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अनुशासन और समय प्रबंधन ही सफलता की चाबी: अंतरिक्ष जैन
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जाग्रति विहार सोमदत कालोनी स्थित बीडीएस इंटरनेशनल स्कूल में अमर उजाला द्वारा आयोजित पुलिस की
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अमर उजाला की पुलिस की पाठशाला के तहत बीडीएस स्कूल में आयोजित कार्यक्रम छात्रों के लिए ज्ञान, प्रेरणा और सुरक्षा का संगम बन गया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एपीएस) अंतरिक्ष जैन ने छात्रों से सीधा संवाद कर न केवल पढ़ाई और समय प्रबंधन के गुर सिखाए, बल्कि परीक्षा तनाव, डिजिटल लत और साइबर सुरक्षा जैसे अहम विषयों पर भी खुलकर बात की। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की मौजूदगी ने यह साबित कर दिया कि आज की युवा पीढ़ी मार्गदर्शन चाहती है। बस सही दिशा मिलने की जरूरत है।
एपीएस अंतरिक्ष जैन ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि आज का युग डिजिटल है और मोबाइल फोन जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है लेकिन यह सुविधा तभी लाभकारी है जब उसका सही उपयोग किया जाए। उन्होंने छात्रों को आगाह किया कि सोशल मीडिया और मनोरंजन में जरूरत से ज्यादा समय गंवाने से लक्ष्य दूर हो जाता है। किताबों को सबसे सच्चा मित्र बताते हुए उन्होंने कहा कि जो छात्र किताबों से जुड़ जाता है, सफलता खुद उसके पीछे चलती है। समय प्रबंधन को सफलता की कुंजी बताते हुए एपीएस ने छात्रों को रोजाना की समय-सारिणी बनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि पढ़ाई, खेलकूद, विश्राम और पारिवारिक समय इन सभी के लिए संतुलित समय तय होना चाहिए। छोटे-छोटे लक्ष्य बनाकर उन्हें पूरा करने की आदत छात्रों में आत्मविश्वास पैदा करती है।
परीक्षा के दौरान होने वाले तनाव को लेकर उन्होंने सहज शब्दों में समझाया कि तनाव आना स्वाभाविक है, लेकिन उसे खुद पर हावी नहीं होने देना चाहिए। सकारात्मक सोच, नियमित व्यायाम, गहरी सांस लेने की तकनीक और परिवार या शिक्षकों से खुलकर बात करना तनाव को काफी हद तक कम कर सकता है। उन्होंने छात्रों को असफलता से डरने के बजाय उससे सीख लेने की सीख दी।
कार्यक्रम के दौरान साइबर सुरक्षा, सोशल मीडिया के दुरुपयोग और कानूनी जागरूकता जैसे विषयों पर भी छात्रों ने सवाल पूछे। एपीएस ने स्पष्ट किया कि पुलिस समाज की मित्र है और हर परिस्थिति में नागरिकों की सहायता के लिए तत्पर रहती है। स्कूल प्रबंधन ने अमर उजाला और पुलिस प्रशासन का आभार जताते हुए ऐसे कार्यक्रमों को छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक बताया। प्रधानाचार्य गोपाल दीक्षित ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
एपीएस अंतरिक्ष जैन द्वारा दिए गए अहम टिप्स
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- मोबाइल का प्रयोग सीखने और ज्ञान बढ़ाने के लिए करें, समय की बर्बादी से बचें
- रोजाना एक संतुलित टाइम-टेबल बनाएं और उसका पालन करें
- परीक्षा तनाव में गहरी सांस लें, व्यायाम करें और सकारात्मक सोच रखें
- असफलता से घबराएं नहीं, उससे सीख लेकर आगे बढ़ें
- किसी भी आपात स्थिति में तुरंत डायल-112 पर सूचना दें
- सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है
- शहरी क्षेत्र में पीआरवी 5 मिनट और ग्रामीण क्षेत्र में 10 मिनट में पहुंचती है
- महिलाओं व किशोरियों से जुड़ी घटनाओं के लिए 1090 पर शिकायत करें
- साइबर ठगी, फेक कॉल या ब्लैकमेलिंग की स्थिति में तुरंत 1930 पर संपर्क करें
छात्रों के सवालों का समाधान
