शामली: गन्ने का भाव 500 रुपये करने की मांग, कलेक्ट्रेट पर किसानों का धरना-प्रदर्शन, जमकर नारेबाजी
शामली कलेक्ट्रेट पर भारतीय किसान यूनियन (अराजनीतिक) के नेतृत्व में किसानों ने धरना दिया। गन्ने का भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल करने, फसल नुकसान का मुआवजा और बिजली बिलों की समस्याएं दूर करने की मांग उठाई।
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शामली में गन्ने का भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर भारतीय किसान यूनियन (अराजनीतिक) के बैनर तले सैकड़ों किसानों ने शामली कलेक्ट्रेट परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। धरने का नेतृत्व बाबा राजेंद्र ने किया। किसानों ने अपनी समस्याएं उठाते हुए प्रशासन से इनके समाधान की मांग की।
किसानों का कहना था कि शुगर मिलों के चालू होने से पहले गन्ने का भाव घोषित किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि गन्ने का मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल तय किया जाए, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित दाम मिल सके।
बारिश से फसल नुकसान पर मुआवजे की मांग
धरना-प्रदर्शन के दौरान किसानों ने बारिश और खराब मौसम के कारण फसलों को हुए नुकसान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने मांग की कि प्रभावित फसलों का सर्वे कराया जाए और नुकसान के आधार पर किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए।
किसानों ने कहा कि मौसम की मार से खेती पर असर पड़ता है और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में प्रशासन को फसल नुकसान का आकलन कराकर प्रभावित किसानों को राहत दिलाने के लिए कदम उठाने चाहिए।
बिजली बिलों की समस्याएं दूर करने की मांग
किसानों ने बिजली बिलों से जुड़ी समस्याओं का समाधान कराने की मांग भी रखी। उनका कहना था कि बिजली बिलों को लेकर आ रही परेशानियों का निस्तारण किया जाना चाहिए, ताकि किसानों को राहत मिल सके।
इसके साथ ही आवारा पशुओं से फसलों को हो रहे नुकसान का मुद्दा भी धरने में उठाया गया। किसानों ने कहा कि खेतों में घुसने वाले आवारा पशु फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे उनकी मेहनत और लागत पर असर पड़ता है। उन्होंने प्रशासन से इस समस्या पर प्रभावी रोक लगाने की मांग की।
किसानों ने समस्याओं के प्राथमिकता से निस्तारण की अपील की
धरने में भारतीय किसान यूनियन (अराजनीतिक) के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने गन्ने का उचित मूल्य, फसल नुकसान का मुआवजा, बिजली बिलों की समस्याओं का समाधान और आवारा पशुओं से फसलों की सुरक्षा जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए।
किसानों ने प्रशासन से मांग की कि उनकी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर सुना जाए और उनके समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।