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Mau News: डिलीवरी एजेंट बनकर यूएसएसडी कोड डायल कराकर कर रहे फोन हैक
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जिले में कोरियर डिलीवरी के नाम पर साइबर ठगों ने ठगी का एक नया और बेहद खतरनाक तरीका अपनाया है। कोरियर एजेंट बनकर साइबर ठग गलत पता होने की बात कहकर पार्सल अटकने या पते में सुधार के नाम पर एक विशेष कोड डायल करने के लिए कहते हैं।
जैसे ही व्यक्ति उनके बताए कोड को डायल करता है, उसका मोबाइल नंबर ठगों के नियंत्रण में चला जाता है और बैंक खाते से लेकर व्हाट्सएप तक हैक हो सकता है।
जिले में इस तरह के अब तक चार से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। इनमें एक सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी भी साइबर ठगों के झांसे में आ चुके हैं।
साइबर थाना प्रभारी शैलेष सिंह ने बताया कि यह ठगी यूएसएसडी कॉल फॉरवर्डिंग स्कैम के जरिए की जा रही है। गत दिनों एक मामला सामने आया, जिसमें कानपुर निवासी एक सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी ने शिकायत दर्ज कराई।
उनके नंबर पर फोन कर खुद को कोरियर एजेंट बताने वाले व्यक्ति ने पता गलत होने और पार्सल अटकने की बात कही। इसके बाद सुधार के नाम पर एक विशेष कोड डायल करने को कहा गया।
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जैसे ही उन्होंने वह कोड डायल किया, उनका मोबाइल नंबर ठगों के नियंत्रण में चला गया और बैंक खाते से लेकर व्हाट्सएप तक हैक हो गया। इसके बाद उनकी डीपी लगाकर संपर्क सूची में शामिल लोगों से रुपये की मांग की गई। घटना के समय पीड़ित अपनी बेटी के घर जिले में आए हुए थे।
प्रधान आरक्षक शैलेंद्र कनौजिया ने बताया कि यह ठगी यूएसएसडीकॉल फॉरवर्डिंग स्कैम के जरिए की जा रही है। इसमें ठग पीड़ित को 21, 61 या 67 जैसे कोड डायल करने के लिए कहते हैं।
इन कोड को डायल करते ही मोबाइल की कॉल फॉरवर्डिंग सक्रिय हो सकती है। इसके बाद पीड़ित के मोबाइल पर आने वाली कॉल ठगों तक पहुंच सकती हैं। इसको लेकर नेशनल साइबर क्राइम थ्रेट एनालिटिक्स यूनिट की ओर से भी चेतावनी जारी की जा चुकी है। संवाद
ऐसे समझें क्या है यूएसएसडी कोड
एसपी कमलेश बहादुर ने बताया कि यूएसएसडी एक विशेष तकनीक है, जिसमें * (स्टार) और # (हैश) के साथ कुछ नंबरों का इस्तेमाल किया जाता है। इसका प्रयोग आमतौर पर बिना इंटरनेट के बैलेंस जांचने या मोबाइल सेवाओं को प्रबंधित करने के लिए किया जाता है। ठग अब इसी तकनीक का दुरुपयोग कर रहे हैं। वे खुद को किसी कूरियर कंपनी या डिलीवरी एजेंट बताकर लोगों को कॉल करते हैं। इसके बाद डिलीवरी पुष्टि करने या समय बदलने के नाम पर एक कोड डायल कराने की कोशिश करते हैं। बताया कि कुछ मामलों में 21 या 401 से शुरू होने वाले कॉल फॉरवर्डिंग कोड का इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे कोड डायल करने से कॉल फॉरवर्डिंग सक्रिय हो सकती है और कॉल दूसरी जगह जा सकती हैं।
इस तरह करें बचाव
एसपी कमलेश बहादुर ने बताया कि यदि कोई अनजान व्यक्ति या कथित डिलीवरी एजेंट 21, 61 या 67 से शुरू होने वाला कोई कोड डायल करने के लिए कहे तो ऐसा न करें। यदि कॉल फॉरवर्डिंग का संदेह हो तो फोन से ##002# डायल कर कॉल फॉरवर्डिंग की स्थिति जांची और निष्क्रिय की जा सकती है। डिलीवरी की जानकारी के लिए केवल आधिकारिक वेबसाइट या ग्राहक सेवा का उपयोग करें। इसके बाद भी यदि कोई घटना होती है तो तुरंत 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
केस एक : सरायलंखसी थाना क्षेत्र के परदहा मिल निवासी युवक ने बताया कि रविवार को उनके फोन पर कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को कोरियर डिलीवरी एजेंट बताया। पता गलत होने की बात कहकर कोड डायल कराया गया। इसके बाद फोन डायवर्ट होने और संपर्क में जुड़े लोगों से रुपये मांगने के संदेश भेजे जाने की बात सामने आई।
