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Maharajganj News: अब ‘सुविधा’ नहीं, ‘जिम्मेदारी’ तय करेगी जिंदगी
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Fri, 15 May 2026 02:45 AM IST
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ईंधन बचत के निर्देशों से लाइफस्टाइल बदलने की शुरुआत
विशेषज्ञ बोले: आदत नहीं बदली तो महंगा पड़ेगा भविष्य
सिद्धार्थनगर। ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण को लेकर आए निर्देशों ने सिद्धार्थनगर में एक बड़े बदलाव की दस्तक दे दी है। यह सिर्फ सरकारी अपील नहीं बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी यानी आवागमन, खर्च और सोच सब पर असर डालने वाला बदलाव है। जिले में अब सुविधा आधारित से जिम्मेदारी आधारित जीवन की ओर बढ़ने की बहस तेज हो गई है।
परिवहन विभाग के अनुमानों के मुताबिक, जिले में पिछले पांच वर्षों में वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जिसमें दोपहिया की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। नतीजा छोटी दूरी के लिए भी बाइक और कार का इस्तेमाल आम हो गया है, जिससे ईंधन खपत और खर्च दोनों बढ़े हैं। अर्थशास्त्री डॉ. संजय पांडेय कहते हैं कि अगर जिले के 10-15 प्रतिशत लोग भी रोज एक लीटर ईंधन बचाते हैं, तो इसका असर महंगाई और विदेशी मुद्रा पर दिखेगा। अगर हम आदत नहीं बदलेंगे तो आने वाले समय में मजबूरी में बदलाव करना पड़ेगा और वह ज्यादा महंगा भी होगा।
समाजशास्त्री डॉ. रघुवर पांडेय के मुताबिक, यह सिर्फ सरकारी निर्देश नहीं सामाजिक व्यवहार में बदलाव का समय है। 500 मीटर के लिए भी बाइक निकालने की आदत बदलनी होगी।
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लोग क्या कह रहे
- सरकारी सेवक अंबरीश यादव कहते हैं कि औसतन रोज कम से कम 25 से 30 किलोमीटर यात्रा करनी पड़ती है। अगर बस या अन्य साधन समय पर मिले तो कोई परेशानी नहीं है। हालांकि अभी विकल्प नहीं है। वाहन चालक शकील अहमद कहते हैं, शेयरिंग बढ़े तो हमें भी फायदा है। कम चक्कर में ज्यादा सवारी मिल सकती है। गृहिणी निष्कला का फोकस घर पर है। कहती हैं कि अब हम ध्यान रखते हैं कि फालतू बिजली न जले। सोलर सस्ता हो जाए तो जरूर लगवाएंगे।
प्रिंसिपल राजेश मिश्र बताते हैं, हम महीने में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ लागू करने की तैयारी में हैं।
पेट्रोल पंप मैनेजर अजय उपाध्याय कहते हैं कि कीमत बढ़ने पर खपत थोड़ी घटती है लेकिन असली बदलाव आदत बदलने से ही आएगा। किसान रामदेव कहते हैं कि डीजल महंगा है, सोलर पंप मिल जाए तो अपनाएंगे लेकिन लागत बड़ी है। स्वास्थ्य विभाग भी इसे प्रमोट कर रहा है। डॉ. संजय शर्मा कहते हैं, अगर लोग पैदल चलना शुरू करें तो दिल और शुगर की बीमारियां कम होंगी, यह डबल फायदा है। वहीं छात्र रोहित वर्मा कहते हैं पब्लिक ट्रांसपोर्ट मजबूत हो जाए तो हम निजी वाहन छोड़ सकते हैं। अभी सुविधा नहीं है।
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आंकड़े बोलते हैं
- दोपहिया वाहनों की तेजी से बढ़ती संख्या
- छोटी दूरी पर भी निजी वाहन का ज्यादा उपयोग
- ईंधन खर्च में लगातार बढ़ोत्तरी
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आपकी जिंदगी में क्या बदलेगा
- 1-2 किमी दूरी पर पैदल/साइकिल
- कार पूलिंग और बस का इस्तेमाल
- बिजली-पानी की खपत पर नियंत्रण
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सबसे बड़ी चुनौती
- पब्लिक ट्रांसपोर्ट की कमी
- सोलर की शुरुआती लागत
- आदत बदलने में झिझक
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एक नजर में फायदा
- रोज एक लीटर बचत यानी तीन हजार/माह
- हफ्ते में एक दिन बिना वाहन, साल में 50 दिन बचत
- एक किमी पैदल यानी 60- 70 कैलोरी बर्न
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यह है मामला
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऊर्जा बचत, आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ते हुए व्यापक जीवनशैली बदलाव की अपील की है। इसमें सप्ताह में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’, मेट्रो/बस/पीएनजी के उपयोग, स्कूलों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट और ऑफिस टाइम में बदलाव शामिल हैं। कार पूलिंग, साइक्लिंग और ईवी को बढ़ावा देने के साथ छह महीने तक गैर-जरूरी विदेश यात्रा टालने की बात कही गई है। साथ ही, देश में डेस्टिनेशन वेडिंग, स्वदेशी उत्पादों के उपयोग, खाद्य तेल कम करने, नेचुरल फार्मिंग और ‘विजिट माय स्टेट’ अभियान के जरिये पर्यटन बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।
