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Meerut News: जागृति विहार में नाले में गिरी कार, तीन की बची जान
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जाग्रति विहार एक्सटेंशन के साउथएक्स पुल के नीचे नाले में गिरी कार को बाहर निकालती क्रेन। स्त्र
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खुले नाले और असुरक्षित सड़कें राहगीरों के लिए काल बनती जा रही हैं। नोएडा में हाल ही में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की नाले में गिरकर हुई दर्दनाक मौत का घाव अभी भरा भी नहीं था कि मेरठ के जागृति विहार में बृहस्पतिवार को एक वैसा ही हादसा सामने आया। हालांकि गनीमत रही है कि कार सवार तीन लोगों की जान बाल-बाल बच गई। थाना पुलिस के पहुंचने से पहले नाले से गाड़ी को जेसीबी से निकाला और वह वहां से चले भी गए। पुलिस ने कार की नंबर प्लेट का फोटो आरटीओ ऑफिस में भेजा। कार का रजिस्टेशन दिल्ली निवासी अभिषेक से बताया गया है।
बृहस्पतिवार सुबह मेडिकल थाना क्षेत्र के जागृति विहार एक्सटेंशन में एक अनियंत्रित कार सीधे गहरे नाले में जा गिरी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एक्सटेंशन पर बने इस विशाल नाले की चारदीवारी (बाउंड्री वॉल) नहीं है। कार सीख रहे सवारों को सड़क और नाले का अंदाजा नहीं मिला और गाड़ी सीधे नीचे गिर गई। कार में दो युवक और एक युवती सवार थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक तीनों लोग किसी तरह कार से बाहर निकलकर सड़क पर आए। इसके बाद क्रेन की मदद से कार को रस्सी के सहारे खींचकर बाहर निकाला। चालक बिना कार्रवाई करें कार लेकर मौके से चला गया। सूचना पर पहुंची पुलिस को मौके पर कोई नहीं मिला। पुलिस ने कार नंबर के आधार पर जांच की। इसमें जानकारी हुई की कार अभिषेक के नाम पर है। मेडिकल थाने की पुलिस ने अभिषेक से संपर्क का प्रयास किया। मगर संपर्क नहीं हो सका। सीओ सिविल लाइन अभिषेक तिवारी का कहना है कि तहरीर नहीं आई है। तहरीर आने पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
जब सिस्टम की लापरवाही ने ली जान
इसी जनवरी महीने में मेरठ के ही पल्लवपुरम (मोदीपुरम) के पास एक कार कोहरे में पीएसी नाले में गिर गई थी जिसमें 18 महीने के मासूम बच्चे की डूबने से मौत हो गई थी। 23 जनवरी को मेरठ के सदर थानाक्षेत्र के आबू नाले स्थित काठ के पुल के पास ई-रिक्शा नाले में गिरने से चालक सनी की मौत हो गई। हादसे की सूचना के आधे घंटे बाद पुलिस मौके पर पहुंची थी।
26 जनवरी को ट्रांसपोर्टनगर के नाले में किशोर के नाले में गिरने के अंदेशे में इंस्पेक्टर अरुण मिश्रा नाले में कूद गए थे। उन्होंने काफी देर किशोर को नाले में तलाशा लेकिन कोई नहीं मिला। हालांकि सीसीटीवी फुटेज में किसी के गिरने की पुष्टि नहीं हुई थी।
प्रशासनिक अनदेखी पर उठते सवाल
इन घटना ने स्थानीय विकास प्राधिकरणों और नगर निगमों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के अधिकांश बड़े नालों और निर्माण स्थलों पर न तो बाउंड्री वॉल है और न ही कोहरे के लिए रिफ्लेक्टर्स। नोएडा हादसे के बाद प्रशासन ने ब्लैक स्पॉट्स चिन्हित करने और गड्ढे भरने का अभियान शुरू किया है लेकिन मेरठ में अभी भी कई इलाकों में नाले और पुलिया खुले पड़े हैं। ये खुले नाले और बिना रेलिंग वाली पुलिया जानलेवा साबित हो रही हैं। प्रशासन की सुस्ती आम नागरिक की जान पर भारी पड़ रही है।
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बृहस्पतिवार सुबह मेडिकल थाना क्षेत्र के जागृति विहार एक्सटेंशन में एक अनियंत्रित कार सीधे गहरे नाले में जा गिरी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एक्सटेंशन पर बने इस विशाल नाले की चारदीवारी (बाउंड्री वॉल) नहीं है। कार सीख रहे सवारों को सड़क और नाले का अंदाजा नहीं मिला और गाड़ी सीधे नीचे गिर गई। कार में दो युवक और एक युवती सवार थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक तीनों लोग किसी तरह कार से बाहर निकलकर सड़क पर आए। इसके बाद क्रेन की मदद से कार को रस्सी के सहारे खींचकर बाहर निकाला। चालक बिना कार्रवाई करें कार लेकर मौके से चला गया। सूचना पर पहुंची पुलिस को मौके पर कोई नहीं मिला। पुलिस ने कार नंबर के आधार पर जांच की। इसमें जानकारी हुई की कार अभिषेक के नाम पर है। मेडिकल थाने की पुलिस ने अभिषेक से संपर्क का प्रयास किया। मगर संपर्क नहीं हो सका। सीओ सिविल लाइन अभिषेक तिवारी का कहना है कि तहरीर नहीं आई है। तहरीर आने पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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जब सिस्टम की लापरवाही ने ली जान
इसी जनवरी महीने में मेरठ के ही पल्लवपुरम (मोदीपुरम) के पास एक कार कोहरे में पीएसी नाले में गिर गई थी जिसमें 18 महीने के मासूम बच्चे की डूबने से मौत हो गई थी। 23 जनवरी को मेरठ के सदर थानाक्षेत्र के आबू नाले स्थित काठ के पुल के पास ई-रिक्शा नाले में गिरने से चालक सनी की मौत हो गई। हादसे की सूचना के आधे घंटे बाद पुलिस मौके पर पहुंची थी।
26 जनवरी को ट्रांसपोर्टनगर के नाले में किशोर के नाले में गिरने के अंदेशे में इंस्पेक्टर अरुण मिश्रा नाले में कूद गए थे। उन्होंने काफी देर किशोर को नाले में तलाशा लेकिन कोई नहीं मिला। हालांकि सीसीटीवी फुटेज में किसी के गिरने की पुष्टि नहीं हुई थी।
प्रशासनिक अनदेखी पर उठते सवाल
इन घटना ने स्थानीय विकास प्राधिकरणों और नगर निगमों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के अधिकांश बड़े नालों और निर्माण स्थलों पर न तो बाउंड्री वॉल है और न ही कोहरे के लिए रिफ्लेक्टर्स। नोएडा हादसे के बाद प्रशासन ने ब्लैक स्पॉट्स चिन्हित करने और गड्ढे भरने का अभियान शुरू किया है लेकिन मेरठ में अभी भी कई इलाकों में नाले और पुलिया खुले पड़े हैं। ये खुले नाले और बिना रेलिंग वाली पुलिया जानलेवा साबित हो रही हैं। प्रशासन की सुस्ती आम नागरिक की जान पर भारी पड़ रही है।

जाग्रति विहार एक्सटेंशन के साउथएक्स पुल के नीचे नाले में गिरी कार को बाहर निकालती क्रेन। स्त्र
