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Mirzapur News: सप्तमी पर मां की एक झलक देखने के लिए बेताब दिखे भक्त
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मां चंडिका देवी।-सोशल मीडिया।
- फोटो : Samvad
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-मां विंध्यवासिनी के दर्शन के लिए विंध्यधाम में श्रद्धालुओं का दिनभर लगा रहा तांता
विंध्याचल। जगत कल्याणी मां विंध्यवासिनी की चौखट पर चैत्र नवरात्र की सप्तमी पर शीश नवाने के लिए बुधवार को श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भोर में मंगला आरती और शृंगार पूजन के बाद मां विंध्यवासिनी की एक झलक पाकर भक्त निहाल हो उठे। सुबह से लेकर देर रात तक विंध्यवासिनी मंदिर परिसर का आंगन शंख, घंटा, नगाड़े और पहाड़ावाली के जयकारे से गुंजायमान रहा।
चैत्र नवरात्र की सप्तमी पर देश के कोने-कोने से आए भक्तों ने देवी दरबार में मत्था टेका। गंगा स्नान कर घंटों कतार में खड़े होने के उपरांत देवी धाम पहुंचे श्रद्धालु माता के दिव्य स्वरूप का दर्शन पाकर निहाल हो उठे। देवी दरबार पहुंचे श्रद्धालु माता की झलक पाने को बेताब दिखे। मां विंध्यवासिनी की एक झलक पाकर श्रद्धालुओं का कारवां त्रिकोण परिक्रमा पथ की तरफ निकल पड़ा। पहाड़ पर विराजमान महाकाली और मां अष्टभुजी के दरबार में भी सुबह से शाम तक दर्शन पूजन का सिलसिला अनवरत चलता रहा। गुड़हल, कमल और गुलाब के पुष्पों से किया गया देवी मां का भव्य शृंगार के बाद मां का रूप देखते ही बन रहा था। श्रद्धालुओं की सुख सुविधा के लिए प्रशासनिक तौर पर बेहतर सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं।
साधकों ने तंत्र मंत्र से की महानिशा की पूजा
-काल रात्रि सतमी तिथि पर भैरव कुंड पर लगा रहा साधकों का जमावड़ा
चैत्र नवरात्र की सप्तमी काल रात्रि पर विंध्याचल के पहाड़ पर महानिशा की पूजन करने के लिए साधकों का हुजूम उमड़ पड़ा। साधकों ने विधि विधान से अर्ध रात्रि में रामगया घाट, भैरव कुंड, अकोढी गांव स्थित कंकाल काली सहित अष्टभुजा पहाड़ की कंदराओं गुफाओं में महानिशा की पूजा की। विंध्य के पहाड़ पर जगह-जगह बैठे साधक यंत्र तंत्र मंत्र के माध्यम से साधना में तल्लीन नजर आए। अष्टभुजा पहाड़ पर तंत्र-मंत्र यंत्र की गूंज पूरी रात गूंजती रही। भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन की तरफ से पुख्ता इंतजाम किया गया था। महानिशा का पूजन देखने के लिए विंध्याचल सहित मिर्जापुर नगर के लोग भी बड़ी संख्या में पहाड़ पर पहुंचे। सूर्यास्त होते ही अष्टभुजा पहाड़ के त्रिकोण मार्ग पर गहमागहमी काफी बढ़ गई थी। त्रिकोण मार्ग पर विभिन्न मंदिरों में तंत्र साधना का अद्भुत अनुष्ठान शासकों द्वारा किया गया। श्मशान घाट पर भी जगह-जगह बैठकर दूर दराज से आए साधक यंत्र तंत्र मंत्र के माध्यम से पूजन अनुष्ठान करने में लगे रहे।
महाकाली के दरबार में उमड़े श्रद्धालु
चैत्र नवरात्र की सप्तमी तिथि पर काली खोह पहाड़ पर विराजमान महाकाली के दरबार में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी तरह-तरह के पुष्पों से मां का भव्य शृंगार किया गया था। दर्शन पाकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। माता के दर्शन पूजन के बाद भक्तजनों ने मंदिर परिसर में रक्षा बांध मन्नते मांगी। इसके बाद श्रद्धालुओं ने पहाड़ पर लंगूरों को चना गुड़ का प्रसाद बांटा।
