सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Maharajganj News ›   Hunters eye the red-faced bird, increased interference in the forest area

Maharajganj News: लालसर पक्षी पर शिकारियों की नजर, वन क्षेत्र में बढ़ी दखल

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 02 Jan 2026 02:33 AM IST
विज्ञापन
Hunters eye the red-faced bird, increased interference in the forest area
विज्ञापन
विदेशी मेहमानों का स्वागत की जगह हो रहा शिकार, पक्षियों की संख्या में आ रही गिरावट
Trending Videos

बुधवार को आठ मृत लालसर पक्षी के साथ एक शिकारी को किया गया था गिरफ्तार, आरोपी भेजा गया जेल

निचलौल। वन क्षेत्र में मिलने वाले लालसर पक्षी के शिकारियों की दखल बढ़ गई है। ठंड में इनकी चहल कदमी वन क्षेत्र में बढ़ जाती है। कड़ाके की ठंड बढ़ने के साथ ही साइबेरियन और हिमालय क्षेत्र से आने वाले मेहमान पक्षियों का इन दिनों सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के बांधों, झीलों और तालाबों में डेरा है। शिकारी इसका फायदा उठा रहे हैं। बीते दिन एक शिकारी को गिरफ्तार किया गया है। बृहस्पतिवार को उसे जेल भेज दिया गया।
वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूटीआई) के मुताबिक दिसंबर से जनवरी माह में हर साल प्रवासी पक्षी वन क्षेत्र के बांधों, तालाबों व कुंडों में रहने के लिए आते हैं। ठंड बढ़ते ही छोटा राजहंस, सारस, काला सिर का ढोमरा, अवलख बत्तख, मालंग बगुला, लालसर, कुर्च, जलीय बतख, घोंघिल, जलमुर्गी समेत आदि पक्षियों ने निचलौल, मधवलिया, पकड़ी, चौकी, लक्ष्मीपुर सहित सभी वन रेंज के बांध सहित विभिन्न तालाबों व कुंडों में डेरा जमा लिया है। हर साल की तरह इस बार भी इन्हें देख शिकारी भी सक्रिय हो चुके हैं। हर रोज भोर में एवं शाम ढलते ही इन पक्षियों का शिकार किया जाता है। सबसे ज्यादा जल मुर्गी, ठेकरी व लालसर पर शिकारियों की नजर रहती है। शिकारियों की बढ़ती दखल के चलते हर साल मेहमान पक्षियों की संख्या कम होती जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

नाम न बताने की शर्त पर सीमावर्ती इलाके के एक गांव निवासी एक शिकारी ने बताया कि पहले तीर कमान और बंदूक के साथ साथ जहरीली दवाओं का प्रयोग करके इन पक्षियों को मारा जाता था। लेकिन अब शिकार में बंदूक और तीर कमान का प्रयोग कम होता है। क्योंकि अब खेत में जहर डालकर और फंदा लगाकर शिकार किया जाता है। उसने आगे बताया कि दरअसल ये पक्षी जब खेतों व नदी किनारे अपने भोजन की तलाश में निकलते हैं। तब शिकारी आसपास जाल लगाकर और जलाशयों के किनारे आटे में जहर मिलाकर इनका शिकार करते हैं। पहले की तुलना में अब पुलिस और वन विभाग की कार्रवाई अधिक हो रही है। इसका शिकार तो गांव में होता है लेकिन बिक्री शहरों में अधिक होती है। क्योंकि इस पक्षी को खाने वाले अधिकतर गिने-चुने लोग होते हैं।

वही डीएफओ निरंजन सुर्वे ने बताया कि जंगलों में शिकारियों की दखल रोकने के लिए वन कर्मियों को निरंतर गश्त करने के निर्देश दिए गए है। शिकारियों को पकड़ने में लापरवाही नहीं बरती जाती है। शिकारी पहले की तरह खुले में बिक्री नहीं कर पा रहे हैं। अगर कोई शिकार करते या बेचते पाया जाता है तो छापा मारकर उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जाती है।
गश्त बढ़ाने के साथ ही सुरक्षा करना होगा मजबूत
वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के मैनेजर अरशद हुसैन ने बताया कि लालसर जैसे प्रवासी पक्षियों पर शिकारियों की लगातार नजर और वन क्षेत्रों में बढ़ती दखल अंदाजी एक गंभीर समस्या है। इससे इन सुंदर पक्षियों की संख्या निरंतर घट रही है। कई जगहों पर इन्हें ''लालसर'' के नाम पर बतख समझकर मारा जाता है। जबकि यह प्रवासी पक्षी है। इनके शिकार पर प्रतिबंध है और वन्यजीव विभाग को इन क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने के साथ ही सुरक्षा मजबूत करनी चाहिए।
सबसे महंगे में बिकते हैं लालसर
शिकारियों से पक्षी खरीदने वाले एक शख्स ने बताया कि बगेरी 250 से लेकर 300 रुपये प्रति दर्जन, अधिंगा और कारंग 800 रुपये प्रति जोड़ा, चाहा 300 से 400 रुपये प्रति दर्जन और गुलाबसर व लालसर 1400 से 1500 रुपये प्रति जोड़ी तक बेची जाती है। लालसर और गुलाबसर को खरीदने वालों की संख्या अधिक रहती है। पहले से सूचना देने पर इन शौकीनों तक शिकारी पक्षी को पहुंचा भी देते हैं। वही महंगे होने की बात बोलने पर शिकारी कहते हैं कि रात में तालाब में जाल लगाना होता है। बहुत परेशानी है। एडवांस रकम देकर भी ये नहीं मिलेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed