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Mathura News: सेवाधिकारी ने दिखाई समझदारी, परंपरा भी निभाई
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वृंदावन। अक्षय तृतीया पर श्रद्धालु ठाकुरजी के चरण-सर्वांग दर्शन के लिए उतावले रहते हैं। ऐसे में मंदिर हाईपावर्ड कमेटी ने श्रद्धालुओं को सुलभ दर्शन के लिए ठाकुरजी को जगमोहन में विराजमान कराने के लिए आग्रह किया लेकिन सेवायतों ने परंपराओं को हवाला दिया। पुलिस अधिकारियों और सेवाधिकारी के बीच मंथन का दौर चला। सेवाधिकारी ने अपनी सूझबूझ का परिचय दिया। एक तरफ उन्होंने पंरपरा का निवर्हन किया तो दूसरी ओर अधिकारियों की मंशा की भी लाज रखी। नतीजा यह हुआ कि मंदिर के हर कोने से ठाकुरजी के सुलभ दर्शन हुए।
सीओ सदर पीपी सिंह ने सेवायतों को समझाया कि कमेटी केवल श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन कराना चाहती है। इसलिए विशेष मौके पर ठाकुरजी को जगमोहन में विराजने के लिए आग्रह करती है। इस पर सेवाधिकारी ने उन्हें भरोसा दिया कि वह ऐसे दर्शन कराएंगे कि किसी को परेशानी नहीं होगी। हुआ भी यही, मंदिर के पट खुले तो सभी ने देखा ठाकुरजी गर्भगृह में विराजमान थे लेकिन रोजाना की बजाए निर्धारित जगह से आगे की थे। ऐसे में भक्तों को मंदिर के हर कोने से ठाकुरजी के दर्शन हो रहे थे। सेवाधिकारी ने छोटे सिंहासन को तैयार कराकर गर्भगृह की दहलीज से कुछ दूरी पर ठाकुर जी को विराजमान कराया। इस पर गर्भगृह में विराजने की पंरपरा भी नहीं टूटी और कमेटी की मंशा की लाज रख ली गई। वहीं शयनभोग के सेवाधिकारी ने भी सभी परंपराओं को पालन किया है।
राजभोग सेवाधिकारी के इस फैसले को सभी ने सराहा है। सेवायत रजत गोस्वामी का कहना है कि पहली बार ऐसा हो रहा है जब अधिकारियों और सेवायतों ने मिलकर काम किया है। इसमें सीओ सदर पीपी सिंह की भूमिका सराहनीय है। हिंमाशु गोस्वामी का कहना है कि मंदिर की व्यवस्था पर सहमति बनना अच्छी बात है। जगमोहन में ठाकुरजी को विराजमान कराने के लिए कहना परंपराओं को तोड़ने का काम था, सेवाधिकारी ने बीच का रास्ता निकाला, यह अच्छी बात है।
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सीओ सदर पीपी सिंह ने सेवायतों को समझाया कि कमेटी केवल श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन कराना चाहती है। इसलिए विशेष मौके पर ठाकुरजी को जगमोहन में विराजने के लिए आग्रह करती है। इस पर सेवाधिकारी ने उन्हें भरोसा दिया कि वह ऐसे दर्शन कराएंगे कि किसी को परेशानी नहीं होगी। हुआ भी यही, मंदिर के पट खुले तो सभी ने देखा ठाकुरजी गर्भगृह में विराजमान थे लेकिन रोजाना की बजाए निर्धारित जगह से आगे की थे। ऐसे में भक्तों को मंदिर के हर कोने से ठाकुरजी के दर्शन हो रहे थे। सेवाधिकारी ने छोटे सिंहासन को तैयार कराकर गर्भगृह की दहलीज से कुछ दूरी पर ठाकुर जी को विराजमान कराया। इस पर गर्भगृह में विराजने की पंरपरा भी नहीं टूटी और कमेटी की मंशा की लाज रख ली गई। वहीं शयनभोग के सेवाधिकारी ने भी सभी परंपराओं को पालन किया है।
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राजभोग सेवाधिकारी के इस फैसले को सभी ने सराहा है। सेवायत रजत गोस्वामी का कहना है कि पहली बार ऐसा हो रहा है जब अधिकारियों और सेवायतों ने मिलकर काम किया है। इसमें सीओ सदर पीपी सिंह की भूमिका सराहनीय है। हिंमाशु गोस्वामी का कहना है कि मंदिर की व्यवस्था पर सहमति बनना अच्छी बात है। जगमोहन में ठाकुरजी को विराजमान कराने के लिए कहना परंपराओं को तोड़ने का काम था, सेवाधिकारी ने बीच का रास्ता निकाला, यह अच्छी बात है।

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