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Mirzapur News: प्यार की बंशी बोले कान्हा की
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चुनार किला घाट पर आयोजित कवि सम्मेलन में रचनाओं की प्रस्तुति करते कविगण। संवाद
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- हास्य व्यंग्य कवि सम्मेलन में कवियों ने दी रंगारंग प्रस्तुति
चुनार। नैनागढ़ वेलफेयर ट्रस्ट के तत्वावधान में रविवार की रात किला घाट पर होली मिलन समारोह में आयोजित कवि सम्मेलन में कवियों ने एक से बढ़कर एक रंगारंग प्रस्तुति दी। इस दौरान विविध सांस्कृतिक एवं धार्मिक कार्यक्रम भी हुए।
गंगाघाट पर शाम लोक गायक राजेश यादव व उनके टीम की ओर से रंगारंग होली गीत के बाद रात में हास्य व्यंग्य कवि सम्मेलन हुआ। इसमें मध्यप्रदेश, प्रयागराज, रायबरेली, गहमर गाजीपुर, वाराणसी, चंदाैली सहित क्षेत्र के अदलहाट, अहरौरा एवं नगर के कई कवियों ने काव्य पाठ कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। काव्य पाठ का शुभारंभ विभा सिंह ने सरस्वती वंदना से की। मनोज मधुर ने होली पर आधारित रचना, आयी है ऋतुराज तो सुगंध लिजिए, हंसेंगी कलियां भवरों ने अनुबंध किए सुनाया। सुरेंद्र मिश्र अंकुर ने सुनाया, इ इंडिया का हव, भारत कहे मे लाज लगत हव। नरसिंह साहसी ने सुनाया-आम बऊरल, महुआ उचाए लगल। विभा सिंह ने अपने गीत के माध्यम से कृष्ण व राधा के प्रेम को दर्शाते हुए सुनाया, प्यार की बंशी बोले कान्हा की, जब भी बोले गीत, कोई हो युग बनकर बावरिया राधा डोलेगी। इसके साथ ही विहरी लाल अंबर, मिथलेश '''''''' गहमरी, राजेश मिश्र ज्योति, आदित्य पदयात्री, माखनलाल झटपट, राकेश राही आदि ने भी कविताओं को सुनाया। इस दौरान दिनेश सिंह पटेल, लक्ष्मीकांत पांडेय, शीतला प्रसाद यादव, सौरभ पुजारी, चंद्रहास गुप्ता, दंत चिकित्सक श्रीप्रकाश श्रीवास्तव, डॉ सत्यवान श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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चुनार। नैनागढ़ वेलफेयर ट्रस्ट के तत्वावधान में रविवार की रात किला घाट पर होली मिलन समारोह में आयोजित कवि सम्मेलन में कवियों ने एक से बढ़कर एक रंगारंग प्रस्तुति दी। इस दौरान विविध सांस्कृतिक एवं धार्मिक कार्यक्रम भी हुए।
गंगाघाट पर शाम लोक गायक राजेश यादव व उनके टीम की ओर से रंगारंग होली गीत के बाद रात में हास्य व्यंग्य कवि सम्मेलन हुआ। इसमें मध्यप्रदेश, प्रयागराज, रायबरेली, गहमर गाजीपुर, वाराणसी, चंदाैली सहित क्षेत्र के अदलहाट, अहरौरा एवं नगर के कई कवियों ने काव्य पाठ कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। काव्य पाठ का शुभारंभ विभा सिंह ने सरस्वती वंदना से की। मनोज मधुर ने होली पर आधारित रचना, आयी है ऋतुराज तो सुगंध लिजिए, हंसेंगी कलियां भवरों ने अनुबंध किए सुनाया। सुरेंद्र मिश्र अंकुर ने सुनाया, इ इंडिया का हव, भारत कहे मे लाज लगत हव। नरसिंह साहसी ने सुनाया-आम बऊरल, महुआ उचाए लगल। विभा सिंह ने अपने गीत के माध्यम से कृष्ण व राधा के प्रेम को दर्शाते हुए सुनाया, प्यार की बंशी बोले कान्हा की, जब भी बोले गीत, कोई हो युग बनकर बावरिया राधा डोलेगी। इसके साथ ही विहरी लाल अंबर, मिथलेश '''''''' गहमरी, राजेश मिश्र ज्योति, आदित्य पदयात्री, माखनलाल झटपट, राकेश राही आदि ने भी कविताओं को सुनाया। इस दौरान दिनेश सिंह पटेल, लक्ष्मीकांत पांडेय, शीतला प्रसाद यादव, सौरभ पुजारी, चंद्रहास गुप्ता, दंत चिकित्सक श्रीप्रकाश श्रीवास्तव, डॉ सत्यवान श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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