानी पर तैरता रहेगा। इसी तरह शुद्ध हल्दी पानी में डूब जाएगी जबकि मिलावटी हल्दी पानी को पूरी तरह पीला कर देगी। काली मिर्च को पानी में मिलाते हैं तो केवल वास्तविक शुद्ध काली मिर्च ही बर्तन के तल पर बैठेगा जबकि अन्य तत्व पानी की सतह पर आ जाते हैं।
पाचन तंत्र पर खराब असर पड़ता
आयुष डॉ. प्रियंका सिंह ने बताया कि मसालों में मिलावट से बचने के लिए खड़े मसाले खरीदकर इस्तेमाल करने की जरूरत है। मिलावटी मसालों के सेवन से पाचन तंत्र पर खराब असर पड़ता है, इस कारण विभिन्न प्रकार की शारीरिक समस्याएं होती हैं। बिना प्रयोगशाला में जांच किए मसालों की शुद्धता की जानकारी नहीं हो सकती।
वर्जन
कारोबारियों को शुद्धता बनाए रखने के लिए जागरूक किया जाता है। समय-समय पर अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती है। आने वाले दिनों में जांच तेज की जाएगी। रिपोर्ट के अनुसार कार्रवाई होती है।
-केके उपाध्याय, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी
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सस्ती कीमत वाला सिंथेटिक कलर मिलाकर बना देते असली मिर्च पाउडर
महराजगंज। सहालग नजदीक आते ही धंधेबाज मसालों में मिलावट का खेल कर स्टॉक कर रहे हैं। सहालग में मसाले की मांग बढ़ जाती है और सस्ते दर पर आसानी से धंधेबाज बाजार में मिलाटी मसाला खपा देते हैं। दुकानदार भी रेट को लेकर झमेले में फंसना नहीं चाहते हैं और सस्ता वाला ही बेच देते हैं। सस्ते में मिलने मसालों में मिलावट की आशंका रहती है।
मसालों में सबसे ज्यादा उपयोग होने वाली हल्दी, मिर्च, धनिया, काली मिर्च, जीरा में अत्यधिक मिलावट की जा रही है। थोक में असली दालचीनी 650 रुपये किलो से अधिक के भाव बिकती है जबकि नकली दालचीनी 250 से 300 रुपये प्रति किलो के भाव आती है। चीन के बिलीलीफ पौधे की छाल एकदम दालचीनी जैसी होती है।
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सूत्रों के अनुसार, लाल मिर्च पाउडर और हल्दी में कृत्रिम रंगों की मिलावट की जाती है। जिले में शहर के अलावा फरेंदा, निचलौल, घुघली, परतावल, पनियरा, खुटहा, शिकारपुर समेत अन्य क्षेत्र में मिलावट का खेल तेज होने की बात कही जा रही है। सीमावर्ती क्षेत्र के बाजारों में मिलावटी खाद्य पदार्थों की भरमार है।
जानकार बताते हैं कि खेत में पौधे पर लगी कुछ मिर्च का रंग लाल के बजाए सफेद हो जाता है। इसकी कीमत 30 प्रतिशत कम हो जाती है। आटा चक्की में इसकी पिसाई कराई जाती है और रंग लाने के लिए सस्ती कीमत वाला सिंथेटिक कलर मिलाया जाता है। धनिया में कुछ दाने टूटकर दो टुकड़े में बंट जाते हैं तो बाजार में इसकी कीमत आधी हो जाती है। इसकी पिसाई कराने पर पूरी कीमत मिलती है। धंधेबाज इसमें कढ़ी पत्ती भी मिला देते हैं। हल्दी में भी छोटे-छोटे सबसे कम कीमत वाले टुकड़ों की पिसाई की जाती है। इसमें चावल की खुद्दी और सिंथेटिक रंग मिलाया जाता है। इससे मसाले का वजन भी बढ़ जाता है।
शुद्ध हल्दी पानी में डूब जाएगी
केएमसी मेडिकल कालेज के डॉ. डीके कुशवाहा ने बताया कि एक गिलास पानी में एक चम्मच लाल मिर्च पाउडर या हल्दी मिलाएं। शुद्ध लाल मिर्च पाउडर कांच के तले में डूब जाएगा जबकि मिलावटी पानी पर तैरता रहेगा। इसी तरह शुद्ध हल्दी पानी में डूब जाएगी जबकि मिलावटी हल्दी पानी को पूरी तरह पीला कर देगी। काली मिर्च को पानी में मिलाते हैं तो केवल वास्तविक शुद्ध काली मिर्च ही बर्तन के तल पर बैठेगा जबकि अन्य तत्व पानी की सतह पर आ जाते हैं।
पाचन तंत्र पर खराब असर पड़ता
आयुष डॉ. प्रियंका सिंह ने बताया कि मसालों में मिलावट से बचने के लिए खड़े मसाले खरीदकर इस्तेमाल करने की जरूरत है। मिलावटी मसालों के सेवन से पाचन तंत्र पर खराब असर पड़ता है, इस कारण विभिन्न प्रकार की शारीरिक समस्याएं होती हैं। बिना प्रयोगशाला में जांच किए मसालों की शुद्धता की जानकारी नहीं हो सकती।
वर्जन
कारोबारियों को शुद्धता बनाए रखने के लिए जागरूक किया जाता है। समय-समय पर अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती है। आने वाले दिनों में जांच तेज की जाएगी। रिपोर्ट के अनुसार कार्रवाई होती है।
-केके उपाध्याय, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी
