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Lathmar Holi 2026: 'खबर करियौ रसिया आयौ' नंदगांव से बरसाना तक लठामार होली का ऐलान, गुलाल में सराबोर हुआ ब्रज
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Wed, 25 Feb 2026 01:05 PM IST
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सार
फागुन की मादक बयार, ढप-झांझ की थाप और रसिया पदों की गूंज के बीच नंदगांव एक बार फिर ब्रजरस में सराबोर हो उठा। अनुमति पा खुशहाल भये सब, पुरखा आनंदघन पौरन आए इन पंक्तियों के सजीव होते ही नंदभवन में ऐसा लगा मानो पुरखों की परंपरा स्वयं उतर आई हो। अबीर-गुलाल के बादल छाए, हर मूरत बहुरंगी हो उठी और बाबा आनंदघन वंशजों के चेहरे आनंद से दमक उठे।
लठामारी होली
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
बरसाना में लड्डू होली के समापन के बाद शुक्ल पक्ष की नवमी, बुधवार की भोर से ही नंदगांव के हुरियारे लठामार होली की तैयारी में जुट गए। करीब 11 बजे नंदभवन में समाज गायन का भव्य आयोजन हुआ। पवित्र समाज की वार्षिकोत्सव पुस्तक का पूजन गोस्वामी समाज के मुखिया बिजन मास्टर ने किया।
जैसे ही सकल कुंवर गोकुल के निकसे खेलनि फाग निकसे कुंवर खेलन चले रंग होरी हो मोहन नंद के लाल का गायन आरंभ हुआ, समूचा प्रांगण सुर-लय में बंध गया। समाजियों ने नंदलाला और दाऊजी के समक्ष पद गाकर उनसे संग चलकर होली खेलने का आग्रह किया, वहीं नंदीश्वर महादेव को भी अलौकिक होली का साक्षी बनने का निमंत्रण दिया।
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जैसे ही सकल कुंवर गोकुल के निकसे खेलनि फाग निकसे कुंवर खेलन चले रंग होरी हो मोहन नंद के लाल का गायन आरंभ हुआ, समूचा प्रांगण सुर-लय में बंध गया। समाजियों ने नंदलाला और दाऊजी के समक्ष पद गाकर उनसे संग चलकर होली खेलने का आग्रह किया, वहीं नंदीश्वर महादेव को भी अलौकिक होली का साक्षी बनने का निमंत्रण दिया।
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इसके पश्चात गोस्वामीजनों के पूर्वज बाबा आनंदघनजी की चौपाल पर चलौ बरसाने में खेलें होरी गाते हुए श्रीकृष्ण स्वरूप पताका के साथ हुरियारे बरसाना की ओर पैदल प्रस्थान कर गए। ढालें लहराती रहीं, तिलक-रोरी-चंदन से सुसज्जित दल संकेतवट पहुंचा, जहां अष्टछाप कवियों के पदों का भावपूर्ण गायन हुआ। दोपहर होते-होते हंसी-ठिठोली के संग पीली पोखर पहुंचे हुरियारों ने थकान उतारी पीरी पोखर ते थकान मिटाय, जहां घुट रही भांग पियै हुरियारे की पंक्तियां मानो दृश्य बन गईं।
पीली पोखर पर बरसाना के गोपों ने हुरियारों और कृष्ण स्वरूप पताका का भव्य पूजन किया। हुरियारिनों की लाठियों से बचाव को हुरियारों ने पाग बांधी इससे पहले सत्कार और भांग-ठंडाई का दौर चला। प्रिया कुंड पर स्वागत के बाद, ठाकुरजी की ध्वजा सबसे आगे लेकर, श्रृंगार से सजे हुरियारे खबर करियौ रे खबर करियौ रसिया आयौ गाते हुए श्रीजी मंदिर की ओर बढ़े। श्रीजी महल में नंदगांव-बरसाना के गुसाइयों के बीच संयुक्त समाज गायन हुआ। दर्शन उपरांत गलियों में खड़ी हुरियारिनों संग हंसी-ठिठोली और समाज के आदेश पर लठामार का आरंभ ब्रजलीला अपने चरम पर दिखी।
नंदगांव की लठामार होली आज
बरसाना के उल्लास के बाद आज बुधवार को नंदगांव में लठामार होली का आयोजन होगा। प्रतिवर्ष की भांति इस बार भी देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु इस दिव्य लीला के साक्षी बनेंगे। रंगीली गली और लठामार होली चौक से यह अलौकिक परंपरा टीवी चैनलों, समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के माध्यम से विश्व मंच पर दमकेगी। राधा-कृष्ण ध्वज के रूप में लीला के प्रमुख पात्र प्रत्यक्ष रूप से सम्मिलित होंगे, जबकि बरसाने के ग्वाल और नंदगांव की ग्वालिन सहनायक-नायिका की भूमिका निभाएंगे। हुरियारिनों में विशेष उत्साह है। मेहंदी, महावर और श्रृंगार से वे राधाजी सरीखी छटा बिखेरने को तैयार हैं।
बरसाना के उल्लास के बाद आज बुधवार को नंदगांव में लठामार होली का आयोजन होगा। प्रतिवर्ष की भांति इस बार भी देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु इस दिव्य लीला के साक्षी बनेंगे। रंगीली गली और लठामार होली चौक से यह अलौकिक परंपरा टीवी चैनलों, समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के माध्यम से विश्व मंच पर दमकेगी। राधा-कृष्ण ध्वज के रूप में लीला के प्रमुख पात्र प्रत्यक्ष रूप से सम्मिलित होंगे, जबकि बरसाने के ग्वाल और नंदगांव की ग्वालिन सहनायक-नायिका की भूमिका निभाएंगे। हुरियारिनों में विशेष उत्साह है। मेहंदी, महावर और श्रृंगार से वे राधाजी सरीखी छटा बिखेरने को तैयार हैं।
मंगलगीतों से सजा घर-आंगन
पहली बार होली खेलकर लौटे हुरियारों के घरों में देर रात तक मंगलगीत गाए गए। महिलाओं ने नव प्रशिक्षु हुरियारों की मंगलकामना ब्रजराज से की और गीतों में सहभागी महिलाओं को मिठाई व उपहार भेंट किए गए। फागुन की इस रात नंदगांव में रसिया, रसमयता और परंपरा तीनों ने मिलकर ब्रज को फिर अमर कर दिया।
पहली बार होली खेलकर लौटे हुरियारों के घरों में देर रात तक मंगलगीत गाए गए। महिलाओं ने नव प्रशिक्षु हुरियारों की मंगलकामना ब्रजराज से की और गीतों में सहभागी महिलाओं को मिठाई व उपहार भेंट किए गए। फागुन की इस रात नंदगांव में रसिया, रसमयता और परंपरा तीनों ने मिलकर ब्रज को फिर अमर कर दिया।
