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UP: संत प्रेमानंद से मिलने की ऐसी इच्छा, नेपाल से वृंदावन पहुंच गए नाबालिग भाई-बहन; फुटपाथ पर गुजारी रात
Mon, 27 Jul 2026 11:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 27 Jul 2026 11:13 AM IST
सार
संत प्रेमानंद के ऑनलाइन प्रवचनों से प्रभावित होकर नेपाल के दो नाबालिग भाई-बहन स्कूल जाने का बहाना बनाकर अकेले वृंदावन पहुंच गए। लोगों की सूचना पर पुलिस ने दोनों को सुरक्षित बाल कल्याण समिति के सुपुर्द कर उनके परिजनों से संपर्क किया।
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संत प्रेमानंद महाराज।
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विस्तार
संत प्रेमानंद के ऑनलाइन प्रवचन से प्रभावित होकर नेपाल से दो नाबालिग स्कूल जाने के बहाने वृंदावन आ गए। आश्रम में भोजन और फुटपाथ पर रात काट रहे बहन-भाई को लोगों ने देखा तो पुलिस को बुलाकर उन्हें सौंप दिया। पुलिस ने बच्चों के पिता से फोन पर संपर्क कर उन्हें बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के सुपुर्द कर दिया है।
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नेपाल के जिला रुपनदेई निवासी 13 वर्षीय भाई कक्षा छह और सात वर्षीय बहन एलकेजी में पढ़ती हैं। दोनों ने वृंदावन में संत प्रेमानंद से मिलने की योजना बनाई और 24 जुलाई की सुबह स्कूली बैग में कपड़े रखकर दोनों घर से स्कूल जाने के लिए निकल आए। बच्चों ने नेपाल सीमा पार कर उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले के नौतनवा स्टेशन से 35 रुपये में गोरखपुर के लिए रेल की टिकट ली।
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गोरखपुर से दोनों बच्चे रेल से मथुरा पहुंचे और यहां रेलवे स्टेशन से ई रिक्शा के जरिए शनिवार देर शाम वृंदावन आ गए। बच्चों ने पुलिस को बताया कि वह रात में परिक्रमा मार्ग में घूमे और लोगों से संत प्रेमानंद का आश्रम पूछा। यहां परिक्रमा मार्ग में एक आश्रम में बंट रहा भोजन खाया और फुटपाथ पर रात काटी। सुबह संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन के लिए निकले तभी लोगों की नजर उन पर पड़ गई।
अटल्ला चुंगी चौराहा पर उनसे पूछताछ की तो बच्चों की बात सुनकर लोग हैरान रह गए। बच्चों ने बताया कि वह संत प्रेमानंद को अपने पिता के मोबाइल फोन पर सुनते थे। उनके प्रवचन अच्छे लगे तो उन्हें देखने के लिए सौ रुपये लेकर घर से स्कूल जाने के बहाने वृंदावन आ गए लेकिन यहां उन्हें संत प्रेमानंद के दर्शन नहीं हो सके। लोगों की सूचना पर पहुंची पुलिस दोनों बच्चों को कोतवाली ले आयी।
पुलिस ने जांच की तो पता चला कि दोनों बच्चों के स्कूल बैग में किताब-कॉपी के साथ ड्रेस भी रखी थी। इस दौरान उन्होंने रेलवे स्टेशन पर कपड़े बदल लिए थे। बच्चों ने बताया कि उनकी बुआ दिल्ली में रहती हैं और पिता किसान है। सर्किल अधिकारी सदर वरुण मिश्रा ने बताया कि दोनों बच्चों के पिता से फोन पर बात हो गई है। फिलहाल उन्हें बाल कल्याण समिति को सौंप दिया है। परिजन के आने पर समिति के निर्देशानुसार बच्चों को उनके सुपुर्द किया जाएगा।