मां अष्टभुजी देवी का दर्शन पाकर श्रद्धालु निहाल
अष्टभुजा पहाड़ पर पहुंचे दर्शनार्थी मां अष्टभुजी देवी के भव्य स्वरूप का दर्शन करके अभिभूत हो उठे मां विंध्यवासिनी देवी का दर्शन पूजन करने के बाद किसी ने रोपवे के माध्यम से तो किसी ने सीढ़ियां चढ़कर देवी मां का दर्शन पूजन किया मां का दर्शन पूजन करने के लिए अष्टभुजा पहाड़ के नीचे श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रही कतार में खड़े आस्थावान हाथ में नारियल चुनरी माला फूल प्रसाद लिए मां का जय जय कार लगाते हुए देवी धाम की तरफ बढ़े चढ़े जा रहे थे।
विंध्य पर्वत का सीता कुड : राम जानकी के आगमन का साक्षी है
मां विंध्यवासिनी दरबार से मात्र तीन किलोमीटर की दूरी पर अष्टभुजा के पश्चिम भाग में स्थित है सीता कुंड राम जानकी के आगमन का साक्षी है। त्रेता युग में निर्मित सीता कुंड का जल औषधीय गुणों से भरा है। मान्यता है इसके जल पान करने से कई लाइलाज बीमारियां तक ठीक हो जाती हैं। आध्यात्मिक धर्म गुरु त्रियोगी मिट्ठू मिश्र ने बताया वनवास काल में मां सीता ने यहां रसोई बनाई थी। जल की आवश्यकता पड़ने पर भगवान श्रीराम ने बाण मारकर यहां पानी का स्रोत निकाला था। जो सीता कुंड के नाम से विख्यात है। इस कुंड से बारहों मास अत्यंत शीतल, मधुर जल निकलता रहता है।
असक्तों को मंदिर तक पहुंचा रहे गाइड
चैत्र नवरात्र मेले में स्काउट दल श्रद्धालुओं की सेवा में लगे रहे। श्रद्धालुओं को पानी पिलाने से लेकर बुजुर्ग और अशक्त दर्शनार्थियों को मंदिर में पहुुंचाकर दर्शन पूजन कराया जा रहा है। स्काउट दल के इस कार्य को लोग सराहते दिखे।
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विंध्याचल। जगत कल्याणी मां विंध्यवासिनी की चौखट पर चैत्र नवरात्र की सप्तमी पर शीश नवाने के लिए बुधवार को श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भोर में मंगला आरती और शृंगार पूजन के बाद मां विंध्यवासिनी की एक झलक पाकर भक्त निहाल हो उठे। सुबह से लेकर देर रात तक विंध्यवासिनी मंदिर परिसर का आंगन शंख, घंटा, नगाड़े और पहाड़ावाली के जयकारे से गुंजायमान रहा।
चैत्र नवरात्र की सप्तमी पर देश के कोने-कोने से आए भक्तों ने देवी दरबार में मत्था टेका। गंगा स्नान कर घंटों कतार में खड़े होने के उपरांत देवी धाम पहुंचे श्रद्धालु माता के दिव्य स्वरूप का दर्शन पाकर निहाल हो उठे। देवी दरबार पहुंचे श्रद्धालु माता की झलक पाने को बेताब दिखे। मां विंध्यवासिनी की एक झलक पाकर श्रद्धालुओं का कारवां त्रिकोण परिक्रमा पथ की तरफ निकल पड़ा। पहाड़ पर विराजमान महाकाली और मां अष्टभुजी के दरबार में भी सुबह से शाम तक दर्शन पूजन का सिलसिला अनवरत चलता रहा। गुड़हल, कमल और गुलाब के पुष्पों से किया गया देवी मां का भव्य शृंगार के बाद मां का रूप देखते ही बन रहा था। श्रद्धालुओं की सुख सुविधा के लिए प्रशासनिक तौर पर बेहतर सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं।
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साधकों ने तंत्र मंत्र से की महानिशा की पूजा
-काल रात्रि सतमी तिथि पर भैरव कुंड पर लगा रहा साधकों का जमावड़ा
