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UP: बंद कमरे में थमती गईं सांसें, अंजान रहे परिजन... मां शाहिस्ता को तो पता भी नहीं उसने दो बच्चों को खो दिया

अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 17 Jan 2026 03:10 PM IST
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सार

मुरादाबाद के छजलैट में ठंड से बचने के लिए कमरे में जलाई अंगीठी एक परिवार के दो मासूमों के लिए काल बन गई। अंगीठी के धुएं से दम घुटने पर आहिल (4) और उसकी बहन आयरा (3) की मौत हो गई। बच्चों के माता-पिता और एक भाई की हालत गंभीर है। 

A young brother and sister died of suffocation in Moradabad
छजलैट में दम घुटने से भाई-बहन की जान गई। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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मुरादाबाद के कांठ के छजलैट में शुक्रवार को ठंड से बचने के लिए कमरे में जलाई अंगीठी के कारण दम घुटने से दो बच्चों आहिल (4) और बेटी आयरा (3) की मौत और दंपती सहित तीन की हालत बिगड़ने की घटना से परिजनों के साथ ही हर कोई दुखी है। 

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वहीं जावेद की पत्नी शाहिस्ता की हालत फिर बिगड़ने पर मुरादाबाद के निजी अस्पताल से हायर सेंटर मेरठ रेफर कर दिया गया है। वह अभी होश में नहीं है, उसको तो यह भी नहीं पता है कि उसने हादसे में दो मासूम बच्चों को खो दिया है। 
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बता दें कि छजलैट निवासी जावेद की शादी करीब सात साल पहले जनपद बिजनौर अंतर्गत कस्बा चांदपुर के मोहल्ला सराय रफी मेव वाली मस्जिद की शाहिस्ता से हुई थी। शादी के बाद पति-पत्नी दोनों खुश थे और दोनों से चार बच्चे, जिसमें शिफान, तैमूर, आहिल और बेटी आयरा थे। लेकिन तीन साल पहले दिल की बीमारी से तैमूर की मौत हो गई थी।

अब शुक्रवार को इस हादसे में आहिल और आयरा की भी मौत हो गई। जिंदगी और मौत से अस्पताल में जूझ रही शाहिस्ता को तो अभी यह भी नहीं पता है कि उसने अपने दो जिगर के टुकड़ों को और खो दिया है। उसकी गोद में चार में से अब शिफान ही रह गया है।

दंपती के एक बेटे की पहले भी हो चुकी है मौत
छजलैट के चाय विक्रेता जावेद के बेटे आहिल (4) और बेटी आयरा (3) की कमरे में जलाई गई अंगीठी के धुएं से दम घुटने से हुई मौत के बाद गांव में माहाैल गमगीन है। बताया जाता है कि जावेद के पांच साल के एक बेटे तैमूर की तीन साल पहले दिल की बीमारी के चलते मृत्यु हो गई थी।

अब दो और बच्चों की मौत से इस परिवार पर गमों का पहाड़ टूट गया है। जावेद के दो बच्चों की मौत ने सभी को झकझोर दिया। सुबह से लेकर शाम तक लोग जावेद के घर आते रहे और हर किसी की जुबां पर बस यही शब्द था कि बहुत ही गहत हुआ है। ग्रामीण पीड़ित जावेद और उसके परिजनों को ढांढ्स बंधा रहे हैं।

बंद कमरे में थमती गईं सांसें, अंजान रहे परिजन
मुरादाबाद के छजलैट में बंद कमरे में सांसें थमती गईं और परिजन अन्जान रहे। कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था और खिड़की व रोशनदान से न हवा आ रही थी और न ही धुआं बाहर निकल पा रहा था। जिस कारण धुएं से कमरे में गैस बन गई और दो बच्चे मौत की नींद सो गए।

परिवार के लोगों ने बताया कि जावेद और उसकी पत्नी कमरे में अंगीठी जलाकर सोते थे लेकिन हल्का सा दरवाजा खोलकर रखते थे। जिससे अंगीठी से निकलने वाला धुआं बाहर निकल जाए लेकिन रात दरवाजा पूरी तरह से बंद था।