केस दो : मधुबन थाना क्षेत्र के एक निवासी ने दो दिन पहले साइबर थाने में शिकायत की थी। उन्होंने इसी तरह यूएसएसडी कोड डायल कराने के बाद फोन हैक और कॉल डायवर्ट होने की बात बताई।
जैसे ही व्यक्ति उनके बताए कोड को डायल करता है, उसका मोबाइल नंबर ठगों के नियंत्रण में चला जाता है और बैंक खाते से लेकर व्हाट्सएप तक हैक हो सकता है।
जिले में इस तरह के अब तक चार से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। इनमें एक सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी भी साइबर ठगों के झांसे में आ चुके हैं।
साइबर थाना प्रभारी शैलेष सिंह ने बताया कि यह ठगी यूएसएसडी कॉल फॉरवर्डिंग स्कैम के जरिए की जा रही है। गत दिनों एक मामला सामने आया, जिसमें कानपुर निवासी एक सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी ने शिकायत दर्ज कराई।
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उनके नंबर पर फोन कर खुद को कोरियर एजेंट बताने वाले व्यक्ति ने पता गलत होने और पार्सल अटकने की बात कही। इसके बाद सुधार के नाम पर एक विशेष कोड डायल करने को कहा गया।
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जैसे ही उन्होंने वह कोड डायल किया, उनका मोबाइल नंबर ठगों के नियंत्रण में चला गया और बैंक खाते से लेकर व्हाट्सएप तक हैक हो गया। इसके बाद उनकी डीपी लगाकर संपर्क सूची में शामिल लोगों से रुपये की मांग की गई। घटना के समय पीड़ित अपनी बेटी के घर जिले में आए हुए थे।
प्रधान आरक्षक शैलेंद्र कनौजिया ने बताया कि यह ठगी यूएसएसडीकॉल फॉरवर्डिंग स्कैम के जरिए की जा रही है। इसमें ठग पीड़ित को 21, 61 या 67 जैसे कोड डायल करने के लिए कहते हैं।
इन कोड को डायल करते ही मोबाइल की कॉल फॉरवर्डिंग सक्रिय हो सकती है। इसके बाद पीड़ित के मोबाइल पर आने वाली कॉल ठगों तक पहुंच सकती हैं। इसको लेकर नेशनल साइबर क्राइम थ्रेट एनालिटिक्स यूनिट की ओर से भी चेतावनी जारी की जा चुकी है। संवाद
ऐसे समझें क्या है यूएसएसडी कोड
एसपी कमलेश बहादुर ने बताया कि यूएसएसडी एक विशेष तकनीक है, जिसमें * (स्टार) और # (हैश) के साथ कुछ नंबरों का इस्तेमाल किया जाता है। इसका प्रयोग आमतौर पर बिना इंटरनेट के बैलेंस जांचने या मोबाइल सेवाओं को प्रबंधित करने के लिए किया जाता है। ठग अब इसी तकनीक का दुरुपयोग कर रहे हैं। वे खुद को किसी कूरियर कंपनी या डिलीवरी एजेंट बताकर लोगों को कॉल करते हैं। इसके बाद डिलीवरी पुष्टि करने या समय बदलने के नाम पर एक कोड डायल कराने की कोशिश करते हैं। बताया कि कुछ मामलों में 21 या 401 से शुरू होने वाले कॉल फॉरवर्डिंग कोड का इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे कोड डायल करने से कॉल फॉरवर्डिंग सक्रिय हो सकती है और कॉल दूसरी जगह जा सकती हैं।
इस तरह करें बचाव
एसपी कमलेश बहादुर ने बताया कि यदि कोई अनजान व्यक्ति या कथित डिलीवरी एजेंट 21, 61 या 67 से शुरू होने वाला कोई कोड डायल करने के लिए कहे तो ऐसा न करें। यदि कॉल फॉरवर्डिंग का संदेह हो तो फोन से ##002# डायल कर कॉल फॉरवर्डिंग की स्थिति जांची और निष्क्रिय की जा सकती है। डिलीवरी की जानकारी के लिए केवल आधिकारिक वेबसाइट या ग्राहक सेवा का उपयोग करें। इसके बाद भी यदि कोई घटना होती है तो तुरंत 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
केस एक : सरायलंखसी थाना क्षेत्र के परदहा मिल निवासी युवक ने बताया कि रविवार को उनके फोन पर कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को कोरियर डिलीवरी एजेंट बताया। पता गलत होने की बात कहकर कोड डायल कराया गया। इसके बाद फोन डायवर्ट होने और संपर्क में जुड़े लोगों से रुपये मांगने के संदेश भेजे जाने की बात सामने आई।
केस दो : मधुबन थाना क्षेत्र के एक निवासी ने दो दिन पहले साइबर थाने में शिकायत की थी। उन्होंने इसी तरह यूएसएसडी कोड डायल कराने के बाद फोन हैक और कॉल डायवर्ट होने की बात बताई।