चैत्र नवरात्र की सप्तमी काल रात्रि पर विंध्याचल के पहाड़ पर महानिशा की पूजन करने के लिए साधकों का हुजूम उमड़ पड़ा। साधकों ने विधि विधान से अर्ध रात्रि में रामगया घाट, भैरव कुंड, अकोढी गांव स्थित कंकाल काली सहित अष्टभुजा पहाड़ की कंदराओं गुफाओं में महानिशा की पूजा की। विंध्य के पहाड़ पर जगह-जगह बैठे साधक यंत्र तंत्र मंत्र के माध्यम से साधना में तल्लीन नजर आए। अष्टभुजा पहाड़ पर तंत्र-मंत्र यंत्र की गूंज पूरी रात गूंजती रही। भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन की तरफ से पुख्ता इंतजाम किया गया था। महानिशा का पूजन देखने के लिए विंध्याचल सहित मिर्जापुर नगर के लोग भी बड़ी संख्या में पहाड़ पर पहुंचे। सूर्यास्त होते ही अष्टभुजा पहाड़ के त्रिकोण मार्ग पर गहमागहमी काफी बढ़ गई थी। त्रिकोण मार्ग पर विभिन्न मंदिरों में तंत्र साधना का अद्भुत अनुष्ठान शासकों द्वारा किया गया। श्मशान घाट पर भी जगह-जगह बैठकर दूर दराज से आए साधक यंत्र तंत्र मंत्र के माध्यम से पूजन अनुष्ठान करने में लगे रहे।
महाकाली के दरबार में उमड़े श्रद्धालु
चैत्र नवरात्र की सप्तमी तिथि पर काली खोह पहाड़ पर विराजमान महाकाली के दरबार में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी तरह-तरह के पुष्पों से मां का भव्य शृंगार किया गया था। दर्शन पाकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। माता के दर्शन पूजन के बाद भक्तजनों ने मंदिर परिसर में रक्षा बांध मन्नते मांगी। इसके बाद श्रद्धालुओं ने पहाड़ पर लंगूरों को चना गुड़ का प्रसाद बांटा।
मां अष्टभुजी देवी का दर्शन पाकर श्रद्धालु निहाल
अष्टभुजा पहाड़ पर पहुंचे दर्शनार्थी मां अष्टभुजी देवी के भव्य स्वरूप का दर्शन करके अभिभूत हो उठे मां विंध्यवासिनी देवी का दर्शन पूजन करने के बाद किसी ने रोपवे के माध्यम से तो किसी ने सीढ़ियां चढ़कर देवी मां का दर्शन पूजन किया मां का दर्शन पूजन करने के लिए अष्टभुजा पहाड़ के नीचे श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रही कतार में खड़े आस्थावान हाथ में नारियल चुनरी माला फूल प्रसाद लिए मां का जय जय कार लगाते हुए देवी धाम की तरफ बढ़े चढ़े जा रहे थे।
विंध्य पर्वत का सीता कुड : राम जानकी के आगमन का साक्षी है
मां विंध्यवासिनी दरबार से मात्र तीन किलोमीटर की दूरी पर अष्टभुजा के पश्चिम भाग में स्थित है सीता कुंड राम जानकी के आगमन का साक्षी है। त्रेता युग में निर्मित सीता कुंड का जल औषधीय गुणों से भरा है। मान्यता है इसके जल पान करने से कई लाइलाज बीमारियां तक ठीक हो जाती हैं। आध्यात्मिक धर्म गुरु त्रियोगी मिट्ठू मिश्र ने बताया वनवास काल में मां सीता ने यहां रसोई बनाई थी। जल की आवश्यकता पड़ने पर भगवान श्रीराम ने बाण मारकर यहां पानी का स्रोत निकाला था। जो सीता कुंड के नाम से विख्यात है। इस कुंड से बारहों मास अत्यंत शीतल, मधुर जल निकलता रहता है।
असक्तों को मंदिर तक पहुंचा रहे गाइड
चैत्र नवरात्र मेले में स्काउट दल श्रद्धालुओं की सेवा में लगे रहे। श्रद्धालुओं को पानी पिलाने से लेकर बुजुर्ग और अशक्त दर्शनार्थियों को मंदिर में पहुुंचाकर दर्शन पूजन कराया जा रहा है। स्काउट दल के इस कार्य को लोग सराहते दिखे।

मां चंडिका देवी।-सोशल मीडिया।- फोटो : Samvad

मां चंडिका देवी।-सोशल मीडिया।- फोटो : Samvad