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Mainpuri News: हिंदी का हो रहा विस्तार बन रही लोकप्रिय भाषा
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फोटो 35 कवि बलराम श्रीवास्तव
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मैनपुरी। हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए और इस भाषा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए तमाम साहित्यकार कवि रचनाकार सालों से अपना योगदान दे रहे हैं। 10 जनवरी को मनाया जाने वाला विश्व हिंदी दिवस का महत्व भी यही है कि इस भाषा को नित्य नए आयाम और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिले।
जनपद के कई साहित्यकार हिंदी के क्षेत्र में सालों से अपना योगदान दे रहे हैं। चाहे उनकी कविता हो उपन्यास हो या अन्य कोई रचना हिंदी के शब्दों का प्रयोग कर वह अपनी रचना को लोगों तक पहुंचा रहे हैं और हिंदी का प्रचार प्रसार कर रहे हैं। इसी हिंदी में अब तक उनको राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहचान व सम्मान दिलाया है।
मैनपुरी के कवि बलराम श्रीवास्तव की करीब पांच किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। वह 33 वर्षों से हिंदी कविता के मंचों पर सक्रिय है। उनका कहना है कि भारतीय सिनेमा जगत ने हिंदी को दूर-दूर तक पहुंचाया है। हिंदी की विशेषता है कि इसमें जो लिखा जाता है, वही बोला जाता है। यह एक वैज्ञानिक भाषा है।
कवि बलराम श्रीवास्तव देश में कई कवि सम्मेलन में काव्य पाठ कर चुके हैं, उन्होंने गणतंत्र दिवस समारोह में दिल्ली के लाल किले से तीन बार काव्य पाठ किया। इसके अलावा वह देश के कई राज्यों की हिंदी अकादमी, भाषा संस्थान, साहित्य अकादमी में काव्य पाठ कर चुके हैं और लगभग 100 से अधिक साहित्य सम्मान भी पा चुके हैं। उन्होंने हिंदी को बढ़ाने के लिए और लोकप्रिय कवियों के सम्मान के लिए महाकवि डॉक्टर कुवंर बेचैन साहित्य सम्मान की स्थापना की, जिसमें प्रतिवर्ष एक कवि को 101111 रुपए की धनराशि और सम्मान दिया जाता है।
जनपद के एडवोकेट श्री कृष्ण मिश्र भी करीब 40 सालों से साहित्य के क्षेत्र में अपना योगदान दे रहे हैं। वह अब तक कई उपन्यास, कविताएं, कहानी और समीक्षा लिख चुके हैं। उनकी अब तक 50 से ज्यादा किताबें प्रकाशित भी हो चुकी हैं। वहीं, उन्होंने बताया कि उनके ऊपर तीन पीएचडी भी हुई है और उन्हें कादंबरी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है। इसके अलावा भी अन्य जिलों में उन्हें कई सम्मान मिल चुके हैं। उन्होंने बताया कि हिंदी अब लोकप्रिय हो रही है, इसका विस्तार हो रहा है।
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जनपद के कई साहित्यकार हिंदी के क्षेत्र में सालों से अपना योगदान दे रहे हैं। चाहे उनकी कविता हो उपन्यास हो या अन्य कोई रचना हिंदी के शब्दों का प्रयोग कर वह अपनी रचना को लोगों तक पहुंचा रहे हैं और हिंदी का प्रचार प्रसार कर रहे हैं। इसी हिंदी में अब तक उनको राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहचान व सम्मान दिलाया है।
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मैनपुरी के कवि बलराम श्रीवास्तव की करीब पांच किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। वह 33 वर्षों से हिंदी कविता के मंचों पर सक्रिय है। उनका कहना है कि भारतीय सिनेमा जगत ने हिंदी को दूर-दूर तक पहुंचाया है। हिंदी की विशेषता है कि इसमें जो लिखा जाता है, वही बोला जाता है। यह एक वैज्ञानिक भाषा है।
कवि बलराम श्रीवास्तव देश में कई कवि सम्मेलन में काव्य पाठ कर चुके हैं, उन्होंने गणतंत्र दिवस समारोह में दिल्ली के लाल किले से तीन बार काव्य पाठ किया। इसके अलावा वह देश के कई राज्यों की हिंदी अकादमी, भाषा संस्थान, साहित्य अकादमी में काव्य पाठ कर चुके हैं और लगभग 100 से अधिक साहित्य सम्मान भी पा चुके हैं। उन्होंने हिंदी को बढ़ाने के लिए और लोकप्रिय कवियों के सम्मान के लिए महाकवि डॉक्टर कुवंर बेचैन साहित्य सम्मान की स्थापना की, जिसमें प्रतिवर्ष एक कवि को 101111 रुपए की धनराशि और सम्मान दिया जाता है।
जनपद के एडवोकेट श्री कृष्ण मिश्र भी करीब 40 सालों से साहित्य के क्षेत्र में अपना योगदान दे रहे हैं। वह अब तक कई उपन्यास, कविताएं, कहानी और समीक्षा लिख चुके हैं। उनकी अब तक 50 से ज्यादा किताबें प्रकाशित भी हो चुकी हैं। वहीं, उन्होंने बताया कि उनके ऊपर तीन पीएचडी भी हुई है और उन्हें कादंबरी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है। इसके अलावा भी अन्य जिलों में उन्हें कई सम्मान मिल चुके हैं। उन्होंने बताया कि हिंदी अब लोकप्रिय हो रही है, इसका विस्तार हो रहा है।

फोटो 35 कवि बलराम श्रीवास्तव