मिजिल्स रुबेला का टीका पूरी तरह सुरक्षित, अफवाहों पर बिल्कुल न करें ऐतबार
विश्व के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान मिजिल्स रुबेला में कई स्कूल और मदरसे ऐसे हैं जिनकी वजह से यह पूरी तरह से परवान नहीं चढ़ पा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे 30 विद्यालय और 15 मदरसे चिन्हित किए हैं, जिन्होंने बच्चों और किशोरों को टीकाकरण कराने से मना कर दिया है। इन सभी शिक्षण संस्थानों में 20 हजार से ज्यादा बच्चे-किशोर पढ़ते हैं।
ऐसे में इन स्कूलों और मदरसों की सूची तैयार कर प्रशासन को भेजी गई है। बताया जा रहा है कि टीकाकारण की राह में यह बाधा सोशल मीडिया पर वायरल हो रही 2009 की एक फर्जी वीडियो से फैल रही अफवाह और जागरुकता की कमी के कारण आ रही है।
मिजिल्स रुबेला का टीकाकरण पूरी तरह से सुरक्षित होने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग ऐसे हैं जो टीकाकरण कराने में लापरवाही बरत रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए धर्मगुरुओं और मेरठ के खिलाड़ियों से भी मदद ली, कैंपेन चलाया, लेकिन इसे अमली जामा पहनाने में स्वास्थ्य विभाग को काफी पापड़ बेलने पड़ रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य नौ माह से 15 साल तक के13 लाख 16 हजार 852 बच्चों और किशोरों का टीकाकरण करना है, जबकि अभियान शुरू होने के एक सप्ताह बाद भी महज तीन लाख 24 हजार 330 का ही टीकाकरण हो सका है।
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विश्वास चौधरी ने बताया कि जिले में कुल 4599 स्कूलों-मदरसों में यह अभियान चलना है, इनमें 623 मदरसे हैं। 2429 स्कूल और मदरसों में यह अभियान चल चुका है। 26 नवंबर से अभियान चल रहा है। धर्मगुरुओं और जनप्रतिनिधियों ने भी लोगों से टीका लगवाने की अपील की है।
विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान है यह
रुबेला जिसे जर्मन मिजिल्स (खसरा) भी कहा जाता है एक विषाणुजनित संक्रमण है। जितने लोगों को रुबेला होता है उनमें से करीब आधे लोगों को तो इसके कोई लक्षण महसूस नहीं होते, इसलिए उन्हें शायद पता भी नहीं चलता कि उन्हें रुबेला है।
लक्षणों की बात करें तो हल्का बुखार, बंद नाक या नाक बहना और गले में दर्द, आंखों में दर्द व संक्रमण आदि। कुछ दिनों बाद चेहरे और गर्दन पर लाल धब्बेदार चकत्ते उभर सकते हैं और इनमें खुजली भी हो सकती है। इसके बाद ये चकत्ते शरीर में और जगहों पर फैलते हैं।
इन स्कूलों ने किया टीकाकरण से इंकार
सेंट फेसिस पब्लिक स्कूल, एसडीआर पब्लिक स्कूल, डीके ग्लोबल स्कूल, अमेरिकन स्कूल, गार्गी स्कूल, सिटी प्राइवेट स्कूल, सिटी लुक पब्लिक स्कूल, वेंकेटवश्वरा स्कूल, नूर पब्लिक स्कूल, शिक्षा बाल ज्ञान भारती, एसवी पब्लिक स्कूल, ग्रीम चैंबर पब्लिक स्कूल, राम गुरु ग्लोबल स्कूल आदि स्कूलों ने टीकाकरण कराने से इंकार कर दिया है।
यह मदरसे भी कर रहे मना
मोहम्मदिया, मैरीफुल कुरान, फैज उल उलूम, सिदिकिया काजी मदरसा, बसीरुल इस्लाम, इस्लामाकि मदरसा, अलजा जामिया, एनएएम मदरसा, अरसा एन दारुल उलूम, कासिमिया दुरुल उलूम आदि 15 मदरसे भी टीकाकरण कराने से मना कर रहे हैं।
दरअसल सोशल मीडियापर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें बताया जा रहा है कि खसरे का टीका लगने से चार बच्चों की मृत्यु हो गई है। यह वीडियो पूरी तरह से भ्रामक एवं असत्य है। वीडियो 2009 का है, पिछले एक सप्ताह में लाखों बच्चों को मिजिल्स रुबेला अभियान के अंतर्गत इंजेक्शन लगाया जा चुका है, सब ठीक हैं। यह पूरी तरह से सुरक्षित है। - डॉ. राजकुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
मुहिम में जरूर लें हिस्सा
अपने बच्चों को खसरा और रुबेला जैसी खतरनाक अमराज (बीमारी) से बचाने के लिए खसरा रुबेला का टीकाकरण जरूर करवाएं और अपनी आनी वाली पीढ़ियों की बेहतर सेहत के लिए इस मुहिम में जरूर हिस्सा लें और मुल्क के मुस्तकबिल के महफूज बनाएं। - जैनुस साजिद्दीन, शहर काजी
बच्चे स्वस्थ होंगे
मिजिल्स रुबेला टीकाकरण अच्छा अभियान है। इसमें सभी को शामिल होना चाहिए। बच्चे स्वस्थ होने चाहिए, ताकि वह बेहतर जिंदगी जी सकें। सेहत सबसे जरूरी है। - हाजी याकूब कुरैशी, पूर्व मंत्री
यह टीका सुरक्षित है
पहले भी तमाम तरह की बीमारियां टीकाकरण से खत्म हुई हैं। लिहाजा मीजल्स (खसरा) रुबेला की इस वैक्सीन को लगवाएं। यह सुरक्षित हैं, इससे घबराएं नहीं। - शाहिद मंजूर, पूर्व कैबिनेट मंत्री
यह बेहतर स्वास्थ्य के लिए है
जनता को भी इस अभियान में सहयोग करना चाहिए। यह किसी एक विशेष जाति या धर्म को लेकर दवाई तैयार नहीं की गई है, यह सभी के बेहतर स्वास्थ्य के लिए है। - मा निलीमानंद, महामंडलेश्वर
अभियान का समर्थन करें
अच्छे अभियानों का सभी को समर्थन करना चाहिए, बच्चे स्वस्थ होंगे तो देश का मुस्तकबिल भी स्वस्थ रहेगा। किसी को कोई शंका है तो वह चिकित्सक से सलाह ले सकता है। - हाजी शाहिद अखलाक, पूर्व सांसद
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