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UP: कुपोषण के चक्रव्यूह को तोड़ रहा बचपन, यहां देखें तीन साल का रिपोर्ट कार्ड; घट रही लाल-पीली श्रेणी

मानवेन्द्र सिंह, संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 09 Apr 2026 01:18 PM IST
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सार

मथुरा में कुपोषण के खिलाफ पिछले तीन वर्षों में चलाए गए अभियानों का सकारात्मक असर दिखा रहा है, हजारों बच्चे स्वस्थ श्रेणी में आए हैं। लाल और पीली श्रेणी के मामलों में गिरावट के साथ बौनापन भी घटा है, जो जिले के बेहतर भविष्य का संकेत है।

Malnutrition levels improve significantly among children in Mathura
कुपोषण के चक्रव्यूह को तोड़ रहा बचपन - फोटो : AI
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विस्तार

कान्हा की नगरी में बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और पोषण को लेकर पिछले तीन वर्षों में चलाए गए अभियानों के सुखद परिणाम सामने आए हैं। स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में कुपोषण की स्थिति में सुधार हुआ है। लाल श्रेणी (अति कुपोषित) और पीली श्रेणी (मध्यम कुपोषित) की श्रेणी में आने वाले बच्चों की संख्या में कमी दर्ज की गई है। बौनेपन में भी कमी आई है, जो जिले के सुनहरे और स्वस्थ भविष्य की ओर एक मजबूत कदम माना जा रहा है।
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प्रशासन द्वारा चलाए गए पोषण अभियान और घर-घर दस्तक जैसे कार्यक्रमों ने जमीनी स्तर पर असर दिखाया है। आंकड़ों की तुलना करें तो हर साल बच्चों की सेहत में सुधार का ग्राफ चढ़ा है। जिला कार्यक्रम अधिकारी बुद्धि मिश्रा ने बताया कि कुपोषण मुक्त जिले का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए पोषण पखवाड़ा, पोषण माह और मिशन सुपोषण जैसे कार्यक्रमों ने बड़ी भूमिका निभाई है। हमारा लक्ष्य जिले को कुपोषण मुक्त बनाना है। आंकड़ों में यह सुधार टीम वर्क और जनता के सहयोग का परिणाम है। अब हमारा ध्यान उन जगहों पर है जहां चुनौतियां बाकी हैं।
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 डाइटीशियन डॉ. मयंक सारस्वत ने बताया कि पोषण पुनर्वास केंद्र में अति गंभीर बच्चों का उपचार होता है। वर्तमान में पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में लाल श्रेणी के सात अति गंभीर बच्चों का इलाज चल रहा है। लाल श्रेणी के बच्चों को एनआरसी में भर्ती कर विशेष देखभाल दी जाती है। पीली श्रेणी के बच्चों का उपचार आंगनबाड़ी केंद्रों पर ही ओपीडी के माध्यम से किया जाता है।

तीन साल का रिपोर्ट कार्ड
श्रेणी वर्ष 2023-24 वर्ष 2024-25 वर्ष 2025-26
लाल श्रेणी- 2,561- 1,497- 925
पीली श्रेणी- 9,050- 8,532 - 5,061
बौनापन - 1.06 लाख - 1.08 लाख - 70 हजार
 

ऐसे पाई सफलता....
डिजिटल मॉनिटरिंग-ई-कवच पोर्टल और पोषण ट्रैकर एप के माध्यम से कुपोषित बच्चे की रियल-टाइम ट्रैकिंग।
पोषण अभियान- पोषण पखवाड़ा, पोषण माह और मिशन सुपोषण जैसे कार्यक्रमों ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई
आहार में बाजरा और अन्य मोटे अनाजों को शामिल करने के प्रति जागरुकता ने ग्रामीण में संजीवनी का काम किया।
घर-घर दस्तक- आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने स्तनपान और पूरक आहार के महत्व को समझाकर सीधे संवाद किया।

क्या है कुपोषण की श्रेणी
लाल श्रेणी- (गंभीर तीव्र कुपोषण) यह सबसे गंभीर अवस्था है। इसमें बच्चे की ऊंचाई (लंबाई) के अनुसार वजन बहुत कम होता है। हाथ-पैर बहुत पतले, पसलियां दिखने लगती हैं।
पीली श्रेणी- (मध्यम कुपोषण) यह लाल से पहले की स्थिति है, जिसे मध्यम कुपोषण कहते हैं। इसमें बच्चे का वजन उसकी ऊंचाई के मुकाबले कम होता है, लाल श्रेणी से बेहतर है।
बौनापन- जब बच्चे की लंबाई उसकी उम्र के अनुपात में बहुत कम रह जाती है। यह लंबे समय तक कुपोषण के कारण होता है, जिससे शारीरिक और मानसिक विकास रुक जाता है।

क्यों होता है कुपोषण
जन्म के तुरंत बाद मां का दूध न पिलाना।
समय पर पूरक आहार शुरू न करना।
दूध पर निर्भरता और लिक्विड डाइट की कमी।
 

क्या है समाधान
जन्म से छह माह तक बच्चे को केवल मां का दूध पिलाएं।
छह माह बाद दाल का पानी, नारियल, फिर सेमी-सॉलिड आहार शुरू करें।
समय पर टीकाकरण और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।
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