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Mau News: जन्मतिथि में हेराफेरी कर परीक्षा पास की, महिला को दो साल की सजा
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मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉक्टर कृष्ण प्रताप सिंह ने जन्मतिथि में हेराफेरी कर परीक्षा उत्तीर्ण करने के मामले में प्रीति गुप्ता को सुनवाई के बाद दोषी पाया। उसे 2 वर्ष की सजा के साथ ही कुल 8 हजार रुपये अर्थदंड लगाया।
अर्थदंड न देने पर दो महीने अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। मामले की एफआईआर प्रीति गुप्ता के पति अमित कुमार जायसवाल ने दर्ज कराया था। मामला कोतवाली घोसी क्षेत्र का है।
अभियोजन के अनुसार बलिया जनपद के गड़वार थाना क्षेत्र के रतसड़ गांव निवासी अमित कुमार जायसवाल पुत्र धनेश्वर नाथ की तहरीर और कोर्ट के आदेश के पर एफआईआर दर्ज हुई।
इसमें कोतवाली घोसी क्षेत्र के कस्बा खास बडी बाजार निवासी प्रीति गुप्ता को नामजद किया गया। वादी का कथन है कि आरोपी उसकी पत्नी है। प्रीति गुप्ता वर्ष 1997 में हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की जिसमें उसकी जन्मतिथि 1 जुलाई 1982 थी।
सरकारी योजनाओं में लाभ लेने के उद्देश्य से कूट रचित प्रपत्र तैयार कर अपनी जन्मतिथि में हेराफेरी कर 2007 में हाई स्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की जिसमें उसकी जन्मतिथि 3 अगस्त 1993 अंकित है। पुलिस ने मामले की विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया।
न्यायालय में अभियोजन की ओर से पहले करते हुए अभियोजन अधिकारी ने कुल चार गवाहों को पेश कर अभियोजन का पक्ष रखा। बचाव पक्ष से कहा गया कि उसे झूठा फंसाया गया है।
सीजेएम ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद प्रीति गुप्ता को धारा 419 व 420 भादवि के तहत दोषी पाया। दोषी पाए जाने के बाद उसे धारा 419 भादवि में एक वर्ष की सजा के साथ ही तीन हजार रुपये अर्थदंड लगाया।
वहीं धारा 420 भादवि के तहत 2 वर्ष की सजा के साथ ही 5 हजार रुपए अर्थदंड लगाया। अर्थदंड न देने पर दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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अर्थदंड न देने पर दो महीने अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। मामले की एफआईआर प्रीति गुप्ता के पति अमित कुमार जायसवाल ने दर्ज कराया था। मामला कोतवाली घोसी क्षेत्र का है।
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अभियोजन के अनुसार बलिया जनपद के गड़वार थाना क्षेत्र के रतसड़ गांव निवासी अमित कुमार जायसवाल पुत्र धनेश्वर नाथ की तहरीर और कोर्ट के आदेश के पर एफआईआर दर्ज हुई।
इसमें कोतवाली घोसी क्षेत्र के कस्बा खास बडी बाजार निवासी प्रीति गुप्ता को नामजद किया गया। वादी का कथन है कि आरोपी उसकी पत्नी है। प्रीति गुप्ता वर्ष 1997 में हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की जिसमें उसकी जन्मतिथि 1 जुलाई 1982 थी।
सरकारी योजनाओं में लाभ लेने के उद्देश्य से कूट रचित प्रपत्र तैयार कर अपनी जन्मतिथि में हेराफेरी कर 2007 में हाई स्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की जिसमें उसकी जन्मतिथि 3 अगस्त 1993 अंकित है। पुलिस ने मामले की विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया।
न्यायालय में अभियोजन की ओर से पहले करते हुए अभियोजन अधिकारी ने कुल चार गवाहों को पेश कर अभियोजन का पक्ष रखा। बचाव पक्ष से कहा गया कि उसे झूठा फंसाया गया है।
सीजेएम ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद प्रीति गुप्ता को धारा 419 व 420 भादवि के तहत दोषी पाया। दोषी पाए जाने के बाद उसे धारा 419 भादवि में एक वर्ष की सजा के साथ ही तीन हजार रुपये अर्थदंड लगाया।
वहीं धारा 420 भादवि के तहत 2 वर्ष की सजा के साथ ही 5 हजार रुपए अर्थदंड लगाया। अर्थदंड न देने पर दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
