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UP: प्यासे गांव की दर्दनाक कहानी, पशु भी नहीं पीते यहां का पानी; लोग एक-एक बूंद के लिए करते हैं संघर्ष

संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: Dhirendra Singh Updated Mon, 15 Jun 2026 12:45 PM IST
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सार

मथुरा के फरह क्षेत्र के पौरी और शहजादपुर गांवों में भूजल खारा होने के कारण ग्रामीणों को पीने के लिए मीठा पानी नहीं मिल रहा है। महिलाएं और बच्चे रोजाना एक से दो किलोमीटर दूर जाकर पानी लाने को मजबूर हैं, जबकि सरकारी योजनाओं के दावे यहां धरातल पर नजर नहीं आते।

Villagers Walk Kilometres for Drinking Water as Salty Groundwater Worsens Crisis
सूख चुका है कुआं - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

दो बूंद मीठे पानी की कीमत क्या होती है, यह फरह क्षेत्र के गांव पौरी और शहजादपुर में आकर देखिए। यहां के ग्रामीण वर्षों से मीठे पानी के लिए तरस रहे हैं। धरती की कोख से निकलने वाला पानी खारा होने से पीना तो दूर नहाने से भी ग्रामीण परहेज करते हैं। पशु भी इस पानी को पीने से कतराते हैं।


ग्रामीणों का कहना कि गांव की महिलाओं और बच्चों की दिनचर्या सुबह होते ही पानी की जुगाड़ से शुरू होती है। मीठे पानी की आस में ग्रामीण सुबह और शाम को एक से दो किलोमीटर दूर गांव के बाहर लगे सरकारी व निजी नलों पर जाते हैं। वहां से पानी भर कर सिर पर बाल्टी और हाथों में डिब्बे थाम कर घर लौटते हैं। हैरानी की बात यह है कि हर घर जल और जल जीवन मिशन जैसी योजनाएं इन गांव में सिस्टम के दावे का दम तोड़ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी के दिनों में पानी का इंतजाम करने में परेशानी उठानी पड़ती है।
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Villagers Walk Kilometres for Drinking Water as Salty Groundwater Worsens Crisis
तीन माह से रुका है टंकी का निर्माण - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
तीन माह से रुका है टंकी का निर्माण
पौरी गांव में जल जीवन मिशन के तहत निर्माणाधीन टंकी का कार्य बीते तीन माह से रुका पड़ा है। ग्रामीणों का कहना कि दो साल से गांव में टंकी का निर्माण हो रहा है लेकिन आज तक पूरा नहीं हो सका है। लोगों को उम्मीद है कि टंकी बनने के बाद उन्हें मीठा पानी मिल सकेगा।
 

खारा पानी पीने से ये होती हैं बीमारियां
सीएमएस नीरज अग्रवाल का कहना है कि खारे पानी का सेवन करने से पेट और पाचन तंत्र खराब, ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियां जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। दांत और हड्डियों भी कमजोर होती हैं। खारे पानी का सेवन करने से बच्चों और बुजुर्गों पर ज्यादा असर पड़ता है।

 
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ये बोले ग्रामीण
ग्रामीण राजेंद्र ने बताया कि जनप्रतिनिधियों को अपना दर्द सुनाने के बाद भी आज तक समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। नेताओं के वादे और अधिकारियों के आश्वासन सिर्फ चुनाव तक सीमित रहते हैं। वहीं ग्रामीण नरेश का कहना है कि सबसे ज्यादा तकलीफ हमारे बेजुबान पशुओं को होती है। खारेपन के कारण मवेशी भी इस पानी को पीने से कतराते हैं। पशुओं को पोखर और नहर में पानी पिलाने के लिए ले जाना पड़ता है।

 

विधायक ने ये कहा
बलदेव विस क्षेत्र के विधायक पूरन प्रकाश ने बताया कि विधानसभा क्षेत्र में हर घर जल के लिए गंगाजल की लाइन डाली जा रही है। कुछ गांव में कार्य पूरा हो गया, जबकि कुछ का कार्य चल रहा है। पौरी और शहजादपुर में भी तेजी से कार्य चल रहा है। जल जीवन मिशन के तहत टंकी का निर्माण कराया जा रहा है। बजट की अन्य किश्त जारी नहीं होने से फिलहाल टंकी का निर्माण रुका हुआ है। इस साल के अंत तक दोनों गांवों में मीठे पानी की व्यवस्था हो जाएगी।
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