पूरी रात कमरे में अंगीठी में कोयले जलते रहे और जहरीली गैस बनती रही। दरवाजा और खिड़की व रोशनदान बंद होने के कारण ऑक्सीजन भी कमरे में नहीं पहुंच पाई। पड़ोस में सो रहे जावेद के भतीजे और साले को कुछ पता नहीं चल पाया।

11 बजे चाय की दुकान बंद कर आया था जावेद
जावेद की घर के पास ही कैंटीन है। रात करीब 11 बजे तक चाय की दुकान खोली थी। दुकान से आने के बाद खाना खाया और साले बहनोई ने बातचीत की। रात करीब 12 बजे के बाद वह अपने कमरे में सोने के लिए चला गया था। सुबह नौ बजे तक जावेद,उसकी पत्नी बेटे और बेटी नहीं जागे तो परिजन परेशान होने लगे थे।

ठंड से बचाव को जलाई अंगीठी बनी जानलेवा, दम घुटने से मासूम बहन-भाई की मौत
मुरादाबाद के कांठ में ब्लोअर से कमरे में लगी आग से शायर मंसूर उस्मानी की बेटी हुमा की जान जाने के कुछ घंटे बाद ही छजलैट में ठंड से बचने के लिए कमरे में जलाई अंगीठी एक परिवार के दो मासूमों के लिए काल बन गई। अंगीठी के धुएं से दम घुटने पर आहिल (4) और उसकी बहन आयरा (3) की मौत हो गई।

बच्चों के माता-पिता और एक भाई की हालत गंभीर है। निजी अस्पताल में उनका उपचार चल रहा है। छजलैट के रहने वाले जावेद मुरादाबाद-हरिद्वार रोड पर एक पेट्रोल पंप के पास चाय की दुकान चलाते हैं। दुकान के पीछे कुछ दूरी पर उनका घर है। परिजनों के अनुसार बृहस्पतिवार की रात करीब 11 बजे जावेद (35) अपनी पत्नी शाहिस्ता (32), बेटे शिफान (6), दूसरे बेटे आहिल (4) और बेटी आयरा (3) के साथ घर के कमरे में सोए थे।

भीषण ठंड से बचाव के लिए कोयले की अंगीठी जलाकर कमरे में रख ली थी। शुक्रवार की सुबह करीब नौ बजे तक जावेद के कमरे का दरवाजा नहीं खुला तो बराबर के कमरे में सो रहे जावेद के भतीजे आमिर खान और साले सलाउद्दीन ने दरवाजा खटखटाया। कुछ देर बाद जावेद ने लड़खड़ाते कदमों से दरवाजा खोला। वह अर्धचेतन स्थिति में थे। इससे घबराए भतीजे ने कमरे में जाकर देखा तो भीतर कोयले के धुएं की गंध भरी थी।

कमरे में जावेद की पत्नी व तीनों बच्चे बेड पर बेहोश पड़े थे। हालात देख आमिर और सलाउद्दीन ने शोर मचाया तब आसपास के लोग भी घर में आ गए। परिजनों ने लोगों की मदद से जावेद, उनकी पत्नी, बेटी और दोनों बेटों को छजलैट के एक निजी अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सक ने मासूम आहिल और आयरा को मृत घोषित कर दिया। जावेद, शाहिस्ता व शिफान को भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया। घर में मचे कोहराम के बीच सूचना पर पुलिस पहुंची। 

एसपी देहात कुंवर आकाश सिंह ने बताया कि परिवार के अनुरोध पर बच्चों के शवों का पोस्टमार्टम नहीं हुआ। शाम को उन्हें सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। चिकित्सक व पुलिस ने कमरे में अंगीठी के धुएं से दम घुटने को मौत का कारण बताया है। इस बीच परिजन शाहिस्ता को बेहतर इलाज के लिए मुरादाबाद के निजी अस्पताल ले गए। जावेद और बड़े बेटे शिफान की हालत में सुधार है।

एक दिन पहले मुरादाबाद शहर में ठंड से बचने के लिए ब्लोअर की आग से मशहूर शायर मंसूर उस्मानी की बेटी हुमा उस्मानी (46) की जान चली गई थी। विशेषज्ञ ठंड में इस तरह के प्रयोगों से बचने तथा कमरे में आक्सीजन बनाए रखने का सुझाव दे रहे हैं। फिर भी असावधानी न थमने से हादसे रुक नहीं पा रहे।


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