कार्यक्रम में छात्रों ने खुलकर प्रश्न पूछे। कक्षा नौ की छात्रा पलक ने सुनसान रास्तों पर डर को लेकर सवाल किया। एपीएस ने 112 पर तत्काल सहायता लेने की सलाह दी। श्रद्धा शुक्ला के सवाल पर उन्होंने बताया कि मदद करने वालों को परेशान नहीं किया जाता, बल्कि गुड सेमेरिटन कानून के तहत उन्हें प्रोत्साहन दिया जाता है। वहीं छात्र निपुण को साइबर अपराध से बचाव के लिए 1930 हेल्पलाइन की जानकारी दी गई।
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एपीएस अंतरिक्ष जैन ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि आज का युग डिजिटल है और मोबाइल फोन जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है लेकिन यह सुविधा तभी लाभकारी है जब उसका सही उपयोग किया जाए। उन्होंने छात्रों को आगाह किया कि सोशल मीडिया और मनोरंजन में जरूरत से ज्यादा समय गंवाने से लक्ष्य दूर हो जाता है। किताबों को सबसे सच्चा मित्र बताते हुए उन्होंने कहा कि जो छात्र किताबों से जुड़ जाता है, सफलता खुद उसके पीछे चलती है। समय प्रबंधन को सफलता की कुंजी बताते हुए एपीएस ने छात्रों को रोजाना की समय-सारिणी बनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि पढ़ाई, खेलकूद, विश्राम और पारिवारिक समय इन सभी के लिए संतुलित समय तय होना चाहिए। छोटे-छोटे लक्ष्य बनाकर उन्हें पूरा करने की आदत छात्रों में आत्मविश्वास पैदा करती है।
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परीक्षा के दौरान होने वाले तनाव को लेकर उन्होंने सहज शब्दों में समझाया कि तनाव आना स्वाभाविक है, लेकिन उसे खुद पर हावी नहीं होने देना चाहिए। सकारात्मक सोच, नियमित व्यायाम, गहरी सांस लेने की तकनीक और परिवार या शिक्षकों से खुलकर बात करना तनाव को काफी हद तक कम कर सकता है। उन्होंने छात्रों को असफलता से डरने के बजाय उससे सीख लेने की सीख दी।
कार्यक्रम के दौरान साइबर सुरक्षा, सोशल मीडिया के दुरुपयोग और कानूनी जागरूकता जैसे विषयों पर भी छात्रों ने सवाल पूछे। एपीएस ने स्पष्ट किया कि पुलिस समाज की मित्र है और हर परिस्थिति में नागरिकों की सहायता के लिए तत्पर रहती है। स्कूल प्रबंधन ने अमर उजाला और पुलिस प्रशासन का आभार जताते हुए ऐसे कार्यक्रमों को छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक बताया। प्रधानाचार्य गोपाल दीक्षित ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
एपीएस अंतरिक्ष जैन द्वारा दिए गए अहम टिप्स
- मोबाइल का प्रयोग सीखने और ज्ञान बढ़ाने के लिए करें, समय की बर्बादी से बचें
- रोजाना एक संतुलित टाइम-टेबल बनाएं और उसका पालन करें
- परीक्षा तनाव में गहरी सांस लें, व्यायाम करें और सकारात्मक सोच रखें
- असफलता से घबराएं नहीं, उससे सीख लेकर आगे बढ़ें
- किसी भी आपात स्थिति में तुरंत डायल-112 पर सूचना दें
- सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है
- शहरी क्षेत्र में पीआरवी 5 मिनट और ग्रामीण क्षेत्र में 10 मिनट में पहुंचती है
- महिलाओं व किशोरियों से जुड़ी घटनाओं के लिए 1090 पर शिकायत करें
- साइबर ठगी, फेक कॉल या ब्लैकमेलिंग की स्थिति में तुरंत 1930 पर संपर्क करें
छात्रों के सवालों का समाधान
कार्यक्रम में छात्रों ने खुलकर प्रश्न पूछे। कक्षा नौ की छात्रा पलक ने सुनसान रास्तों पर डर को लेकर सवाल किया। एपीएस ने 112 पर तत्काल सहायता लेने की सलाह दी। श्रद्धा शुक्ला के सवाल पर उन्होंने बताया कि मदद करने वालों को परेशान नहीं किया जाता, बल्कि गुड सेमेरिटन कानून के तहत उन्हें प्रोत्साहन दिया जाता है। वहीं छात्र निपुण को साइबर अपराध से बचाव के लिए 1930 हेल्पलाइन की जानकारी दी गई।
