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Mathura News: जमीन की धोखाधड़ी में कोर्ट के आदेश पर दो के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज
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चौमुहां। गांव जैंत निवासी एक व्यक्ति ने जमीन के सौदे के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करने वाले दो आरोपियों के खिलाफ कोर्ट के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज कराई है।। पीड़ित ने आरोपियों पर तय समय में बैनामा न करने व बयाने की रकम न लौटाने का आरोप लगाया है। पुलिस प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच करने में जुट गई है।
थाना जैंत के गांव जैंत निवासी करन प्रताप सिंह पुत्र आजाद सिंह ने कोर्ट में दिए शिकायती पत्र में बताया कि फरवरी 2025 में उन्होंने थाना जैंत के गांव आझई खुर्द निवासी थान सिंह पुत्र यादराम और ओमप्रकाश से एक जमीन का सौदा किया था। खसरा संख्या 886 की इस जमीन की कुल कीमत 2.32 करोड़ रुपये तय हुई थी। पीड़ित के अनुसार, उन्होंने बयाने के तौर पर 20 लाख नकद और 10 लाख बैंक के माध्यम से विपक्षियों को दिए थे। बैनामे की अंतिम तिथि 25 अप्रैल 2025 तय की गई थी। चूंकि विक्रेता ओमप्रकाश अनुसूचित जाति से संबंध रखते हैं, इसलिए नियमानुसार इस कृषि भूमि की बिक्री के लिए प्रशासन से अनुमति लेना अनिवार्य था। पीड़ित का आरोप है कि विपक्षियों ने न तो प्रशासन से अनुमति ली और न ही जमीन को आबादी घोषित कराने की अपनी जिम्मेदारी पूरी की।
पीड़ित ने उक्त भूमि की बाउंड्रीवाल पर भी करीब 3 लाख रुपये खर्च कर दिए हैं। आरोप है कि अब आरोपी पक्ष न केवल पैसे लौटाने से इंकार कर रहा है, बल्कि उसी जमीन को किसी तीसरे पक्ष को बेचने की फिराक में है। पीड़ित ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मथुरा को भी रजिस्टर्ड डाक से शिकायत भेजी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। सीओ सदर पीतमपाल सिंह ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है। जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी। संवाद
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थाना जैंत के गांव जैंत निवासी करन प्रताप सिंह पुत्र आजाद सिंह ने कोर्ट में दिए शिकायती पत्र में बताया कि फरवरी 2025 में उन्होंने थाना जैंत के गांव आझई खुर्द निवासी थान सिंह पुत्र यादराम और ओमप्रकाश से एक जमीन का सौदा किया था। खसरा संख्या 886 की इस जमीन की कुल कीमत 2.32 करोड़ रुपये तय हुई थी। पीड़ित के अनुसार, उन्होंने बयाने के तौर पर 20 लाख नकद और 10 लाख बैंक के माध्यम से विपक्षियों को दिए थे। बैनामे की अंतिम तिथि 25 अप्रैल 2025 तय की गई थी। चूंकि विक्रेता ओमप्रकाश अनुसूचित जाति से संबंध रखते हैं, इसलिए नियमानुसार इस कृषि भूमि की बिक्री के लिए प्रशासन से अनुमति लेना अनिवार्य था। पीड़ित का आरोप है कि विपक्षियों ने न तो प्रशासन से अनुमति ली और न ही जमीन को आबादी घोषित कराने की अपनी जिम्मेदारी पूरी की।
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पीड़ित ने उक्त भूमि की बाउंड्रीवाल पर भी करीब 3 लाख रुपये खर्च कर दिए हैं। आरोप है कि अब आरोपी पक्ष न केवल पैसे लौटाने से इंकार कर रहा है, बल्कि उसी जमीन को किसी तीसरे पक्ष को बेचने की फिराक में है। पीड़ित ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मथुरा को भी रजिस्टर्ड डाक से शिकायत भेजी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। सीओ सदर पीतमपाल सिंह ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है। जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी। संवाद
