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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   UP MLC Elections: BJP Challenged Teachers' Unions' Dominance in 2020; 2026 Polls Test Their Credibility

यूपी एमएलसी चुनाव: भाजपा के तिलिस्म में शिक्षक संघों के साख की अग्नि परीक्षा, 2020 में तोड़ा था सियासी वर्चस्व

Sat, 24 Oct 2026 11:49 AM IST
Sharukh Khan कुलदीप त्यागी, अमर उजाला, मेरठ
कुलदीप त्यागी, अमर उजाला, मेरठ Published by: Sharukh Khan Updated Sat, 24 Oct 2026 11:49 AM IST
सार

उत्तर प्रदेश की शिक्षक राजनीति में भाजपा के तिलिस्म में शिक्षक संघों के साख की अग्नि परीक्षा है। 2020 में भाजपा ने शिक्षक संघों का 50 वर्ष का सियासी वर्चस्व तोड़ दिया था। ओमप्रकाश शर्मा, हेम सिंह पुंडीर, डॉ. उमेश त्यागी जैसे दिग्गजों के बिना चुनाव हुआ है।

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UP MLC Elections: BJP Challenged Teachers' Unions' Dominance in 2020; 2026 Polls Test Their Credibility
UP MLC Elections - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

उत्तर प्रदेश की शिक्षक राजनीति में पांच दशक तक प्रभावशाली रहे दिग्गजों का दौर अब इतिहास बन चुका है। वर्ष 2020 में भाजपा ने शिक्षक संगठनों के सियासी वर्चस्व को जोरदार झटका दिया था। मेरठ-सहारनपुर खंड शिक्षक सीट पर ओमप्रकाश शर्मा और स्नातक सीट पर हेम सिंह पुंडीर को हार का सामना करना पड़ा। 
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अब 2026 के चुनाव में ओमप्रकाश शर्मा, हेम सिंह पुंडीर और डॉ. उमेश चंद त्यागी जैसे प्रमुख चेहरे मैदान में नहीं हैं। ऐसे में शिक्षक संगठनों की ताकत और भाजपा के बढ़ते प्रभाव की असली परीक्षा हो रही है।
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शर्मा के तिलिस्म पर 2020 में लगा था ब्रेक
माध्यमिक शिक्षक संघ के शर्मा गुट के अध्यक्ष रहे ओमप्रकाश शर्मा ने 1970 में पहली बार मेरठ शिक्षक सीट जीती थी। वह 2014 तक लगातार आठ बार एमएलसी चुने गए। वर्ष 2020 में भाजपा के श्रीचंद शर्मा ने उनकी जीत का सिलसिला तोड़ दिया। वहीं, स्नातक सीट पर भाजपा के दिनेश गोयल ने हेम सिंह पुंडीर को शिकस्त दी। शिक्षक सीट पर डॉ. उमेश चंद त्यागी को भी लगातार चार चुनावों में हार का सामना करना पड़ा।
 
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दिग्गजों के बिना अस्तित्व की लड़ाई
इस बार पुराने चेहरों की गैरमौजूदगी ने मुकाबले को नया मोड़ दे दिया है। शिक्षक संगठनों के सामने अपनी पारंपरिक ताकत समेटने की चुनौती है, जबकि भाजपा दोनों सीटों पर जीत का दावा कर रही है। नामांकन के दौरान शर्मा और ठकुराई गुट के बीच गठबंधन की चर्चाएं भी चलीं, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। इससे विपक्षी शिक्षक संगठनों की एकजुटता पर सवाल उठ रहे हैं।
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संगठन छोड़ा, भाजपा का दामन थामा
शिक्षक राजनीति में भाजपा के बढ़ते प्रभाव का असर संगठनों के भीतर भी दिख रहा है। माध्यमिक शिक्षक संघ के शर्मा गुट के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष रहे डॉ. प्रमोद मिश्रा भाजपा में शामिल होकर वाराणसी खंड शिक्षक सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। शर्मा गुट के तीन बार के एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी भी भाजपा में शामिल होकर गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक सीट से मैदान में हैं।

 

मेरठ-सहारनपुर क्षेत्र के कई शिक्षक नेता भी भाजपा से टिकट की उम्मीद लगाए थे, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी। अब सवाल है कि शिक्षक संगठन अपनी खोई ताकत वापस पा सकेंगे या भाजपा अपना दबदबा और मजबूत करेगी।

शिक्षकों की आवाज दबाने की कोशिश
कुछ लोग शिक्षकों की गरिमा को अपने स्वार्थ के लिए बेचकर भाजपा में शामिल हुए हैं। शिक्षा का बाजारीकरण करने वाले लोग सत्ता में हैं और नीति निर्धारक बन बैठे हैं। हम शिक्षकों को साथ लेकर संघर्ष जारी रखेंगे।- डॉ. उमेश चंद त्यागी, प्रदेश अध्यक्ष, माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई गुट

 

नतीजों से तय होगी दलों की उपयोगिता
हमारे संगठन के कार्यकर्ताओं ने काफी मेहनत की है। उम्मीदवारों ने मतदाताओं से लगातार संपर्क किया है। एमएलसी चुनाव के नतीजों से ही सभी दलों की उपयोगिता तय होगी।- रमेश चंद शर्मा, मंडलीय अध्यक्ष, माध्यमिक शिक्षक संघ शर्मा गुट
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