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नंगे पांव और अटूट श्रद्धा: पुरुषोत्तम मास में आस्था का अद्भुत संगम, करोड़ों श्रद्धालुओं ने की गिरिराज परिक्रमा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Mon, 15 Jun 2026 12:16 PM IST
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सार
पुरुषोत्तम मास के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं ने गोवर्धन स्थित गिरिराज महाराज की परिक्रमा कर अपनी आस्था प्रकट की। तपती धूप में नंगे पांव परिक्रमा करने वाले भक्तों की सेवा के लिए ब्रजवासियों ने जगह-जगह भंडारे और विश्राम स्थलों की व्यवस्था की।
गिरिराज जी की परिक्रमा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
पुरुषोत्तम मास के 30 दिनों में करोड़ों श्रद्धालुओं ने गिरिराज जी की परिक्रमा लगाई। भक्तों ने तपती धूप और नंगे पांव अपने आराध्य गिरिराज प्रभु की परिक्रमा पूरी की। उनका मानना है कि इससे 84 लाख योनियों से मुक्ति मिलती है और भगवान श्री कृष्ण के चरणों की प्राप्ति होती है।
परिक्रमा मार्ग पर दिन-रात मानव श्रंखला बनी रही। इसमें सौ वर्ष के बुजुर्गों से लेकर एक वर्ष तक के बच्चों ने परिवार के साथ परिक्रमा लगाई। श्रद्धालुओं ने राधे-राधे के जयघोष के साथ भजन-कीर्तन करते हुए अपनी श्रद्धा व्यक्त की। पुलिस प्रशासन ने भी तिराहों और चौराहों पर सुरक्षा व सहायता के लिए पुलिसकर्मियों को तैनात किया। राधाकुंड, गोवर्धन, आन्यौर, पूंछरी और जतीपुरा के स्थानीय लोगों ने जगह-जगह विश्राम स्थल और भंडारे की व्यवस्था की। एक करंट हादसे में दोनों हाथ गंवाने वाले विष्णु की दंडवत परिक्रमा अन्य भक्तों के लिए श्रद्धा का प्रतीक बनी। परिक्रमा मार्ग पर श्रीमद्भागवत कथा के आयोजन हुए और साधु-ब्राह्मणों की सेवा की गई।
सेवा और चुनौतियां साथ-साथ
ब्रजवासियों का सेवा भाव परिक्रमा मार्ग पर विशेष रूप से देखने को मिला। हजारों समाजसेवियों ने नंगे पांव परिक्रमा कर रहे भक्तों की सेवा में योगदान दिया। स्थानीय लोगों ने विश्राम और भोजन की व्यवस्था कर श्रद्धालुओं को राहत पहुंचाई। हालांकि, परिक्रमा मार्ग में ई-रिक्शा के चलने से श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
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परिक्रमा मार्ग पर दिन-रात मानव श्रंखला बनी रही। इसमें सौ वर्ष के बुजुर्गों से लेकर एक वर्ष तक के बच्चों ने परिवार के साथ परिक्रमा लगाई। श्रद्धालुओं ने राधे-राधे के जयघोष के साथ भजन-कीर्तन करते हुए अपनी श्रद्धा व्यक्त की। पुलिस प्रशासन ने भी तिराहों और चौराहों पर सुरक्षा व सहायता के लिए पुलिसकर्मियों को तैनात किया। राधाकुंड, गोवर्धन, आन्यौर, पूंछरी और जतीपुरा के स्थानीय लोगों ने जगह-जगह विश्राम स्थल और भंडारे की व्यवस्था की। एक करंट हादसे में दोनों हाथ गंवाने वाले विष्णु की दंडवत परिक्रमा अन्य भक्तों के लिए श्रद्धा का प्रतीक बनी। परिक्रमा मार्ग पर श्रीमद्भागवत कथा के आयोजन हुए और साधु-ब्राह्मणों की सेवा की गई।
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सेवा और चुनौतियां साथ-साथ
ब्रजवासियों का सेवा भाव परिक्रमा मार्ग पर विशेष रूप से देखने को मिला। हजारों समाजसेवियों ने नंगे पांव परिक्रमा कर रहे भक्तों की सेवा में योगदान दिया। स्थानीय लोगों ने विश्राम और भोजन की व्यवस्था कर श्रद्धालुओं को राहत पहुंचाई। हालांकि, परिक्रमा मार्ग में ई-रिक्शा के चलने से श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।