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Mirzapur News: बिना सिलिंडर मिले ही आ रहा डिलीवरी का मेसेज
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- उच्चाधिकारियों से हो रही शिकायत
मिर्जापुर। जिले में गैस सिलिंडर की समस्या बढ़ती जा रही है। लोगों को बुकिंग का डीएसी नंबर भी मिल जा रहा है और बाद में गैस की डिलीवरी का मैसेज भी आ जा रहा है, लेकिन सिलिंडरी नहीं मिल रहा।
शहर के रविकर सिंह ने गैस सिलिंडर की बुकिंग कराई। उसका डीएसी नंबर भी आ गया। लेकिन एक सप्ताह तक सिलिंडर नहीं मिली। उसके बाद सोमवार को गैस की डिलीवरी का मैसेज भी आ गया। लेकिन सिलिंडर नहीं मिली। ऐसे कई लोग हैं इनके पास मैसेज आ जा रहा है लेकिन सिलिंडर नहीं मिल रही। इस संबंध में जिला पूर्ति कार्यालय के पास भी कोई सूचना नहीं है। जिले में 45 गैस एजेंसियां हैं। इनके पास कुल 5.20 लाख सिलिंडर वितरण की व्यवस्था है। खास बात यह है कि इसमें यह है कि इसमें 2.95 लाख उज्ज्वला के लाभार्थी भी हैं। जो प्राय: सिलिंडर नहीं लेते या कम लेते हैं। इसके बाद भी सिलिंडर आपूर्ति में सुधार नहीं हो पा रहा है। यह आश्चर्यजनक बात है। वह भी तब जबकि प्रशासन का पूरा प्रयास है कि कहीं भी सिलिंडर की कमी न हो। यह भी एक समस्या ही है कि अधिकांश समस्या नगर क्षेत्र में ही है। जबकि नगर में सिवाय सिलिंडर के ईंधन का कोई अन्य स्रोत नहीं है।
लकड़ियां नदारद हैं और उपलाें की बढ़ गई गर्मी
गैस सिलिंडर का यह प्रभाव है कि नगर में अधिकांश घरों से चूल्हे नदारद हैंं। लकड़ी मिल नहीं रही है। यदि कहीं मिल रही है तो 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल मिल रही है। लोग गैस के अब इतने आदि हो गए हैं कि धुएं के डर से वे जाड़े में सिगड़ी तक तो नहीं जलाते। लकड़ी जलाने के लिए अधिकांश घरों में जगह भी नहीं बची है। वहीं कोयला व उपले भी बीते दिनों की बात हो गई है। उपला एक से डेढ़ रुपये प्रति की दर से मिल रहा है जबकि पहले यह एक रुपये में तीन मिलता था। कोयला भी अनुपलब्ध है। पहले पत्थर का कोयले व लकड़ी का कोयला मिलाकर लोग अंगीठी जलाते थे। लेकिन अब सब कुछ नदारद है। इससे नागरिकों की मुसीबत और भी बढ़ी है। जिला पूर्ति अधिकारी संजय प्रसाद ने बताया कि इसके लिए नोडल अधिकारी को लगाया गया है। नोडल अधिकारी से कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है।
नगर पालिका में पंजीकृत हैं 32 हजार भवन
नगर पालिका में 32 हजार भवन पंजीकृत हैं। इस हिसाब से प्रति घर एक सिलिंडर भी दिया जाए तो कम से कम नगर में तो समस्या न हो। ग्रामीण क्षेत्रों में तो ईंधन के अन्य साधन भी हैं। यदि एक-एक सिलिंडर भी दे दिया जाए तो लोगों की समस्या का समाधान हो सकता है। जरुरत इस बात की है कि प्रशासन अपनी कड़ी निगरानी में सिलिंडर का नियमपूर्वक वितरण कराएं तो समस्या का निवारण हो सकता है।
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मिर्जापुर। जिले में गैस सिलिंडर की समस्या बढ़ती जा रही है। लोगों को बुकिंग का डीएसी नंबर भी मिल जा रहा है और बाद में गैस की डिलीवरी का मैसेज भी आ जा रहा है, लेकिन सिलिंडरी नहीं मिल रहा।
शहर के रविकर सिंह ने गैस सिलिंडर की बुकिंग कराई। उसका डीएसी नंबर भी आ गया। लेकिन एक सप्ताह तक सिलिंडर नहीं मिली। उसके बाद सोमवार को गैस की डिलीवरी का मैसेज भी आ गया। लेकिन सिलिंडर नहीं मिली। ऐसे कई लोग हैं इनके पास मैसेज आ जा रहा है लेकिन सिलिंडर नहीं मिल रही। इस संबंध में जिला पूर्ति कार्यालय के पास भी कोई सूचना नहीं है। जिले में 45 गैस एजेंसियां हैं। इनके पास कुल 5.20 लाख सिलिंडर वितरण की व्यवस्था है। खास बात यह है कि इसमें यह है कि इसमें 2.95 लाख उज्ज्वला के लाभार्थी भी हैं। जो प्राय: सिलिंडर नहीं लेते या कम लेते हैं। इसके बाद भी सिलिंडर आपूर्ति में सुधार नहीं हो पा रहा है। यह आश्चर्यजनक बात है। वह भी तब जबकि प्रशासन का पूरा प्रयास है कि कहीं भी सिलिंडर की कमी न हो। यह भी एक समस्या ही है कि अधिकांश समस्या नगर क्षेत्र में ही है। जबकि नगर में सिवाय सिलिंडर के ईंधन का कोई अन्य स्रोत नहीं है।
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लकड़ियां नदारद हैं और उपलाें की बढ़ गई गर्मी
गैस सिलिंडर का यह प्रभाव है कि नगर में अधिकांश घरों से चूल्हे नदारद हैंं। लकड़ी मिल नहीं रही है। यदि कहीं मिल रही है तो 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल मिल रही है। लोग गैस के अब इतने आदि हो गए हैं कि धुएं के डर से वे जाड़े में सिगड़ी तक तो नहीं जलाते। लकड़ी जलाने के लिए अधिकांश घरों में जगह भी नहीं बची है। वहीं कोयला व उपले भी बीते दिनों की बात हो गई है। उपला एक से डेढ़ रुपये प्रति की दर से मिल रहा है जबकि पहले यह एक रुपये में तीन मिलता था। कोयला भी अनुपलब्ध है। पहले पत्थर का कोयले व लकड़ी का कोयला मिलाकर लोग अंगीठी जलाते थे। लेकिन अब सब कुछ नदारद है। इससे नागरिकों की मुसीबत और भी बढ़ी है। जिला पूर्ति अधिकारी संजय प्रसाद ने बताया कि इसके लिए नोडल अधिकारी को लगाया गया है। नोडल अधिकारी से कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है।
नगर पालिका में पंजीकृत हैं 32 हजार भवन
नगर पालिका में 32 हजार भवन पंजीकृत हैं। इस हिसाब से प्रति घर एक सिलिंडर भी दिया जाए तो कम से कम नगर में तो समस्या न हो। ग्रामीण क्षेत्रों में तो ईंधन के अन्य साधन भी हैं। यदि एक-एक सिलिंडर भी दे दिया जाए तो लोगों की समस्या का समाधान हो सकता है। जरुरत इस बात की है कि प्रशासन अपनी कड़ी निगरानी में सिलिंडर का नियमपूर्वक वितरण कराएं तो समस्या का निवारण हो सकता है।