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Meerut News: ब्राह्मण समाज ने उठाई न्याय और समानता की आवाज
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मेरठ..कंवलजीत..यूजीसी क़ानून के विरोध में कमिश्नरी चौराहे पर प्रदर्शन करते कृष्णा नगर कल्याण समि
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एनएएस इंटर कॉलेज में सवर्ण समाज द्वारा आहूत ब्राह्मण समाज संगठन की बैठक में यूजीसी कानून और सामाजिक समरसता को लेकर गंभीर मंथन हुआ। बैठक में वक्ताओं ने सवाल उठाए कि किसी व्यक्ति को बिना दोष सिद्ध हुए वर्षों तक जेल में रहना पड़ता है और बाद में निर्दोष करार देकर रिहा कर दिया जाता है। वक्ताओं ने इसे न्याय व्यवस्था के मूल सिद्धांतों के विपरीत बताया।
संगठन अध्यक्ष कुलदीप शर्मा ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यूजीसी के कानून पर रोक लगाना स्वागतयोग्य कदम है। समाज को बांटने वाले निर्णयों के खिलाफ सख्त कार्यवाही होनी चाहिए, ताकि देशभर में स्पष्ट संदेश जाए और भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने कहा कि समाज की एकता बनाए रखना सरकार का भी दायित्व है। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ सदस्य जितेंद्र गौतम ने की, जबकि संचालन स्थायी समिति सदस्य अजय शर्मा ने किया। अजय शर्मा ने कहा कि सवर्ण समाज ने कभी किसी जाति या वर्ग का अपमान नहीं किया। सवाल उठाया कि बिना आरोप सिद्ध हुए किसी निर्दोष को 20 साल तक जेल में रखना कहां तक न्यायसंगत है। मंत्री पुनीत शर्मा ने कहा कि ऐसे कानूनों का सर्व समाज को मिलकर विरोध करना चाहिए, जो आपसी वैमनस्य को बढ़ावा देते हैं। दंड केवल दोष सिद्ध होने पर ही दिया जाना चाहिए। स्थायी समिति सदस्य जितेंद्र गौतम ने कहा कि नियम बनाते समय जनप्रतिनिधियों को भी कड़ी प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी। हम सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के लिए समाज आभारी है लेकिन यदि भविष्य में इस तरह के कानून फिर लाए गए तो खुला विरोध किया जाएगा।
प्रशांत कौशिक ने कहा कि कानूनी रूप से किसी को ऐसा हथियार देना, जिससे समाज में द्वेष फैले, घातक है। आरके पचौरी ने कहा कि यदि पूर्व में ऐसे मुद्दों पर सशक्त विरोध हुआ होता तो आज स्थिति अलग होती। बैठक में शंकराचार्य से जुड़ी घटनाओं पर भी चिंता जताई गई। उत्तर प्रदेश संयुक्त बार एसोसिएशन के क्षेत्रीय अध्यक्ष और पूर्व महामंत्री जिला बार आनंद कश्यप ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय हर भारतीय के लिए नजीर बनेगा और अब यूजीसी को इस मामले में अपना जवाब दाखिल करना होगा
बैठक में गणेश दत्त शर्मा, विशाल त्यागी, भूषण शर्मा सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे।
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संगठन अध्यक्ष कुलदीप शर्मा ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यूजीसी के कानून पर रोक लगाना स्वागतयोग्य कदम है। समाज को बांटने वाले निर्णयों के खिलाफ सख्त कार्यवाही होनी चाहिए, ताकि देशभर में स्पष्ट संदेश जाए और भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने कहा कि समाज की एकता बनाए रखना सरकार का भी दायित्व है। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ सदस्य जितेंद्र गौतम ने की, जबकि संचालन स्थायी समिति सदस्य अजय शर्मा ने किया। अजय शर्मा ने कहा कि सवर्ण समाज ने कभी किसी जाति या वर्ग का अपमान नहीं किया। सवाल उठाया कि बिना आरोप सिद्ध हुए किसी निर्दोष को 20 साल तक जेल में रखना कहां तक न्यायसंगत है। मंत्री पुनीत शर्मा ने कहा कि ऐसे कानूनों का सर्व समाज को मिलकर विरोध करना चाहिए, जो आपसी वैमनस्य को बढ़ावा देते हैं। दंड केवल दोष सिद्ध होने पर ही दिया जाना चाहिए। स्थायी समिति सदस्य जितेंद्र गौतम ने कहा कि नियम बनाते समय जनप्रतिनिधियों को भी कड़ी प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी। हम सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के लिए समाज आभारी है लेकिन यदि भविष्य में इस तरह के कानून फिर लाए गए तो खुला विरोध किया जाएगा।
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प्रशांत कौशिक ने कहा कि कानूनी रूप से किसी को ऐसा हथियार देना, जिससे समाज में द्वेष फैले, घातक है। आरके पचौरी ने कहा कि यदि पूर्व में ऐसे मुद्दों पर सशक्त विरोध हुआ होता तो आज स्थिति अलग होती। बैठक में शंकराचार्य से जुड़ी घटनाओं पर भी चिंता जताई गई। उत्तर प्रदेश संयुक्त बार एसोसिएशन के क्षेत्रीय अध्यक्ष और पूर्व महामंत्री जिला बार आनंद कश्यप ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय हर भारतीय के लिए नजीर बनेगा और अब यूजीसी को इस मामले में अपना जवाब दाखिल करना होगा
बैठक में गणेश दत्त शर्मा, विशाल त्यागी, भूषण शर्मा सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे।
