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Mathura News: एसडीएम ने दिव्यांग दंपती के तीनों बच्चों को लिया गोद

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 13 Aug 2026 01:28 AM IST
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SDM adopts all three children of a differently-abled couple
कोसीकलां। फीस जमा न होने के कारण पढ़ाई छूटने के बाद भोलेनाथ के भरोसे कांवड़ लेकर हरिद्वार निकले दिव्यांग दंपती के चार बच्चों की पुकार आखिरकार प्रशासन तक पहुंच गई। जिलाधिकारी चंद्रप्रकाश सिंह ने एसडीएम अखिलेश कुमार को बच्चों को व्यक्तिगत रूप से गोद लेने की जिम्मेदारी दी है। साथ ही जिलाधिकारी बुधवार को दिव्यांग पिता और उनके बच्चों को अपने कार्यालय बुलाया। उन्हें शैक्षणिक सामग्री सौंपी।
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अमर उजाला ने 11 अगस्त के अंक में ‘दिव्यांग दंपती के बच्चों की पढ़ाई अब भोले के भरोसे’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इस खबर के बाद प्रशासनिक टीम हरकत में आ गई। जिलाधिकारी चंद्रप्रकाश सिंह ने खबर को संज्ञान लेते हुए एसडीएम अखिलेश कुमार, एबीएसए बुद्धसेन सिंह की एक संयुक्त टीम को बुधवार को दंपती के घर बैंक कालोनी स्थित घर भेजा और परिवार की स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद डीएम ने बच्चों और उनके पिता को अपने कार्यालय में बुलाया।
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यहां भरत ने बताया कि उनके चार बच्चे हैं। बड़ी बेटी सरकारी कॉलेज में पढ़ती है, जहां कोई फीस नहीं लगती। शेष तीन बच्चे एक निजी स्कूल में पढ़ते थे। इनमें से एक बच्चे की फीस विद्यालय प्रबंधन ने पहले ही माफ कर रखी थी। प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद अन्य दो बच्चों की फीस भी माफ करा दी गई। इसके बाद जिला प्रशासन की ओर से बच्चों को 2-2 स्कूल ड्रेस, एक बैग, किताबों का सेट, पेंसिल बॉक्स, लंच बॉक्स, जूते, मोजे समेत अन्य शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराई।
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जिलाधिकारी ने बताया कि भरत सिंह परचून की दुकान चलाते हैं। उनकी पत्नी सुनीता कपड़ों की सिलाई का काम करती हैं। दोनों दिव्यांग हैं। सरकार द्वारा दोनों लोगों को दिव्यांग पेंशन योजना से लाभांवित किया जा रहा है। भरत सिंह का मकान प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत स्वीकृत हो चुका है। उधर परिवार की स्थिति को देखते हुए एसडीएम ने बच्चों को व्यक्तिगत रूप से गोद लेने की जिम्मेदारी ली है। एसडीएम बच्चों की पढ़ाई और अन्य आवश्यकताओं की निगरानी करेंगे। साथ ही भविष्य में भी जरूरत के अनुसार सहयोग करेंगे।
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