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Mau News: घोसी चीनी मिल में पेराई बंद, अब सठियांव में पांच हजार किसानों के तीन लाख क्विंटल गन्ने की होगी पेराई

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 25 Feb 2026 12:06 AM IST
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Crushing stopped at Ghosi Sugar Mill, now 3 lakh quintals of sugarcane belonging to 5000 farmers will be crushed in Sathiyawan.
घोसी चीनी मिल ।फाइल फोटो
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48 घंटे से चीनी मिल को लेकर चल रहे संशय पर विराम लग गया। मंगलवार की दोपहर एक बजे मिल में इस सत्र पेराई के बंद होने के बाद इसे सठियांव मिल का तौल केंद्र बना दिया गया। अब पांच हजार किसानों के तीन लाख से अधिक क्विंटल गन्ने का तौल यहां होगा लेकिन पेराई सठियांव मिल में होगी।
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मंगलवार को सठियांव मिल में पांच सदस्यीय टीम की निगरानी में पांच किसानों का गन्ना तौला गया। इससे पहले सोमवार को श्रेय लेने के होड़ में सोशल मीडिया पर जन प्रतिनिधियों ने मिल को चालू रखने का खूब दावा किया था, लेकिन मंगलवार को पेराई सत्र के 14 दिन पहले मिल आखिरकार बंद हो गई।
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चीनी मिल के मुख्य गन्ना अधिकारी अजय यादव ने बताया कि चीनी मिल को मंगलवार को शासन के निर्देश पर दोपहर एक बजे बंद कर दिया गया, साथ ही इस केंद्र को तौल केंद्र बना दिया गया।
अब यहां बचे पांच हजार किसानों के करीब तीन लाख क्विंटल से गन्ने का तौल कर उसे सठियांव मिल पर भेजा जाएगा। बताया कि मंगलवार को पांच किसानों का तौल सठियांंव से आई टीम के समक्ष किया गया।
बताया कि किसानों पर भाड़े की किसी तरह की कटौती नहीं होगी। बताया कि मंगलवार तक 11 हजार किसानों से 12 लाख 81 हजार 416 क्विंटल गन्ना खरीद गया था। इसमें 21 दिसंबर 2025 तक 8 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है, पांच करोड़ का भुगतान की अंतिम प्रक्रिया में है।
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सोशल मीडिया पर वाहवाही, सुबह किसानों को मिला छलावा

चीनी मिल के इस सत्र में पेराई बंद कर इसे सठियांव मिल पर भेजने को लेकर आदेश के बाद बीते रविवार से जनप्रतिनिधि और किसानों इसको लेकर विरोध कर रहे थे। रविवार को तो चीनी मिल पर गन्ना मंत्री का पुतला दहन भी किसानों ने किया। उधर, किसानों के विरोध प्रदर्शन के बाद प्रभारी एसडीएम राजेश अग्रवाल और तत्कालीन जीएम महेंद्र प्रताप ने लिखित आश्वासन दिया था कि चीनी मिल बंद नहीं होगी। चीनी मिल बंद न होने के श्रेय को लेकर कई जन प्रतिनिधियों द्वारा सोशल मीडिया पर खूब वाहवाही बटोरी गई। उधर, रात में जीएम के तबादले के साथ ही इस मामले में मंगलवार को आखिरकार शासन के आदेश पर मिल को बंद कर इसे तौल केंद्र में तब्दील कर हर उम्मीद की अटकलों पर विराम लगा दिया गया।

जीएम ने पहले ही पेराई बंद कराने की योजना तैयार की थी

चीनी मिल के उप सभापति रजनीश राय ने आरोप लगाया कि मिल को तौल केंद्र में तब्दील करने की योजना जीएम महेंद्र प्रताप ने पहले ही बना ली थी। बीते 17 फरवरी को शासन को लिखे पत्र में जीएम ने मिल चलाने में असमर्थता जताते हुए तीन लाख क्विंटल से अधिक गन्ना को सठियांव मिल भेजने का प्रस्ताव दिया था। घोसी चीनी मिल 1982 का शुभारंभ स्वर्गीय कल्पनाथ राय द्वारा किया गया था। 1984 में इसका संचालन शुरू किया था, उस समय 1250 हजार क्विंटल गन्ना पेराई की क्षमता थी जिसे बाद में 2500 हजार कर दिया गया। सठियांव मिल की क्षमता प्रतिदिन 3500 क्विंटल हैं। सूत्रों की माने तो सठियांव मिल में 16 केंद्रों पर गन्ना खत्म हो चुका था जबकि दस केंद्रों पर करीब यही स्थिति थी। मिल प्रबन्धन के पास दस दिन का गन्ना बचा हुआ था।

किसानों के धरने को विपक्ष की बताया साजिश
तहसील मुख्यालय पर भाजपा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष लालचंद चौहान ने बुधवार को एक प्रेस वार्ता कर किसान सहकारी चीनी मिल घोसी में चल रहे किसानों के धरने को विपक्ष की साजिश बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार और उसके केबिनेट मंत्री एके शर्मा को बदनाम करने के उद्देश्य से किसानों को गुमराह कर धरना-प्रदर्शन कराया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि चीनी मिल के संचालन में जो भी व्यावहारिक कठिनाइयां रही हैं, उन्हें सरकार ने गंभीरता से लिया है और समाधान की दिशा में निरंतर प्रयास हो रहे हैं।
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