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ब्रज का अनूठा रंगोत्सव: मथुरा में खेली गई जूता-चप्पल से होली, 150 वर्ष पुरानी है परंपरा; ऐसे मिलता है आशीर्वाद
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: Arun Parashar
Updated Wed, 04 Mar 2026 02:57 PM IST
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सार
मथुरा की होली दुनियाभर में प्रसिद्ध है। लेकिन यहां एक अनूठी होली भी खेली जाती है। वह है जूता-चप्पल मार होली। इस होली की परंपरा अंग्रेजों के शासनकाल से जुड़ी हुई है।
ब्रज की जूता-चप्पल मार होली।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
मथुरा के सौंख में अंग्रेजों के द्वारा किए गए जुल्म के विरोध में गांव बछगांव में जूता-चप्पल मार होली खेली गई। होली के दौरान अपने से छोटे में चप्पल और जूता मार कर आशीर्वाद दिया। इसका किसी ने बुरा तक नहीं माना। ये परंपरा सदियों से चली आ रही है।
गोवर्धन तहसील के गांव बछगांव में विगत सैकड़ों वर्षों से जूता-चप्पल मारकर होली मनाने की पंरपरा है। इस होली में एक खास बात ये भी कि अपने छोटे लोगों को जूता-चप्पल मारकर होली की शुभकामनाओं के साथ आशीर्वाद दिया गया।
सकारात्मक विचारों और सही दिशा के लिए अग्रसर होने के लिए जागरूक किया गया। इसके बाद बुजुर्ग होली, बृजगीत, रसिया समेत अन्य प्रकार की गीतों के सहारे भजन कीर्तन करते है। इस प्रकार ब्रज में बछगांव में होली की अद्भूत परपंरा है। जहां जूता चप्पल मार होली खेली गई। यहां की होली को शांतिपूर्ण तरीके से मनाई गई।
150 वर्ष पुरानी है परपंरा
गांव बछगांव में जूता-चप्पल मार होली खेलने की परपंरा 100-150 वर्ष पुरानी है। अंग्रेजों द्वारा किए गए जुल्म के विरोध में जूता-चप्पल मार होली खेली गई। धुलंडी के दिन सुबह से शाम तक सभी लोग इसी प्रकार होली खेलते है। इसके बाद बुजुर्गो द्वारा फाल्गुन के रसियों पर थिरकते नजर आते है।
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गोवर्धन तहसील के गांव बछगांव में विगत सैकड़ों वर्षों से जूता-चप्पल मारकर होली मनाने की पंरपरा है। इस होली में एक खास बात ये भी कि अपने छोटे लोगों को जूता-चप्पल मारकर होली की शुभकामनाओं के साथ आशीर्वाद दिया गया।
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सकारात्मक विचारों और सही दिशा के लिए अग्रसर होने के लिए जागरूक किया गया। इसके बाद बुजुर्ग होली, बृजगीत, रसिया समेत अन्य प्रकार की गीतों के सहारे भजन कीर्तन करते है। इस प्रकार ब्रज में बछगांव में होली की अद्भूत परपंरा है। जहां जूता चप्पल मार होली खेली गई। यहां की होली को शांतिपूर्ण तरीके से मनाई गई।
150 वर्ष पुरानी है परपंरा
गांव बछगांव में जूता-चप्पल मार होली खेलने की परपंरा 100-150 वर्ष पुरानी है। अंग्रेजों द्वारा किए गए जुल्म के विरोध में जूता-चप्पल मार होली खेली गई। धुलंडी के दिन सुबह से शाम तक सभी लोग इसी प्रकार होली खेलते है। इसके बाद बुजुर्गो द्वारा फाल्गुन के रसियों पर थिरकते नजर आते है।
