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Meerut News: पुराने जन्मों का पाप नहीं कुष्ठ रोग, इलाज से पूरी तरह ठीक हो सकती है बीमारी
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मेरठ। कुष्ठ रोग (लीप्रोसी) को लेकर समाज में फैले अंधविश्वास आज भी लोगों को डराते हैं। कई लोग मानते हैं कि यह छूने से फैलता है या पूर्वजन्म के पाप का फल है। सच्चाई यह है कि कुष्ठ रोग न तो छूने से फैलता है, न ही यह किसी पूर्व जन्म के कर्म या आनुवंशिक बीमारी का नतीजा है। यह पूरी तरह से इलाज योग्य संक्रामक रोग है, जिसका समय पर इलाज कराने से मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है और विकृति से बच सकता है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. अशोक कटारिया ने बताया कि कुष्ठ रोग का सबसे प्रभावी इलाज मल्टी ड्रग थैरेपी (एमडीटी) है। यह दवा सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध है। नियमित और पूरी कोर्स की दवा लेने से बीमारी कुछ महीनों से एक साल के अंदर ठीक हो जाती है। अगर सर्जरी की जरूरत पड़ती है, तो उसका पूरा खर्च सरकार उठाती है और मरीज को तीन किश्तों में 12,000 रुपये की अतिरिक्त सहायता भी दी जाती है। इसके अलावा कुष्ठ रोगियों को हर महीने 3,000 रुपये की पेंशन मिलती है। इलाज पूरा होने के बाद मरीज को रिकॉर्ड से हटा दिया जाता है और वह सामान्य जीवन जी सकता है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में मेरठ जिले में कुल 120 पंजीकृत कुष्ठ रोगी हैं। उन्होंने बताया कि बीमारी के लक्षण धीरे-धीरे दिखते हैं और इन्क्यूबेशन पीरियड कई हफ्तों से 20 साल तक हो सकता है। औसतन यह 5-7 साल में विकसित होती है। कुष्ठ रोग के प्रमुख लक्षण त्वचा पर हल्के या तांबई रंग के सुन्न दाग-धब्बे, हाथ-पैरों में झुनझुनी, सुन्नता या कमजोरी, नसों में दर्द, पलकों की कमजोरी
चेहरे/आंखों में सूजन या लालिमा
हाथ-पैरों पर घाव या जलन की समस्या है।
स्वास्थ्य विभाग ने जागरूकता के लिए खास कविता भी तैयार की है
डॉक्टर गजेंद्र सिंह ने बताया कि इस बार भेदभाव समाप्त कर गरिमा सुनिश्चित करें ... की थीम दी गई है। उन्होंने बताया कि 30 जनवरी से 13 फरवरी तक जिले में विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। विभाग का संदेश स्पष्ट है। समाज को जागरूक बनाकर हम इसे पूरी तरह खत्म कर सकते हैं। शुक्रवार को जिलाधिकारी डॉ वीके सिंह के द्वारा शपथ दिलाई जाएगी।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. अशोक कटारिया ने बताया कि कुष्ठ रोग का सबसे प्रभावी इलाज मल्टी ड्रग थैरेपी (एमडीटी) है। यह दवा सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध है। नियमित और पूरी कोर्स की दवा लेने से बीमारी कुछ महीनों से एक साल के अंदर ठीक हो जाती है। अगर सर्जरी की जरूरत पड़ती है, तो उसका पूरा खर्च सरकार उठाती है और मरीज को तीन किश्तों में 12,000 रुपये की अतिरिक्त सहायता भी दी जाती है। इसके अलावा कुष्ठ रोगियों को हर महीने 3,000 रुपये की पेंशन मिलती है। इलाज पूरा होने के बाद मरीज को रिकॉर्ड से हटा दिया जाता है और वह सामान्य जीवन जी सकता है।
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उन्होंने बताया कि वर्तमान में मेरठ जिले में कुल 120 पंजीकृत कुष्ठ रोगी हैं। उन्होंने बताया कि बीमारी के लक्षण धीरे-धीरे दिखते हैं और इन्क्यूबेशन पीरियड कई हफ्तों से 20 साल तक हो सकता है। औसतन यह 5-7 साल में विकसित होती है। कुष्ठ रोग के प्रमुख लक्षण त्वचा पर हल्के या तांबई रंग के सुन्न दाग-धब्बे, हाथ-पैरों में झुनझुनी, सुन्नता या कमजोरी, नसों में दर्द, पलकों की कमजोरी
चेहरे/आंखों में सूजन या लालिमा
हाथ-पैरों पर घाव या जलन की समस्या है।
स्वास्थ्य विभाग ने जागरूकता के लिए खास कविता भी तैयार की है
डॉक्टर गजेंद्र सिंह ने बताया कि इस बार भेदभाव समाप्त कर गरिमा सुनिश्चित करें ... की थीम दी गई है। उन्होंने बताया कि 30 जनवरी से 13 फरवरी तक जिले में विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। विभाग का संदेश स्पष्ट है। समाज को जागरूक बनाकर हम इसे पूरी तरह खत्म कर सकते हैं। शुक्रवार को जिलाधिकारी डॉ वीके सिंह के द्वारा शपथ दिलाई जाएगी।
