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अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक दिवस 2026: संघर्ष से सफलता तक की कहानी, बिना कोच और संसाधनों के ये खिलाड़ी कर रहे कमाल
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Tue, 23 Jun 2026 02:07 PM IST
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सार
मथुरा के जिला स्टेडियम में कई खेलों के नियमित कोच नहीं हैं, फिर भी खिलाड़ी निजी प्रशिक्षण और अपने दम पर राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत रहे हैं। खिलाड़ियों ने खेल विभाग से कोचों की नियुक्ति और संसाधन बढ़ाने की मांग की है।
अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक दिवस
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन संसाधनों और प्रशिक्षकों के अभाव में जिले के खिलाड़ी संघर्ष के बीच अपने सपनों को आकार दे रहे हैं। जिला खेल विभाग के स्टेडियम में तैराकी, बैडमिंटन, ताइक्वांडो, तीरंदाजी, वेटलिफ्टिंग, टेनिस और टेबल टेनिस जैसे प्रमुख खेलों के नियमित कोच उपलब्ध नहीं हैं। इसके बावजूद खिलाड़ी निजी अकादमियों और अपने स्तर पर अभ्यास कर राज्य व राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में जिले के लिए पदक और ट्रॉफियां जीत रहे हैं।
खिलाड़ियों और अभिभावकों का कहना है कि स्टेडियम में खेल सुविधाओं का विस्तार तो हुआ है, लेकिन प्रशिक्षकों की कमी के कारण प्रतिभाओं को अपेक्षित मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा। कई खिलाड़ी बेहतर प्रशिक्षण के लिए निजी अकादमियों का रुख करने को मजबूर हैं, जहां उन्हें अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी उठाना पड़ता है। जिले के कई खिलाड़ियों ने निजी प्रशिक्षण के दम पर विभिन्न प्रतियोगिताओं में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इसके बावजूद खेल प्रेमियों का मानना है कि यदि स्टेडियम में विशेषज्ञ कोचों की नियुक्ति हो जाए तो जिले से और अधिक खिलाड़ी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
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शुरुआती स्तर पर सही प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन किसी भी खिलाड़ी के करियर की नींव होता है। कोचों की कमी के कारण नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। खिलाड़ियों ने खेल विभाग से रिक्त पदों पर जल्द नियुक्तियां कर खेल सुविधाओं को मजबूत करने की मांग की है, ताकि जिले की उभरती प्रतिभाओं को बेहतर अवसर मिल सकें और वे प्रदेश व देश के लिए अधिक पदक जीत सकें। जिला क्रीड़ा अधिकारी आजाद सिंह ने बताया कि स्टेडियम में कोच बढ़ाने के लिए मुख्यालय को पत्र भेजा गया है। जल्द ही कोच तैनात कर दिए जाएंगे।
पंचक सिलेट खिलाड़ी अदिति गौड ने बताया कि स्टेडियम में पंचक सिलेट का कोच न होने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है। प्राइवेट कोच से कोचिंग लेने के बाद ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी में कांस्य पदक जीतने में सफलता प्राप्त की।
कुराश खिलाड़ी राधा का कहना है कि स्टेडियम और स्कूल में भी कुराश के कोच नहीं है। परिवार की मदद से निजी कोच से कोचिंग लेने के बाद राष्ट्रीय विद्यालय कुराश प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता है।
तीरदांजी खिलाड़ी अरविंद चौधरी ने बताया कि तीरदांजी के कोच स्टेडियम में नहीं है। इस कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है, लेकिन निजी कोच से सीखने के बाद खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी खेलों में कांस्य एवं राष्ट्रीय जूनियर प्रतियोगिता में स्वर्ण जीतकर जिले का नाम रोशन किया है।
बॉक्सिंग खिलाड़ी रिषभ गौतम ने कहा कि स्टेडियम में बॉक्सिंग के कोच हैं। अभ्यास भी अच्छा होता है, लेकिन संसाधनों का अभाव है। अभाव में भी तीन साल में 4 स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर जिले का नाम रोशन किया है।