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कारों की रेस में किसानों की ट्रैक्टर खरीद: 35 दिन में 228 ट्रैक्टर रजिस्टर्ड हुए, डीजल कारों की संख्या 263

Fri, 23 Oct 2026 11:07 AM IST
Dimple Sirohi राजकुमार सैनी, अमर उजाला, मेरठ
राजकुमार सैनी, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Fri, 23 Oct 2026 11:07 AM IST
सार

मेरठ में 16 सितंबर से 21 अक्तूबर के बीच 228 ट्रैक्टर और 263 डीजल कारें रजिस्टर्ड हुईं। दोनों के आंकड़ों में सिर्फ 35 वाहनों का अंतर है।

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Meerut Sees 228 Tractor Registrations in 35 Days, Nearly Matching 263 Diesel Car Registrations
मेरठ में ट्रैक्टरों की बिक्री - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

किसानों के पास खेती का रकबा भले ही कम हो रहा है, लेकिन जिले में ट्रैक्टरों की खरीद चर्चा में है। कारण है कि ट्रैक्टरों की खरीद डीजल चालित कारों की बिक्री के आंकड़े को छूने लगी है। परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 35 दिन के भीतर मेरठ के किसानों ने जहां 228 ट्रैक्टर खरीदे हैं वहीं शौकीनों ने 263 डीजल चालित कारें खरीदी हैं। 

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वर्ष 2014 के बाद कई हाईवे का निर्माण किया गया। इसके साथ ही दिल्ली से मेरठ मोदीपुरम तक रैपिड कॉरिडोर में सरकार ने सैकड़ों हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया। इभूमि अधिग्रहण की मुआवजा राशि आने के बाद देहात के गांवों की तस्वीर बदल गई। किसानों के ट्रैक्टर खरीद के साथ कार खरीद के आंकड़े कम नहीं हैं। देहात में बड़ी संख्या में किसानों के पास कारें पहुंच गई हैं। 16 सितंबर को यूपी 15 एफके वाहन नंबर सीरीज शुरू हुई थी। 
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संभागीय परिवहन कार्यालय के 16 सितंबर से 21 अक्तूबर तक नई सीरीज में रजिस्टर्ड हुए वाहनों पर नजर डाले तो 35 दिन के भीतर मेरठ में किसानों ने कृषि कार्य के लिए 228 ट्रैक्टर खरीदकर रजिस्ट्रेशन कराए हैं। जबकि डीजल चालित कारों की बिक्री आंकड़ा 263 पर ही ठहर गया है। ट्रैक्टर और डीजल चालित कारों की बिक्री के बीच का अंतर महज 35 वाहनों का रह गया है। 

पुराने ट्रैक्टरों को स्क्रैप किया जाना है कारण
एनजीटी और न्यायालय के आदेशानुसार 10 साल पुराने डीजल चालित वाहनों को स्क्रैप किया जाना है। किसानों के पास भी बड़ी संख्या में पुराने ट्रैक्टर हैं। जिनको स्क्रैप कराया जा रहा है। भविष्य को ध्यान में रखते हुए किसानों ने इस बार ट्रैक्टरों की अधिक खरीद की है। 

ट्रैक्टर के रजिस्ट्रेशनों की संख्या बता रही है कि इस बार किसानों ने अधिक खरीद की है। डीजल कारों की संख्या कम हो रही है। लोग पेट्रोल, सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ बढ़ रहे हैं। जो पर्यावरण के लिए अच्छा है। - विकास कुमार यादव, एआरटीओ प्रशासन।

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