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गेमिंग टूर्नामेंट : तीन गुना रकम जीतने का लालच देकर फंसाया

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 21 Jan 2026 02:27 AM IST
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Gaming Tournament: Trapped by the lure of winning three times the amount
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परतावल। फ्री फायर गेमिंग टूर्नामेंट का आयोजन कर नवयुवकों से प्रवेश शुल्क वसूलने के मामले ने ऑनलाइन गेमिंग और साइबर ठगी से जुड़े कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को इनाम और जीत का लालच देकर प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए प्रेरित किया जा रहा था।
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आयोजकों द्वारा प्रति टीम 399 रुपये प्रवेश शुल्क तय किया गया था। इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए बड़े इनाम जीतने का प्रचार कर युवाओं को टूर्नामेंट में जोड़ा जा रहा था। बताया जा रहा है कि जीतने वाले को एक टूर्नामेंट के लिए जमा की गई राशि का तीस फीसदी मिलता, कुछ रकम अन्य टीमों के अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी को और शेष रकम आयोजक खुद रखने वाले थे। बताया जा रहा है कि दस-दस टीमों की एक प्रतियोगिता होनी थी। जीतने वाली टीम को तीन गुनी रकम मिलती।
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पुलिस मामले में गिरफ्तार दोनों आयोजकों दीपांशु पटवा और हर्ष पटवा पर संगठित अपराध, धोखाधड़ी, संपत्ति का लालच देकर की गई धोखाधड़ी, ऑनलाइन गेमिंग एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई कर रही है।
ऑनलाइन गेमिंग टूर्नामेंट तक सीमित नहीं : पुलिस का कहना है कि यह मामला केवल एक ऑनलाइन गेमिंग टूर्नामेंट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को आकर्षित कर डिजिटल माध्यमों से ठगी के बढ़ते खतरे की ओर भी इशारा करता है।
जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि यह आयोजन मनोरंजन की आड़ में किया गया अवैध कृत्य था या सुनियोजित साइबर ठगी।
मामले की जांच कर रहे उप निरीक्षक अखिलेश यादव ने बताया कि ऑनलाइन लेन-देन से जुड़े सभी खातों की गहन जांच की जा रही है। साथ ही आरोपियों से संबंधित इंस्टाग्राम आईडी को भी खंगाला जा रहा है। उन्होंने बताया कि डिलीट किए गए पोस्ट को भी साइबर पुलिस के सहयोग से रिकवर कराया जाएगा।
फिलहाल पूरे प्रकरण की गहनता से जांच जारी है। सभी तकनीकी व बैंकिंग पहलुओं की पड़ताल के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
क्या है कानून :भारतीय कानून में कौशल आधारित खेल और भाग्य आधारित खेल में स्पष्ट अंतर किया गया है।
यदि किसी खेल में जीत मुख्य रूप से भाग्य पर निर्भर हो और उसमें प्रवेश शुल्क लेकर इनाम देने की व्यवस्था हो, तो उसे जुआ या सट्टा माना जा सकता है।
फ्री फायर जैसे ऑनलाइन गेम यदि बिना नियामक अनुमति के पैसे लेकर प्रतियोगिता कराई जाती है, तो यह कई राज्यों में जुआ अधिनियम के तहत अपराध की श्रेणी में आ सकता है।
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