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सिद्धार्थनगर। ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण को लेकर आए निर्देशों ने सिद्धार्थनगर में एक बड़े बदलाव की दस्तक दे दी है। यह सिर्फ सरकारी अपील नहीं बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी यानी आवागमन, खर्च और सोच सब पर असर डालने वाला बदलाव है। जिले में अब सुविधा आधारित से जिम्मेदारी आधारित जीवन की ओर बढ़ने की बहस तेज हो गई है।
परिवहन विभाग के अनुमानों के मुताबिक, जिले में पिछले पांच वर्षों में वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जिसमें दोपहिया की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। नतीजा छोटी दूरी के लिए भी बाइक और कार का इस्तेमाल आम हो गया है, जिससे ईंधन खपत और खर्च दोनों बढ़े हैं। अर्थशास्त्री डॉ. संजय पांडेय कहते हैं कि अगर जिले के 10-15 प्रतिशत लोग भी रोज एक लीटर ईंधन बचाते हैं, तो इसका असर महंगाई और विदेशी मुद्रा पर दिखेगा। अगर हम आदत नहीं बदलेंगे तो आने वाले समय में मजबूरी में बदलाव करना पड़ेगा और वह ज्यादा महंगा भी होगा।
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समाजशास्त्री डॉ. रघुवर पांडेय के मुताबिक, यह सिर्फ सरकारी निर्देश नहीं सामाजिक व्यवहार में बदलाव का समय है। 500 मीटर के लिए भी बाइक निकालने की आदत बदलनी होगी।
लोग क्या कह रहे
- सरकारी सेवक अंबरीश यादव कहते हैं कि औसतन रोज कम से कम 25 से 30 किलोमीटर यात्रा करनी पड़ती है। अगर बस या अन्य साधन समय पर मिले तो कोई परेशानी नहीं है। हालांकि अभी विकल्प नहीं है। वाहन चालक शकील अहमद कहते हैं, शेयरिंग बढ़े तो हमें भी फायदा है। कम चक्कर में ज्यादा सवारी मिल सकती है। गृहिणी निष्कला का फोकस घर पर है। कहती हैं कि अब हम ध्यान रखते हैं कि फालतू बिजली न जले। सोलर सस्ता हो जाए तो जरूर लगवाएंगे।
प्रिंसिपल राजेश मिश्र बताते हैं, हम महीने में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ लागू करने की तैयारी में हैं।
पेट्रोल पंप मैनेजर अजय उपाध्याय कहते हैं कि कीमत बढ़ने पर खपत थोड़ी घटती है लेकिन असली बदलाव आदत बदलने से ही आएगा। किसान रामदेव कहते हैं कि डीजल महंगा है, सोलर पंप मिल जाए तो अपनाएंगे लेकिन लागत बड़ी है। स्वास्थ्य विभाग भी इसे प्रमोट कर रहा है। डॉ. संजय शर्मा कहते हैं, अगर लोग पैदल चलना शुरू करें तो दिल और शुगर की बीमारियां कम होंगी, यह डबल फायदा है। वहीं छात्र रोहित वर्मा कहते हैं पब्लिक ट्रांसपोर्ट मजबूत हो जाए तो हम निजी वाहन छोड़ सकते हैं। अभी सुविधा नहीं है।
आंकड़े बोलते हैं
- दोपहिया वाहनों की तेजी से बढ़ती संख्या
- छोटी दूरी पर भी निजी वाहन का ज्यादा उपयोग
- ईंधन खर्च में लगातार बढ़ोत्तरी
आपकी जिंदगी में क्या बदलेगा
- 1-2 किमी दूरी पर पैदल/साइकिल
- कार पूलिंग और बस का इस्तेमाल
- बिजली-पानी की खपत पर नियंत्रण
सबसे बड़ी चुनौती
- पब्लिक ट्रांसपोर्ट की कमी
- सोलर की शुरुआती लागत
- आदत बदलने में झिझक
एक नजर में फायदा
- रोज एक लीटर बचत यानी तीन हजार/माह
- हफ्ते में एक दिन बिना वाहन, साल में 50 दिन बचत
- एक किमी पैदल यानी 60- 70 कैलोरी बर्न
यह है मामला
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऊर्जा बचत, आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ते हुए व्यापक जीवनशैली बदलाव की अपील की है। इसमें सप्ताह में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’, मेट्रो/बस/पीएनजी के उपयोग, स्कूलों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट और ऑफिस टाइम में बदलाव शामिल हैं। कार पूलिंग, साइक्लिंग और ईवी को बढ़ावा देने के साथ छह महीने तक गैर-जरूरी विदेश यात्रा टालने की बात कही गई है। साथ ही, देश में डेस्टिनेशन वेडिंग, स्वदेशी उत्पादों के उपयोग, खाद्य तेल कम करने, नेचुरल फार्मिंग और ‘विजिट माय स्टेट’ अभियान के जरिये पर्यटन बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।